Aftermarket CNG Kit: आपकी कार में नहीं है CNG? बाहर से किट लगवाने से पहले जान लें नफा-नुकसान
आफ्टरमार्केट CNG किट लगवाने के नफा-नुकसान
अगर आपकी कार में फैक्ट्री-फिटेड CNG नहीं है तो आफ्टरमार्केट किट एक विकल्प हो सकती है. लेकिन इसे लगवाने से पहले फायदे, नुकसान, फिटिंग, वारंटी और जरूरी नियम जानना बेहद जरूरी है. तो आज इस लेख में हम इन्हीं चीजों के बारे में आपको बताने वाले हैं.
Aftermarket CNG Kit Pros and Cons: पेट्रोल की बढ़ती कीमतों ने कार चलाने का खर्च बढ़ा दिया है. ऐसे में CNG लोगों के लिए किफायती विकल्प बनकर सामने आई है. आज बाजार में कई कारें फैक्ट्री-फिटेड CNG के साथ आती हैं. लेकिन हर मॉडल में यह सुविधा नहीं मिलती. ऐसे में लोग अपनी पेट्रोल कार में बाहर से CNG किट लगवाते हैं.
इसे आफ्टरमार्केट CNG किट कहा जाता है. इससे कार की रनिंग कॉस्ट कम हो सकती है. लेकिन इसके साथ कुछ नुकसान भी जुड़े हैं. किट की गलत फिटिंग होने पर कार में परेशानी आ सकती है. वारंटी और डिग्गी स्पेस पर भी इसका असर पड़ सकता है. इसलिए CNG किट लगवाने से पहले कुछ जरूरी बातें जान लेना बेहद जरूरी है.
CNG किट में कौन-कौन से पार्ट्स होते हैं?
आफ्टरमार्केट CNG किट सिर्फ एक सिलेंडर से नहीं बनती. इसमें कई पार्ट्स मिलकर काम करते हैं. हर पार्ट का अपना अलग काम होता है. आइए समझते हैं.
CNG सिलेंडर
- CNG सिलेंडर आमतौर पर कार की डिग्गी में लगाया जाता है.
- इसी सिलेंडर में हाई-प्रेशर पर CNG स्टोर होती है. यह काफी भारी होता है.
- एक सामान्य सिलेंडर का वजन खाली होने पर भी करीब 70 किलोग्राम तक हो सकता है.
- बाजार में हल्के कार्बन-फाइबर सिलेंडर भी मिलते हैं. हालांकि, इनकी कीमत काफी ज्यादा होती है.
रिड्यूसर
- रिड्यूसर इंजन बे में लगाया जाता है.
- सिलेंडर में CNG करीब 200 बार के दबाव पर रहती है. रिड्यूसर इस दबाव को कम करता है.
- इसके बाद गैस को इंजन के लिए जरूरी प्रेशर पर भेजा जाता है.
इंजेक्टर रेल और नोजल
- इनका काम इंजन तक CNG पहुंचाना है.
- इंजेक्टर इंजन की जरूरत के हिसाब से गैस की मात्रा नियंत्रित करता है.
- इससे इंजन को जरूरत के मुताबिक CNG मिलती रहती है.
MAP सेंसर और फिल्टर
- MAP सेंसर गैस के प्रेशर और तापमान की जानकारी देता है.
- वहीं, फिल्टर गैस में मौजूद अशुद्धियों को साफ करने में मदद करता है.
- दोनों पार्ट CNG सिस्टम के सही तरीके से काम करने के लिए जरूरी हैं.
CNG ECU
- CNG ECU कार के मुख्य ECU के साथ मिलकर काम करता है.
- यह तय करता है कि इंजन में CNG कितनी मात्रा में भेजनी है. साथ ही इसकी टाइमिंग भी नियंत्रित करता है.
स्विच
- यह आमतौर पर डैशबोर्ड पर लगाया जाता है.
- इसकी मदद से ड्राइवर पेट्रोल और CNG के बीच स्विच कर सकता है.
- कई किट में इसी स्विच से CNG का लेवल भी पता चलता है.
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कार में CNG किट कैसे लगाई जाती है?
- CNG किट की फिटिंग अनुभवी और अधिकृत वर्कशॉप से ही करवानी चाहिए.
- पूरी प्रक्रिया में करीब 4 से 5 घंटे लग सकते हैं. इस दौरान कार में कई जरूरी बदलाव किए जाते हैं.
- सबसे पहले इंजन और स्पार्क प्लग की जांच होती है.
- इसके बाद रिड्यूसर, इंजेक्टर और CNG ECU को सही जगह पर लगाया जाता है.
- CNG सिलेंडर को डिग्गी में मजबूत फ्रेम की मदद से फिट किया जाता है.
- इसके बाद हाई-प्रेशर पाइप और वायरिंग को सुरक्षित तरीके से लगाया जाता है.
- सिस्टम में CNG भरने के बाद गैस लीक की जांच की जाती है. इसके लिए सेंसर और साबुन के पानी से भी जांच की जा सकती है.
- अंत में सॉफ्टवेयर की मदद से सिस्टम की ट्यूनिंग होती है. इसके बाद कार का रोड टेस्ट किया जाता है.
आफ्टरमार्केट CNG किट के फायदे
रनिंग कॉस्ट कम हो सकती है
- CNG आमतौर पर पेट्रोल से सस्ती पड़ती है.
- CNG पर कार चलाने से ईंधन का खर्च कम हो सकता है. खासकर उन लोगों के लिए यह फायदेमंद है, जो रोजाना ज्यादा दूरी तय करते हैं.
नई कार खरीदने की जरूरत नहीं
- अगर आपकी मौजूदा पेट्रोल कार अच्छी कंडीशन में है, तो उसमें CNG किट लगवाई जा सकती है.
- ऐसे में सिर्फ CNG का विकल्प पाने के लिए नई कार खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती.
ज्यादा मॉडल्स में विकल्प
- हर कार कंपनी अपने सभी मॉडल्स में फैक्ट्री-फिटेड CNG नहीं देती.
- ऐसे में आफ्टरमार्केट किट कुछ अतिरिक्त मॉडल्स में CNG का विकल्प दे सकती है.
आफ्टरमार्केट CNG किट के नुकसान
वारंटी पर असर
- बाहर से CNG किट लगवाने पर कार की कंपनी वारंटी प्रभावित हो सकती है.
- खासकर इंजन और फ्यूल सिस्टम से जुड़े हिस्सों पर इसका असर पड़ सकता है.
- इसलिए किट लगवाने से पहले कंपनी की वारंटी शर्तें जरूर जांच लें.
डिग्गी की जगह कम हो जाती है
- आफ्टरमार्केट CNG किट में सिलेंडर आमतौर पर डिग्गी में लगाया जाता है.
- इससे सामान रखने की जगह कम हो जाती है.
- फैक्ट्री-फिटेड CNG कारों में कंपनी पहले से ही सिलेंडर की जगह को ध्यान में रखकर डिजाइन तैयार करती है.
गलत फिटिंग से परेशानी
- CNG किट की फिटिंग बेहद महत्वपूर्ण है.
- अगर खराब क्वालिटी की किट लगाई गई या फिटिंग सही नहीं हुई, तो गैस लीक जैसी समस्या हो सकती है.
- इंजन की परफॉर्मेंस और इलेक्ट्रिकल सिस्टम पर भी असर पड़ सकता है.
- इसलिए सिर्फ भरोसेमंद और अधिकृत सेंटर से ही किट लगवानी चाहिए.
किन कारों में CNG किट नहीं लगवानी चाहिए?
हर कार के लिए आफ्टरमार्केट CNG किट सही विकल्प नहीं है. खासकर कुछ कारों में इसे लगवाने से पहले ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए.
- डीजल कार: डीजल इंजन का काम करने का तरीका अलग होता है. इसलिए सामान्य CNG किट को डीजल कार में लगाना आसान नहीं है.
- हाईब्रिड कार: हाईब्रिड कार में पेट्रोल इंजन और इलेक्ट्रिक मोटर दोनों काम करते हैं. ऐसे में CNG सिस्टम की कैलिब्रेशन ज्यादा जटिल हो सकती है.
- खराब कंडीशन वाली कार: अगर इंजन पहले से कमजोर है, तो CNG किट लगवाना सही फैसला नहीं हो सकता.
- पहले कार की खराबी को ठीक करवाना जरूरी है. इसके बाद ही CNG किट के बारे में सोचना चाहिए.
CNG किट की मेंटेनेंस कैसे करें?
- CNG किट लगवाने के बाद उसकी नियमित जांच भी जरूरी है.
- समय-समय पर CNG पाइप और कनेक्शन में लीकेज की जांच करवाएं.
- CNG फिल्टर को निर्माता की सलाह के अनुसार बदलवाते रहें.
- स्पार्क प्लग और इंजन की भी नियमित जांच जरूरी है.
- कार की सर्विसिंग में CNG सिस्टम को भी शामिल करवाएं.
RTO और इंश्योरेंस का रखें ध्यान
- CNG किट लगवाने के बाद RTO से जुड़े जरूरी दस्तावेज अपडेट करवाने होते हैं.
- वाहन की RC में CNG की जानकारी दर्ज करवाना जरूरी है.
- इसके अलावा अपनी इंश्योरेंस कंपनी को भी इसकी जानकारी दें.
- ऐसा नहीं करने पर भविष्य में इंश्योरेंस क्लेम के दौरान परेशानी हो सकती है.
आफ्टरमार्केट CNG किट लगवाएं या नहीं?
अगर आपकी कार अच्छी कंडीशन में है और आप रोजाना काफी दूरी तय करते हैं, तो CNG किट एक अच्छा विकल्प हो सकती है.
- इससे पेट्रोल के मुकाबले रनिंग कॉस्ट कम करने में मदद मिल सकती है.
- लेकिन सिर्फ कम ईंधन खर्च देखकर फैसला न लें.
- किट की क्वालिटी, फिटमेंट सेंटर, वारंटी और डिग्गी स्पेस को भी ध्यान में रखें.
- RTO और इंश्योरेंस से जुड़े नियमों का पालन करना भी जरूरी है.
- सबसे जरूरी बात है कि CNG किट अधिकृत और सरकार से मान्यता प्राप्त सेंटर से ही लगवाएं.
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