CJP के बाद अब E20 जनता पार्टी की एंट्री, 100% पेट्रोल के लिए सोशल मीडिया पर शुरू हुआ ऑनलाइन अभियान

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एआई रेप्रेसेंटेटिव इमेज

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CJP के बाद अब E20 जनता पार्टी सोशल मीडिया पर चर्चा में है. यह अभियान E20 पेट्रोल का विरोध नहीं, बल्कि लोगों को 100% पेट्रोल खरीदने का ऑप्शन देने की मांग कर रहा है. जानिए E20 जनता पार्टी क्या है, इसकी प्रमुख मांगें क्या हैं और E20 पेट्रोल को लेकर विवाद क्यों बढ़ रहा है.

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देश में पेट्रोल को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई है. इस बार मुद्दा पेट्रोल की कीमत नहीं, बल्कि पेट्रोल में मिलने वाले एथेनॉल का है. सोशल मीडिया पर E20 जनता पार्टी (E20 Janata Party) नाम से एक नया अभियान तेजी से वायरल हो रहा है. यह अभियान सरकार से सिर्फ एक मांग कर रहा है, कि लोगों को E20 पेट्रोल के साथ 100% शुद्ध पेट्रोल खरीदने का ऑप्शन भी मिलना चाहिए. इस अभियान की खास बात यह है कि यह किसी राजनीतिक पार्टी का आंदोलन नहीं है, बल्कि सोशल मीडिया पर शुरू हुआ एक डिजिटल कैंपेन है, जो मीम्स और मजाकिया अंदाज में अपनी बात लोगों तक पहुंचा रहा है. यही वजह है कि इसकी तुलना कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से की जा रही है, जिसने कुछ समय पहले NEET पेपर लीक मामले को लेकर सोशल मीडिया पर बड़ा अभियान चलाया था.

आखिर क्या है E20 जनता पार्टी?

E20 जनता पार्टी खुद को कंज्यूमर्स के अधिकारों के लिए शुरू किया गया नागरिक अभियान बताती है. इस अभियान का कहना है कि जिस तरह लोग किसी भी प्रोडक्ट को खरीदते समय अपनी पसंद चुन सकते हैं, उसी तरह पेट्रोल खरीदते समय भी उन्हें ऑप्शन मिलना चाहिए. अभियान चलाने वालों का कहना है कि वे E20 पेट्रोल का विरोध नहीं कर रहे हैं, बल्कि सिर्फ इतना चाहते हैं कि पेट्रोल पंपों पर E20 के साथ-साथ 100% पेट्रोल भी उपलब्ध कराया जाए, ताकि ग्राहक अपनी जरूरत के हिसाब से फैसला ले सकें.

E20 जनता पार्टी की क्या हैं मांगें?

E20 जनता पार्टी ने सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं. इनमें सबसे अहम मांग है कि देश के हर पेट्रोल पंप पर लोगों को E20 और 100% पेट्रोल दोनों में से किसी एक को चुनने का अधिकार मिले. इसके अलावा अभियान की अन्य मांगें भी हैं. जैसे-

  • पेट्रोल पंपों पर साफ-साफ लिखा जाए कि कौन-सा फ्यूल बेचा जा रहा है.
  • अलग-अलग फ्यूल ब्लेंड के फायदे और नुकसान से जुड़ा पूरा डेटा पब्लिक किया जाए.
  • माइलेज, इंजन की परफॉर्मेंस, प्रदूषण और मेंटेनेंस कॉस्ट पर स्वतंत्र एजेंसियों से रिसर्च कराई जाए.
  • रिसर्च की रिपोर्ट लोगों के लिए पब्लिक की जाए, ताकि वे सही जानकारी के आधार पर फैसला ले सकें.

लोग E20 पेट्रोल को लेकर क्यों जता रहे हैं चिंता?

अभियान से जुड़े लोगों का दावा है कि कई वाहन मालिक E20 पेट्रोल को लेकर अपनी चिंता जाहिर कर रहे हैं. उनका कहना है कि इससे कुछ गाड़ियों की माइलेज कम हो रही है, पुराने वाहनों के इंजन पर असर पड़ सकता है, सर्विस और रिपेयर का खर्च बढ़ सकता है और लंबे समय में इंजन की परफॉर्मेंस प्रभावित होने का खतरा है. हालांकि, इन दावों पर सरकार की राय अलग है.

कॉकरोच जनता पार्टी से क्यों हो रही तुलना?

E20 जनता पार्टी का अंदाज काफी हद तक कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) जैसा है. CJP ने 2026 में NEET पेपर लीक और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को जोड़ा था. मीम्स और व्यंग्य के जरिए शुरू हुआ वह अभियान बाद में बड़े जन आंदोलन में बदल गया. अब E20 जनता पार्टी भी उसी स्ट्रैटेजी पर काम करती दिख रही है. सोशल मीडिया पर यह अभियान लगातार लोगों से जुड़ रहा है और युवाओं से समर्थन की अपील कर रहा है.

E20 जनता पार्टी और CJP में क्या अंतर है?

दोनों अभियानों का तरीका भले ही एक जैसा हो, लेकिन दोनों की स्थिति अलग है. कॉकरोच जनता पार्टी एक बड़े जन आंदोलन के रूप में सामने आई थी. वहीं E20 जनता पार्टी फिलहाल केवल सोशल मीडिया पर चल रहा एक डिजिटल अभियान है. इसका अभी तक कोई औपचारिक संगठन, संस्थापक या बड़ा जमीनी नेटवर्क सामने नहीं आया है.

E20 पेट्रोल क्या है?

E20 ऐसा पेट्रोल है, जिसमें 20% एथेनॉल और 80% पेट्रोल मिलाया जाता है. भारत सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से इसे देशभर में डिफॉल्ट पेट्रोल के तौर पर लागू किया है. सरकार का कहना है कि इससे कई फायदे होंगे. जैसे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी, गन्ना किसानों की आय बढ़ेगी, प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी और देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी. सरकार का यह भी कहना है कि 100% पेट्रोल पूरी तरह बंद नहीं हुआ है, लेकिन यह केवल कुछ चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर प्रीमियम फ्यूल के रूप में उपलब्ध है और इसकी कीमत सामान्य पेट्रोल से काफी ज्यादा है.

E20 पेट्रोल को लेकर विवाद क्यों बढ़ रहा है?

E20 पेट्रोल लागू होने के बाद कई वाहन मालिकों ने दावा किया कि उनकी गाड़ियों की माइलेज पहले से कम हो गई है और पुरानी गाड़ियों में इंजन से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं. हालांकि सरकार का कहना है कि उसे अब तक E20 पेट्रोल से वाहन प्रदर्शन पर कोई व्यापक या प्रमाणित शिकायत नहीं मिली है. फिलहाल E20 जनता पार्टी इस पूरे मुद्दे को उपभोक्ता के अधिकार से जोड़कर देख रही है. उनका कहना है कि सवाल E20 के पक्ष या विरोध का नहीं, बल्कि चुनाव के अधिकार (Right to Choose) का है. यही वजह है कि यह अभियान सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है और आने वाले दिनों में इस पर बहस और तेज हो सकती है.

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शिवानी शाह

लेखक के बारे में

By शिवानी शाह

शिवानी शाह टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में वह कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रही हैं. वह स्मार्टफोन्स, टेलीकॉम अपडेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), गैजेट्स, बायर्स गाइड और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों को कवर करती हैं.

टेक्नोलॉजी सेक्टर में शिवानी शाह की मजबूत पकड़ स्मार्टफोन लॉन्च/रिव्यूज, गैजेट रिव्यूज, टिप्स एंड ट्रिक्स, बायर्स गाइड, टेलीकॉम अपडेट्स, AI टूल्स/फीचर्स और ट्रेंडिंग टेक टॉपिक्स से जुड़े विषयों में है. ऑटोमोबाइल सेक्टर में वह नई कार/बाइक/स्कूटर्स की लॉन्चिंग, गाड़ियों के फीचर्स, बायर्स गाइड, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), ट्रेंडिंग ऑटो टॉपिक्स और अपडेट्स पर रिसर्च-बेस्ड कंटेंट लिखती हैं. उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर सिर्फ लॉन्च और फीचर्स की जानकारी तक सीमित न रहे, बल्कि पाठकों को यह भी समझ आए कि वह उनके लिए कितनी काम की है.

शिवानी शाह ने साल 2020 में करीम सिटी कॉलेज, जमशेदपुर से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन और साल 2024 में अपेक्स यूनिवर्सिटी, जयपुर से मास्टर्स की पढ़ाई पूरी की. पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने मीडिया और डिजिटल स्टोरीटेलिंग की बारीकियों को समझा और धीरे-धीरे टेक और ऑटो जर्नलिज्म की ओर अपना फोकस बढ़ाया.

अपने करियर की शुरुआत शिवानी शाह ने झारखंड के डिजिटल न्यूज पोर्टल Lagatar.com से की, जहां करीब एक साल तक उन्होंने काम किया. इसके बाद जयपुर में पढ़ाई के दौरान Hamara Samachar यूट्यूब चैनल में वह न्यूज एंकर रहीं. मास्टर्स पूरी करने के बाद उन्होंने झारखंड डिजिटल न्यूज पोर्टल The News Post में करीब एक साल तक काम किया. इन संस्थानों में काम करने के दौरान उन्होंने लोगों तक सही, भरोसेमंद और आसान भाषा में जानकारी पहुंचाने का अनुभव हासिल किया.

शिवानी का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और खरीदारी के फैसलों को प्रभावित करती हैं. इसलिए वह हर खबर को अच्छी तरह रिसर्च करके, आसान भाषा में और सही जानकारी के साथ लिखती हैं, ताकि हर उम्र के पाठक उसे आसानी से समझ सकें.

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