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आवास के पैसों से बन रहे मार्केटिंग कॉम्पलेक्स और गोशाला

Updated at : 30 Mar 2024 12:03 AM (IST)
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आवास के पैसों से बन रहे मार्केटिंग कॉम्पलेक्स और गोशाला

:::::::: ::::::::: :::::::: ::::::::: (फोटो : प्रधानमंत्री आवास योजना के पैसे से चतरा में गोशाला और गिरिडीह में मार्केटिंग कॉम्पलेक्स बनाया गया.) :::::::: ::::::::: :::::::: :::::::::

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:::::::: ::::::::: :::::::: ::::::::: (फोटो : प्रधानमंत्री आवास योजना के पैसे से चतरा में गोशाला और गिरिडीह में मार्केटिंग कॉम्पलेक्स बनाया गया.) :::::::: ::::::::: :::::::: ::::::::: – अयोग्य लोगों को योजना का लाभ पहुंचा रहे जिम्मेदार पदाधिकारी – जांच में खुलासे के बावजदू किसी पर भी नहीं हो रही कोई कार्रवाई :::::::: ::::::::: ::::::::: :::::::: विशेष संवाददाता, रांची प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के क्रियान्वयन में लगे लोग साजिश के तहत अयोग्य लोगों को योजना का लाभ दे रहे हैं. योजना के तहत आवास के बदले मार्केटिंग कॉम्पलेक्स और गोशाला का निर्माण हो रहा है. साथ ही इससे संबंधित वेब पोर्टल पर गलत डेटा अपलोड किया जा रहा है. हालत यह है कि इस योजना के नाम पर चतरा में गोशाला और गिरिडीह में मार्केटिंग कॉम्पलेक्स निर्माण के मामले पकड़ में आने के बावजूद किसी पर कार्रवाई नहीं हुई. ‘प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण)’ के तहत केंद्र सरकार की ओर से ग्रामीण क्षेत्र में रहनेवाले बेघर गरीब लोगों को पक्का आवास उपलब्ध कराया जाता है. यह योजना फिलहाल ग्रामीण विकास विभाग द्वारा मनरेगा के तहत संचालित की जा रही है. योजना के लाभुक को घर बनाने के लिए कुल 1.30 लाख रुपये मिलते हैं. घर बनाने में मजदूरी के मद में मनरेगा से 18 हजार रुपये और शौचालय निर्माण के लिए 12 हजार रुपये दिये जाते हैं. इसके अलावा लाभुक को उज्ज्वला योजना के तहत रसोई गैस की सुविधा भी मिलती है. एक ही परिवार के पांच लोगों को मिला योजना का लाभ गिरिडीह जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के क्रियान्वयन में गड़बड़ी की शिकायत मिली थी. जांच में पाया गया कि अधिकारियों की मिलीभगत से जिले की लताकी पंचायत में एक ही परिवार के पांच ऐसे लोगों को योजना का लाभ दिया गया, जिनके पास पहले से ही पक्के मकान थे. लाभुकों में राजेश हाजरा, अवधेश हाजरा, दिलिया देवी, दिलीप हाजरा और एक अन्य का नाम शामिल है. पांचों लोगों ने सभी आवास योजनाओं को मिला कर एक मार्केटिंग कॉम्पलेक्स बना लिया. इन लोगों ने निर्मित भवन से आवास योजना का ‘लोगो’ भी हटा दिया. इस मार्केटिंग कॉम्पलेक्स में अब सैलून, आटा चक्की और एलपीजी गैस सिलिंडर की आपूर्ति जैसी व्यापारिक गतिविधियां चल रही हैं. इस पूरे प्रकरण में प्रखंड समन्वयक संतोष वर्मा, सुधीर कुमार, ग्राम पंचायत सेवक जयराज विश्वकर्मा, पंचायत सेवक उर्मिला कुमारी और मुखिया को दोषी पाया गया. जांच अधिकारी ने दोषियों पर प्राथमिकी दर्ज करने और राशि की वसूली की अनुशंसा की थी. हालांकि, किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई. उधर, चतरा जिले में देवरिया पंचायत में बिपती देवी को प्रधानमंत्री आवास योजना(ग्रामीण) का लाभ दिया गया. लेकिन, उन्होंने आवास के बदले गोशाला बनवा ली.

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