शुक्रवार और धनतेरस का शुभ संयोग, आज जरूर करें माता संतोषी की आरती, यहां पढ़े पूरी Santoshi Mata ki Aarti

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शुक्रवार और धनतेरस का शुभ संयोग, आज जरूर करें माता संतोषी की आरती, यहां पढ़े पूरी Santoshi Mata ki Aarti

Santoshi Mata ki Aarti: शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी और संतोषी माता की पूजा करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है. संतोषी माता को खट्टा बिल्कुल भी पसंद नहीं है और शुक्रवार के दिन जो भी खट्टे पदार्थ का सेवन करता है, उनसे मां रुष्ट हो जाती हैं.

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Santoshi Mata ki Aarti: हिन्दू शास्त्रों के अनुसार, शुक्रवार के दिन धन की देवी मां लक्ष्मी और संतोषी माता को समर्पित है. इस दिन मां लक्ष्मी और संतोषी माता की पूजा की जाती है. इस दिन मां लक्ष्मी और संतोषी माता की पूजा करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है. संतोषी माता को खट्टा बिल्कुल भी पसंद नहीं है और शुक्रवार के दिन जो भी खट्टे पदार्थ का सेवन करता है, उनसे मां रुष्ट हो जाती हैं और साधक को माता का आशीर्वाद नहीं मिल पाता हैं. इसके साथ ही अगर आप आज के दिन संतोषी माता की आरती करते है तो आपके ऊपर माता का विशेष कृपा बना रहता है. आपको सभी क्षेत्र में सफलता मिलती है. ऐसे में आप यहां मां संतोषी की पूरी आरती पढ़ सकते हैं…

संतोषी माता की आरती

जय सन्तोषी माता, मैया जय सन्तोषी माता।

अपने सेवक जन की सुख सम्पति दाता ।।

जय सन्तोषी माता….

सुन्दर चीर सुनहरी मां धारण कीन्हो।

हीरा पन्ना दमके तन श्रृंगार लीन्हो ।।

जय सन्तोषी माता….

गेरू लाल छटा छबि बदन कमल सोहे।

मंद हंसत करुणामयी त्रिभुवन जन मोहे ।।

जय सन्तोषी माता….

स्वर्ण सिंहासन बैठी चंवर दुरे प्यारे।

धूप, दीप, मधु, मेवा, भोज धरे न्यारे।।

जय सन्तोषी माता….

गुड़ अरु चना परम प्रिय ता में संतोष कियो।

संतोषी कहलाई भक्तन वैभव दियो।।

जय सन्तोषी माता….

शुक्रवार प्रिय मानत आज दिवस सोही।

भक्त मंडली छाई कथा सुनत मोही।।

जय सन्तोषी माता….

मंदिर जग मग ज्योति मंगल ध्वनि छाई।

बिनय करें हम सेवक चरनन सिर नाई।।

जय सन्तोषी माता….

भक्ति भावमय पूजा अंगीकृत कीजै।

जो मन बसे हमारे इच्छित फल दीजै।।

जय सन्तोषी माता….

दुखी दारिद्री रोगी संकट मुक्त किए।

बहु धन धान्य भरे घर सुख सौभाग्य दिए।।

जय सन्तोषी माता….

ध्यान धरे जो तेरा वांछित फल पायो।

पूजा कथा श्रवण कर घर आनन्द आयो।।

जय सन्तोषी माता….

चरण गहे की लज्जा रखियो जगदम्बे।

संकट तू ही निवारे दयामयी अम्बे।।

जय सन्तोषी माता….

सन्तोषी माता की आरती जो कोई जन गावे।

रिद्धि सिद्धि सुख सम्पति जी भर के पावे।।

जय सन्तोषी माता….

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राधेश्याम कुशवाहा

लेखक के बारे में

By राधेश्याम कुशवाहा

राधेश्याम कुशवाहा को पत्रकारिता की क्षेत्र में 13 साल का अनुभव है. इस सफर की शुरुआत उन्होंने राज एक्सप्रेस न्यूज पेपर भोपाल से की. यहां से आगे बढ़ते हुए समय जगत, राजस्थान पत्रिका, हिंदुस्तान न्यूज पेपर के बाद वर्तमान में प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में यूपी डेस्क का नेतृत्व कर रहे हैं. इन्हें धर्म-अध्यात्म, ज्योतिष, राजनीति, अपराध और सकारात्मक खबरों की रिपोर्टिंग व लेखन में विशेष रुचि रखते हैं.

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