BRICS में शामिल होने को बेताब पाकिस्तान! समझिए भारत की ‘हां’ के बिना क्यों मुश्किल है एंट्री

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BRICS Summit : पाकिस्तान BRICS की पूर्ण सदस्यता के लिए बेताब है, लेकिन भारत की 'हां' के बिना यह मुश्किल है. जानिए इसके पीछे की वजह और पाकिस्तान के आर्थिक हित.

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पाकिस्तान लंबे समय से BRICS में शामिल होने की कोशिश कर रहा है. इस्लामाबाद ने 2023 में समूह की पूर्ण सदस्यता के लिए औपचारिक अनुरोध भी किया था, लेकिन आज तक पाकिस्तान BRICS का पूर्ण सदस्य नहीं बन पाया है.

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अहम सवाल ये है कि पाकिस्तान BRICS समूह में शामिल होने के लिए इतना जोर क्यों लगा रहा है?

पाकिस्तान क्यों चाहता है BRICS की सदस्यता?

  • पाकिस्तान ने 2023 में BRICS की सदस्यता के लिए औपचारिक अनुरोध किया था. दिसंबर 2023 में पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा था कि देश ने BRICS में शामिल होने का औपचारिक अनुरोध किया है और उसे उम्मीद है कि समूह समावेशी बहुपक्षवाद की अपनी नीति के तहत पाकिस्तान के अनुरोध पर विचार करेगा.
  • जानकारों का मानें तो पाकिस्तान के लिए BRICS की सदस्यता सिर्फ विदेश नीति का मुद्दा नहीं है. इसके पीछे उसका बड़ा आर्थिक हित भी है. पाकिस्तान लंबे समय से विदेशी मुद्रा, कर्ज और आर्थिक स्थिरता जैसी चुनौतियों से जूझता रहा है. ऐसे में इस्लामाबाद चाहता है कि उसे पारंपरिक वित्तीय संस्थानों के अलावा भी व्यापार और निवेश के नए रास्ते मिलें.
  • पाकिस्तान के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में पाकिस्तान की जीडीपी वृद्धि दर 3.70 फीसदी रही. इससे पहले 2024-25 में संशोधित वृद्धि दर 3.18 फीसदी रही थी. यानी पाकिस्तान के अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत हैं, लेकिन उसके लिए तेज और टिकाऊ आर्थिक विकास अब भी बड़ी चुनौती है.
  • BRICS जैसे मंच से पाकिस्तान को चीन, रूस, भारत, ब्राजील और दूसरे उभरते बाजारों के साथ आर्थिक सहयोग बढ़ाने का मौका मिल सकता है. यही वजह है कि इस्लामाबाद इसे अपने लिए एक अहम बहुपक्षीय मंच मानता है.

न्यू डेवलपमेंट बैंक पर भी पाकिस्तान की नजर

  • पाकिस्तान की BRICS रणनीति में न्यू डेवलपमेंट बैंक यानी NBD भी महत्वपूर्ण है. फरवरी 2025 में पाकिस्तान की आर्थिक समन्वय समिति ने एनडीबी की सदस्यता के लिए 5,882 पूंजी शेयर खरीदने को मंजूरी दी थी. इन शेयरों की कुल कीमत करीब 582 मिलियन डॉलर बताई गई थी, जिसमें 116 मिलियन डॉलर चुकता पूंजी थी.
  • हालांकि यहां एक बात समझना जरूरी है. एनडीबी का सदस्य बनना BRICS का पूर्ण सदस्य बनने के बराबर नहीं है. दोनों की प्रक्रिया अलग है. फिर भी पाकिस्तान के लिए यह BRICS से जुड़े आर्थिक ढांचे के साथ जुड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.

भारत की हां क्यों है इतनी अहम?

  • BRICS में नए पूर्ण सदस्य को शामिल करने का फैसला किसी वोटिंग बहुमत से नहीं, बल्कि सर्वसम्मति यानी कंसेंसस से होता है. आधिकारिक BRICS प्रक्रिया के मुताबिक नए सदस्य की अंतिम मंजूरी BRICS नेताओं की सहमति से होती है।
  • इसका सीधा मतलब है कि किसी भी मौजूदा सदस्य की गंभीर आपत्ति सदस्यता की राह मुश्किल बना सकती है. ऐसे में भारत की स्थिति पाकिस्तान के लिए खास महत्व रखती है.
  • भारत और पाकिस्तान के रिश्ते लंबे समय से राजनीतिक, सुरक्षा और आतंकवाद से जुड़े मुद्दों के कारण तनावपूर्ण रहे हैं. इसलिए पाकिस्तान की सदस्यता को सिर्फ आर्थिक नजरिए से देखना आसान नहीं है. BRICS के सदस्य देशों के साथ अच्छे राजनयिक संबंध रखना खुद सदस्यता के आधिकारिक मानदंडों में शामिल है.
  • हालांकि यह कहना भी सही नहीं होगा कि भारत अकेले औपचारिक रूप से पाकिस्तान की सदस्यता पर वीटो लगा सकता है, क्योंकि BRICS में अलग से वीटो व्यवस्था नहीं है.

पाकिस्तान को मिला था पार्टनर देश बनने का मौका

  • BRICS ने 2024 में पूर्ण सदस्यता से अलग पार्टनर देश की व्यवस्था शुरू की थी. पाकिस्तान उन देशों की सूची में शामिल था जिन्हें पार्टनर बनने के लिए आमंत्रित किया गया था.
  • BRICS की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक 2025 में जिन देशों ने पार्टनर का दर्जा स्वीकार किया, उनमें बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा और उज्बेकिस्तान शामिल थे. बाद में वियतनाम भी पार्टनर देश बना हालांकि पाकिस्तान ने इस स्वीकार नहीं किया था.

पाकिस्तान के लिए क्यों अहम है BRICS की सदस्यता ?

  • पाकिस्तान के लिए BRICS की सदस्यता आर्थिक और कूटनीतिक दोनों लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती है. लेकिन सदस्यता सिर्फ चीन या रूस के समर्थन से हासिल नहीं होगी. BRICS के मौजूदा नियमों के मुताबिक अंतिम फैसला सभी नेताओं की सर्वसम्मति से होता है.
  • इसलिए पाकिस्तान की सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ आवेदन करना नहीं, बल्कि सभी मौजूदा सदस्यों के साथ ऐसे संबंध बनाना है जिससे उसकी उम्मीदवारी पर सहमति बन सके और इस पूरी प्रक्रिया में भारत-पाकिस्तान के रिश्ते सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक कारकों में से एक बने रहेंगे.
  • यानी पाकिस्तान के लिए BRICS का दरवाजा पूरी तरह बंद नहीं है, लेकिन उसकी एंट्री आसान भी नहीं है. आर्थिक जरूरतें इस्लामाबाद को BRICS के करीब ला रही हैं, जबकि भारत के साथ उसके तनावपूर्ण रिश्ते सदस्यता की राह में सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती है.

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