अप्रैल में चीन जाएंगे डोनाल्ड ट्रंप, जिनपिंग से तकरार या ट्रेड वॉर खत्म?

Author Govind jee
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग.

Trump Xi Meeting: दुनिया के दो सबसे ताकतवर नेताओं, प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप और चीन के प्रेसिडेंट शी जिनपिंग ने हाथ मिलाया है. डोनाल्ड ट्रंप अप्रैल में चीन जाएंगे. जानें कि उस सीक्रेट 90 मिनट की कॉल में क्या हुआ और नया ट्रेड प्लान क्या है.

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Trump Xi Meeting: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक बड़ी अनाउंसमेंट की है. उन्होंने बताया कि वे इसी साल अप्रैल में चीन की यात्रा पर जाएंगे, जहां उनकी मुलाकात चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से होगी. इतना ही नहीं, जिनपिंग भी साल के आखिर तक अमेरिका (व्हाइट हाउस) आने वाले हैं. हालांकि, अभी तक इन मुलाकातों की कोई फिक्स डेट सामने नहीं आई है, लेकिन दोनों देशों के बीच हलचल तेज हो गई है.

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90 मिनट की कॉल और ‘दोस्ती’ पर जोर

4 फरवरी को ट्रंप और जिनपिंग के बीच करीब 90 मिनट तक फोन पर लंबी बातचीत हुई. इस कॉल के बारे में बात करते हुए ट्रंप ने बताया कि उनका फोकस पूरी तरह से ‘ट्रेड’ यानी व्यापार पर था. उन्होंने साफ किया कि इस बातचीत में ईरान या यूक्रेन जैसे ग्लोबल मुद्दों पर कोई चर्चा नहीं हुई. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि यह बातचीत दोनों देशों के लिए बहुत ही पॉजिटिव रही है.

चीन और अमेरिका के बीच ‘म्यूचुअल वाइब्स’

NBC न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि शी जिनपिंग और मेरे बीच बहुत अच्छे रिश्ते हैं. यह जरूरी भी है क्योंकि हम दुनिया के दो सबसे पावरफुल देश हैं. ट्रंप के मुताबिक, जिनपिंग ने उन्हें और फर्स्ट लेडी को चीन आने का न्योता (इन्विटेशन) दिया, जिसे उन्होंने खुशी-खुशी स्वीकार कर लिया. बदले में ट्रंप ने भी उन्हें अमेरिका आने के लिए इनवाइट किया है.

क्या कहता है चीन का सरकारी मीडिया?

चीन की सरकारी न्यूज एजेंसी ‘शिन्हुआ’ (Xinhua) के अनुसार, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी इस बातचीत को काफी इम्पॉर्टेंट बताया है. जिनपिंग का कहना है कि पिछले एक साल में दोनों नेताओं के बीच अच्छी बातचीत रही है, खासकर ‘बुसान’ में हुई मीटिंग के बाद से रिश्तों को एक नई दिशा मिली है. चीन के विदेश मंत्रालय के अनुसार, जिनपिंग ने ‘म्युचुअल रिस्पेक्ट’ (आपसी सम्मान) और ‘विन-विन’ नतीजों पर जोर दिया है. साथ ही, उन्होंने अमेरिका से उन फैसलों को वापस लेने की भी बात कही है जिससे चीन को नुकसान हो रहा है. फैसले इस तरह हैं:

1. भारी-भरकम टैक्स

डोनाल्ड ट्रंप ने चीन से आने वाले सामानों पर 100 प्रतिशत तक का भारी टैक्स (टैरिफ) लगाने का ऐलान किया था. इससे चीनी सामान अमेरिका में बहुत महंगे हो गए हैं और चीन का बिजनेस ठप हो रहा है. जिनपिंग चाहते हैं कि इस ‘टैक्स की दीवार’ को गिराया जाए.

2. हाई-टेक चिप्स पर बैन 

अमेरिका ने चीन को मिलने वाली एडवांस्ड कंप्यूटर चिप्स और AI टेक्नोलॉजी पर पाबंदी लगा दी है. इसके बिना चीन के स्मार्टफोन और इलेक्ट्रिक कारों का प्रोडक्शन रुक सकता है. चीन की मांग है कि अमेरिका इन तकनीकी पाबंदियों को तुरंत हटाए.

3. ताइवान और मिलिट्री विवाद

चीन, अमेरिका द्वारा ताइवान को हथियार बेचने के सख्त खिलाफ है. वह इसे अपनी सुरक्षा के लिए खतरा मानता है. जिनपिंग ने साफ किया है कि अगर रिश्ते सुधारने हैं, तो अमेरिका को चीन के आंतरिक मामलों में दखल देना बंद करना होगा.

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