PoK में पाक सेना के खिलाफ उबला गुस्सा, JAAC नेता बोले- रेंजर्स बुलाकर जनता पर चलवाईं गोलियां
PoK में बुनियादी सुविधाओं को लेकर हजारों लोग विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं. फोटो- PTI
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में प्रदर्शनकारियों पर हुई हिंसक कार्रवाई के बाद शांति पहल पर सवाल उठ रहे हैं. JAAC नेता सरदार अमान खान ने इसे 'सरकार की नई चाल' करार दिया है.
PoK Protest: ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेता सरदार अमान खान ने पाकिस्तान सेना और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के सत्ताधारी तंत्र पर हमला बोलते हुए उन पर शांति व्यवस्था बिगाड़ने का आरोप लगाया है. द स्टेट्समैन के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों पर हुई हिंसक कार्रवाई के बाद आयोजित की जा रही 'शांति जिरगा' (पारंपरिक बैठकों) पर सवाल उठाते हुए उन्होंने जबोटा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि पहले शांति जिरगा समझौते पर दस्तखत कराए जाते हैं, फिर गोलियां चलाई जाती हैं और अब वे दोबारा शांति की बातें कर रहे हैं.
सत्तारूढ़ अभिजात वर्ग की एक नई चाल
कार्रवाई के बाद शुरू की गई इस शांति पहल को अमान खान ने "ड्रामा" और सत्तारूढ़ वर्ग का नया "छलावा" करार दिया है. उन्होंने सवाल उठाया कि पहले रेंजर्स को बुलाकर गोलियां चलाई जाती हैं और अब शांति जिरगा आयोजित किया जा रहा है; यह ऐसा है जैसे कोई आग लगाने के बाद पानी डालने की बात कर रहा हो; ऐसे में शांति को नुकसान किसने पहुंचाया—क्या जनता शांति के लिए खतरा है या सरकार.
महीनों से जारी जनाक्रोश और संघर्ष
यह तीखी प्रतिक्रिया पीओके में आर्थिक और प्रशासनिक सुधारों को लेकर जेएएसी के नेतृत्व में महीनों से जारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच आई है. यह आंदोलन जून में तब और उग्र हो गया था जब रावलकोट में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों में दोनों पक्षों के लोग मारे गए, जिसके बाद प्रशासन ने जेएएसी को प्रतिबंधित कर दिया था. इसके बावजूद, संगठन सस्ता अनाज, कम बिजली बिल और वादों को पूरा करने की मांगों को लेकर लगातार हड़ताल और प्रदर्शन कर रहा है.
'बिना बुलाए नहीं आए रेंजर्स, नेताओं ने दिया न्योता'
पीओके के राजनीतिक नेतृत्व पर निशाना साधते हुए खान ने आरोप लगाया कि रेंजर्स अपनी मर्जी से नहीं आए, बल्कि उन्हें उन नेताओं ने आमंत्रित किया था जो सालों से जनता से वोट लेते रहे हैं. उन्होंने कहा कि जब लोगों ने स्कूल, अस्पताल, रोजगार, न्याय और समानता मांगी, तो जवाब में रेंजर्स को बुलाकर जनता पर गोलियां चलवाई गईं.
कठपुतली असेंबली पर खून का इल्जाम
सरदार अमान खान ने पीओके की स्थानीय असेंबली को "कठपुतली असेंबली" करार देते हुए हिंसा के लिए सीधे तौर पर उसे जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि इसी असेंबली के भीतर जनभावनाओं का कत्ल हुआ है और यही संस्था जनता के खून-खराबे के लिए जवाबदेह है.
पाकिस्तान सेना की भूमिका पर सीधे सवाल
सेना पर सीधा हमला बोलते हुए जेएएसी नेता ने पूछा कि जनता को शांति के लिए खतरा क्यों बताया जा रहा है. उन्होंने कहा कि असली खतरा फौज से है क्योंकि सेना न तो संसद की सुनती है और न ही अदालतों की; उसने हथियार उठाकर आम लोगों को मारना शुरू कर दिया है, इसलिए सेना से शांति की उम्मीद करना बेमानी है.
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