नहीं सुधरेगा पाकिस्तान...UN में भारत के खिलाफ कर रहा था साजिश! MEA ने ऐसे किया बेनकाब
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ( Photo-X)
Pakistan UN News : सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद तक पहुंच गया है. पाकिस्तान के दावे पर भारत के विदेश मंत्रालय ने जवाब देते हुए कहा कि तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है.
सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद अब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद तक पहुंच गया है. पाकिस्तान ने संधि को लेकर भारत के फैसले पर अंतरराष्ट्रीय मंच पर सवाल उठाए हैं. वहीं, भारत ने पाकिस्तान पर तथ्यों को गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगाया है. विदेश मंत्रालय ने साफ कहा है कि जिस फैसले को पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त फैसला बताने की कोशिश कर रहा है, भारत उस मध्यस्थता अदालत को मान्यता नहीं देता.
पाकिस्तान ने UN सुरक्षा परिषद को क्या लिखा?
- पाकिस्तान ने अप्रैल 2026 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष को चिट्ठी लिखकर सिंधु जल संधि को लेकर भारत के फैसले पर हस्तक्षेप की मांग की थी.
- संयुक्त राष्ट्र के आधिकारिक दस्तावेज में दर्ज इस पत्र में पाकिस्तान ने कहा कि भारत का संधि को ‘एबेअन्स’ (abeyance) में रखना अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है.
- पाकिस्तान ने सुरक्षा परिषद से संधि को फिर से पूरी तरह लागू कराने और दोनों देशों के बीच जल संबंधी सहयोग बहाल कराने की अपील की.
- पाकिस्तान लगातार मध्यस्थता अदालत के फैसलों का हवाला देता रहा है. उसका कहना है कि संधि अभी भी लागू है और भारत इसे एकतरफा तरीके से स्थगित नहीं कर सकता.
भारत ने पाकिस्तान के दावे पर क्या कहा?
- 22 सितंबर 2026 को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तान के दावे पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान तथ्यों को गलत तरीके से पेश करता है और झूठे प्रचार के लिए उनका इस्तेमाल करता है.
- जायसवाल ने खास तौर पर कहा कि पाकिस्तान जिस फैसले को ‘परमानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन’ का फैसला बता रहा है, वह उस अदालत का फैसला नहीं है. भारत के मुताबिक यह एक ऐसी ‘कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन’ है, जिसका गठन भारत को स्वीकार नहीं नहीं है.
- भारत का कहना है कि उसने इस मध्यस्थता प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया है और वह इस निकाय के अधिकार क्षेत्र को मान्यता नहीं देता. इसलिए भारत के अनुसार इसके फैसले उसके लिए बाध्यकारी नहीं हैं.
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कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के फैसले में क्या कहा गया?
- 31 अगस्त 2026 को भी कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन ने सिंधु जल संधि की स्थिति पर फैसला दिया था. आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक अदालत ने भारत के ‘एबेअन्स’ के फैसले को संधि और लागू अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत स्वीकार्य नहीं माना और कहा कि संधि लागू रहेगी.
- हालांकि, भारत ने इस फैसले को खारिज कर दिया. विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस अदालत का गठन ही संधि की शर्तों के खिलाफ हुआ है और इसलिए इसके फैसलों का भारत की संप्रभु परियोजनाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
भारत ने क्यों रोकी सिंधु जल संधि?
- 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में आतंकी हमला हुआ था, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी. इसके बाद भारत ने 23 अप्रैल 2025 को सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से ‘एबेअन्स’ में रखने का फैसला किया.
- भारत ने कहा था कि यह स्थिति तब तक रहेगी, जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के समर्थन को विश्वसनीय और स्थायी रूप से खत्म नहीं करता.
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क्या है सिंधु जल संधि?
सिंधु जल संधि 19 सितंबर 1960 को भारत और पाकिस्तान के बीच हुई थी. इसके तहत सिंधु नदी तंत्र की छह प्रमुख नदियों के पानी का दोनों देश के बीच इस्तेमाल की व्यवस्था तय की गई. सिंधु, झेलम और चिनाब को पश्चिमी नदियां माना गया, जबकि रावी, व्यास और सतलुज को पूर्वी नदियां माना गया. संधि में दोनों देशों के लिए इन नदियों के पानी के इस्तेमाल से जुड़े अधिकार और नियम तय किए गए थे.
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