स्पेन की सीमा पर माइग्रेंट सुनामी! 18 मौतों के बाद सेना तैनात, यूरोप में मचा हड़कंप

मोरक्को से हजारों प्रवासी उत्तरी अफ्रीका में स्पेन के छोटे से इलाके सेउटा में घुसपैठ की कोशिश कर रहें है. ( स्रोत- सोशल मीडिया )
स्पेन के स्वायत्त क्षेत्रों स्यूटा और मेलिला में हजारों प्रवासियों के पहुंचने से तनाव बढ़ गया है. सीमा पार करने के दौरान 18 लोगों की मौत हो गई, जिसके बाद स्पेन ने सेना तैनात कर दी है.
यूरोप और अफ्रीका की सीमा पर स्थित स्पेन के स्वायत्त क्षेत्र सेउटा (Ceuta) और मेलिला (Melilla) में बड़ी संख्या में प्रवासियों के पहुंचने के बाद हालात तनावपूर्ण हो गए हैं.टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, सीमा पार करने की कोशिश के दौरान पुलिस और प्रवासियों के बीच हुई झड़प कम से कम 18 प्रवासियों की मौत हो गई. कई लोग समुद्र के रास्ते तैरकर और कई ऊंची बाड़ पार कर स्पेन पहुंचने की कोशिश कर रहे थे. इस दौरान अफरा-तफरी मच गई और राहत एजेंसियों पर भी भारी दबाव पड़ गया.
स्पेन के अफ्रीकी क्षेत्र स्यूटा में हजारों प्रवासी मोरक्को से सीमा पार कर पहुंचे.
कई प्रवासी समुद्र तैरकर और बॉर्डर फेंस पार कर स्पेन में दाखिल हुए.
हालात बिगड़ने पर स्पेन सरकार ने सेना और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया.
सीमा पार करने के दौरान कई लोगों की मौत की भी खबर सामने आई है.
मेलिला बॉर्डर पर भी प्रवासियों और सुरक्षा बलों के बीच तनाव बढ़ गया.
सेउटा के मेयर ने हालात को गंभीर बताते हुए आपातकाल जैसे कदम उठाने की मांग की.
स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा करने का फैसला किया है.
स्पेन का कहना है कि मानव तस्कर नए कानूनी नियमों का फायदा उठाकर प्रवासियों को सीमा पार करा रहे हैं.
मोरक्को और स्पेन के बीच स्यूटा और मेलिला को लेकर पहले से ही राजनीतिक और कूटनीतिक विवाद चलता रहा है.
इस घटनाक्रम ने यूरोप में अवैध प्रवास और सीमा सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है.
सेना संभालेगी सुरक्षा की कमान
हालात पर काबू पाने के लिए स्पेन ने सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों को सेउटा भेजा है. सरकार का कहना है कि स्थानीय प्रशासन के संसाधन जवाब देने की स्थिति में नहीं थे. वहीं, स्पेन और मोरक्को दोनों देशों के अधिकारी सीमा पर नियंत्रण और अवैध घुसपैठ रोकने के लिए संयुक्त रूप से काम कर रहे हैं.
सेउटा संकट केवल स्पेन की नहीं, बल्कि पूरे यूरोप की
सेउटा संकट केवल स्पेन की समस्या नहीं, बल्कि पूरे यूरोपीय संघ के लिए चुनौती बन सकता है. साल 2021 के बाद यह सेउटा में सबसे गंभीर प्रवासी संकटों में से एक माना जा रहा है, जिस पर यूरोपीय देशों की नजर बनी हुई है.
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By सत्येन्द्र गिरि
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