FATF से पहले पाकिस्तान का नया दांव? मसूद अजहर पर 70 लाख का इनाम, 26/11 से जुड़े 19 नाम Red Book में शामिल

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मौलाना मसूद अज़हर की फाइल फोटो- एएनआई

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Masood Azhar: पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी ने 2026 की नई Red Book जारी की है. इसमें जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर पर इनाम बढ़ाकर 70 लाख पाकिस्तानी रुपये कर दिया गया है. सूची में 26/11 हमलों से जुड़े 19 नाम भी हैं.

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पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) ने 2026 के लिए मोस्ट वांटेड आतंकियों की नई Red Book जारी की है. इस सूची में जैश-ए-मोहम्मद (JeM) प्रमुख मसूद अजहर का नाम भी शामिल है. FIA ने अजहर को भगोड़ा बताते हुए उस पर घोषित इनाम 20 लाख पाकिस्तानी रुपये बढ़ाकर 70 लाख रुपये कर दिया है. नई सूची में 26/11 मुंबई हमलों से जुड़े 19 लोगों के नाम भी शामिल किए गए हैं. अक्टूबर में होने वाली Financial Action Task Force (FATF) की बैठक से पहले जारी इस सूची की टाइमिंग को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं.

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मसूद अजहर पर इनाम 50 लाख से बढ़ाकर 70 लाख रुपये

FIA ने 2021 में मसूद अजहर पर 50 लाख पाकिस्तानी रुपये का इनाम घोषित किया था. पांच साल बाद 2026 की नई Red Book में इसे बढ़ाकर 70 लाख पाकिस्तानी रुपये कर दिया गया है. अजहर को पाकिस्तान के मोस्ट वांटेड आतंकियों की सूची में रखा गया है. सूत्रों का दावा है कि यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब अक्टूबर में FATF की बैठक होनी है. सूत्र इसे पाकिस्तान की ओर से आतंकवाद और टेरर फाइनेंसिंग के खिलाफ कार्रवाई दिखाने की कोशिश के तौर पर देख रहे हैं.

मसूद अजहर को अफगानिस्तान में बताता रहा है पाकिस्तान

पाकिस्तान2021 से यह दावा करता रहा है कि मसूद अजहर उसके देश में मौजूद नहीं है और वह अफगानिस्तान जा चुका है. इसी दौरान FIA ने उसके खिलाफ 50 लाख पाकिस्तानी रुपये का इनाम भी घोषित किया था. अब पांच साल बाद इनाम बढ़ाए जाने से उसके ठिकाने को लेकर पाकिस्तान के पुराने दावों पर फिर सवाल उठ रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक भारतीय खुफिया एजेंसियों ने पिछले छह महीने के तकनीकी विश्लेषण में ऐसे संकेत पाए हैं कि मसूद अजहर पाकिस्तान के सिंध प्रांत के नवाबशाह शहर में मौजूद हो सकता है. हालांकि पाकिस्तान ने इस दावे को स्वीकार नहीं किया है.

नई रेड बुक में 26/11 से जुड़े 19 नाम

FIA की 2026 रेड बुक में 26 नवंबर 2008 के मुंबई आतंकी हमलों से जुड़े 19 लोगों के नाम भी शामिल हैं. इन लोगों पर हमलावरों की मदद करने, आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने या समुद्री रास्ते से मुंबई पहुंचाने के लिए नावों की व्यवस्था करने जैसी भूमिकाओं के आरोप हैं. सूत्रों के मुताबिक इनमें से 17 लोगों के नाम के साथ तस्वीरें और 26/11 हमले में उनकी कथित भूमिकाओं का विवरण दिया गया है. वहीं दो लोगों के मामले में 2021 की सूची की तुलना में कुछ जानकारियां नई रेड बुक में दिखाई नहीं देती हैं.

दो नामों से तस्वीर और LeT कनेक्शन हटाने का दावा

सूत्रों के मुताबिक 2021 और 2026 की FIA सूचियों की तुलना में तुर्बत के मोहम्मद खान से जुड़ी कुछ जानकारियों में बदलाव नजर आता है. नई सूची में उसका नाम मौजूद है, लेकिन तस्वीर, लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से कथित जुड़ाव और मुंबई हमलों में उसकी भूमिका का विवरण नहीं है. मोहम्मद खान पर अल-हुसैनी नाव उपलब्ध कराने का आरोप रहा है, जिसका इस्तेमाल हमलावरों को मुंबई तक पहुंचाने में किए जाने का दावा है.

इसी तरह बहावलनगर के अब्दुल रहमान का नाम भी सूची में है, लेकिन सूत्रों के अनुसार उसकी तस्वीर और LeT से कथित संबंध का उल्लेख नई सूची में नहीं है. सूत्रों का कहना है कि 2021 की सूची में इन दोनों से जुड़ी अधिक विस्तृत जानकारी उपलब्ध थी.

समुद्री रास्ते से मदद के आरोप वाले 11 नाम

नई रेड बुक में ऐसे 11 लोगों के नाम भी दिए गए हैं, जिन पर अल-हुसैनी और अल-फौज नावों के जरिए मुंबई हमलावरों की समुद्री यात्रा में मदद करने का आरोप है. इनमें मोहम्मद अमजद खान, शाहिद गफूर, मोहम्मद उस्मान, अतीक-उर-रहमान, रियाज अहमद, मोहम्मद मुश्ताक, मोहम्मद नईम, अब्दुल शकूर, मोहम्मद साबिर सल्फी, मोहम्मद उस्मान और शकील अहमद के नाम शामिल हैं.

26/11 की फंडिंग से जुड़े छह नाम

FIA की सूची में छह ऐसे लोगों के नाम भी शामिल हैं, जिन पर मुंबई हमलों के लिए आर्थिक मदद उपलब्ध कराने के आरोप हैं. इनमें मोहम्मद इफ्तिखार अली, मोहम्मद जिया, मोहम्मद अब्बास नासिर, जावेद इकबाल, मुख्तार अहमद और अहमद सईद शामिल हैं.सूची में दिए गए विवरण के मुताबिक मोहम्मद इफ्तिखार अली पर 70 हजार पाकिस्तानी रुपये खर्च कर VOIP कनेक्शन तैयार कराने का आरोप है. दावा है कि इन कनेक्शनों के जरिए हमलावर अपने हैंडलर्स से संपर्क में थे. अन्य नामों पर भी अलग-अलग रकम उपलब्ध कराने के आरोप दर्ज हैं.

18 साल से फरार बताए जा रहे आरोपी

FIA के मुताबिक 26/11 से जुड़े 17 आरोपी पिछले 18 साल से फरार हैं. दूसरी ओर, भारतीय खुफिया सूत्रों का दावा है कि ये लोग पाकिस्तान में ही मौजूद हैं. सूत्र इसी आधार पर नई रेड बुक में उनके नाम शामिल किए जाने की टाइमिंग पर सवाल उठा रहे हैं. यह दावा भारतीय खुफिया सूत्रों पर आधारित है और FIA ने आधिकारिक तौर पर इन लोगों की मौजूदा लोकेशन की पुष्टि नहीं की है.

पांच साल में 1,330 से बढ़कर 1,804 हुई संख्या

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, FIA की 2021 Red Book में 1,330 मोस्ट वांटेड आतंकियों के नाम थे. 2026 की नई सूची में यह आंकड़ा बढ़कर 1,804 हो गया है. इस तरह पांच वर्षों में संख्या में करीब 35 फीसदी की वृद्धि हुई है.

ऑपरेशन सिंदूर में निशाने पर था बहावलपुर का JeM ठिकाना

मसूद अजहर का नाम ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी चर्चा में आया था. भारत की कार्रवाई में पाकिस्तान के बहावलपुर स्थित जैश-ए-मोहम्मद के मरकज सुभान अल्लाह को निशाना बनाया गया था. भारतीय सशस्त्र बलों के मुताबिक यह ठिकाना पाकिस्तान के अंदर करीब 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित था. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक 2015 से सक्रिय मरकज सुभान अल्लाह को JeM के प्रशिक्षण, वैचारिक तैयारी और ऑपरेशनल गतिविधियों के प्रमुख केंद्रों में गिना जाता रहा है. इसे पुलवामा आतंकी हमले की साजिश से भी जोड़ा गया है. इस परिसर में मसूद अजहर और उसके परिवार से जुड़े लोगों के आवास होने की जानकारी भी सामने आती रही है.

FATF बैठक से पहले Red Book की टाइमिंग पर क्यों उठ रहे सवाल?

पाकिस्तान की नई Red Book की टाइमिंग इसलिए चर्चा में है क्योंकि FATF की अगली Plenary अक्टूबर 2026 में होने वाली है. FATF मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण से निपटने के लिए देशों की व्यवस्थाओं और कार्रवाई की समीक्षा करता है. पाकिस्तान 2018 से FATF की ग्रे लिस्ट में था और अक्टूबर 2022 में उसे इस सूची से बाहर कर दिया गया था. फिलहाल पाकिस्तान FATF की ग्रे लिस्ट में शामिल नहीं है.

सूत्रों का दावा है कि मसूद अजहर पर इनाम बढ़ाने और 26/11 से जुड़े नामों को Red Book में रखने के कदम को FATF बैठक से पहले आतंकवाद और टेरर फाइनेंसिंग के खिलाफ कार्रवाई दिखाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. इसी कारण सूची जारी करने की टाइमिंग पर सवाल उठ रहे हैं. हालांकि FIA या FATF ने आधिकारिक तौर पर Red Book में किए गए इन बदलावों को अक्टूबर की FATF बैठक से नहीं जोड़ा है. (एजेंसी इनपुट)

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