होर्मुज और लाल सागर के रास्तों पर 'टोल वॉर'! ईरान और हूती की तैयारी ने क्यों बढ़ाई अमेरिका की चिंता?

Updated:
विज्ञापन
ईरान-अमेरिका होर्मुज तनाव: जहाजों पर टोल की मांग?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई, फोटो- पीटीआई

ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर जहाजों से टोल लगाने की मांग ने वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं. जानें सदियों पुराने समुद्री विवाद और संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि के बारे में.

विज्ञापन

मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका के बीच के होर्मुज को लेकर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. ईरान ने एक बार फिर दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों पर टोल लगाने की बात दोहराई है. हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, दूसरी ओर, ईरान समर्थित हूती विद्रोही भी लाल सागर के प्रवेश द्वार बाब-अल-मंदेब से गुजरने वाले जहाजों के लिए शुल्क लगाने की तैयारी में है. इससे वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं.

सदियों पुराना है समुद्री रास्तों का विवाद

समुद्री मार्गों पर अधिकार का विवाद नया नहीं है. साल 1493 में पोप अलेक्जेंडर षष्ठम ने स्पेन और पुर्तगाल के बीच समुद्री क्षेत्रों को बांटने के लिए अटलांटिक महासागर में एक काल्पनिक रेखा खींची थी. बाद में 1494 की टॉर्डेसिलास संधि में इस रेखा को और पश्चिम की ओर खिसका दिया गया. इसके बावजूद समुद्री सीमाओं और रास्तों को लेकर विवाद कभी खत्म नहीं हुए.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ओमान ने खाड़ी के अन्य देशों के समर्थन से एक प्रस्ताव ईरान के सामने रखा है. इस योजना के तहत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का संयुक्त प्रबंधन किया जाएगा और जहाजों से स्वैच्छिक शुल्क लिया जाएगा. हालांकि अमेरिका ने साफ कहा है कि होर्मुज एक अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग है और किसी भी देश को वहां टोल या नियंत्रण का अधिकार नहीं दिया जा सकता.

कैसे बने आधुनिक समुद्री कानून?

17वीं और 18वीं शताब्दी में तटीय देशों ने अपने समुद्री क्षेत्रों पर अधिकार जताना शुरू किया. शुरुआत में यह सीमा तट पर लगी तोपों की मारक क्षमता तक मानी जाती थी, जिसे बाद में तीन समुद्री मील का नियम कहा गया. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद कई देशों ने अपनी समुद्री सीमाएं 12 समुद्री मील और कुछ ने 200 समुद्री मील तक बढ़ाने का दावा कर दिया.

संयुक्त राष्ट्र ने बनाया वैश्विक नियम

साल 1960 के दशक में समुद्र के भीतर तेल उत्पादन, परमाणु पनडुब्बियों की गतिविधियों और बढ़ते समुद्री व्यापार ने नए नियमों की जरूरत पैदा की. इसके बाद संयुक्त राष्ट्र ने 1973 में समुद्री कानून पर सम्मेलन शुरू किया और 1982 में संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS) को अपनाया गया. इस समझौते ने अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में जहाजों के आवागमन और देशों के अधिकारों के लिए वैश्विक ढांचा तैयार किया.

ईरान और अमेरिका की अलग-अलग स्थिति

दिलचस्प बात यह है कि ईरान ने 1982 में UNCLOS पर हस्ताक्षर तो किए, लेकिन उसे कभी मंजूरी नहीं दी. वहीं अमेरिका ने भी इस संधि की पुष्टि नहीं की, हालांकि वह इसके अधिकांश नौवहन संबंधी नियमों का व्यवहार में पालन करता है. ऐसे में होर्मुज और बाब-अल-मंदेब जैसे रणनीतिक जलमार्गों पर नियंत्रण को लेकर विवाद आज भी अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक व्यापार के लिए बड़ा मुद्दा बना हुआ है.


विज्ञापन
सत्येन्द्र गिरि

लेखक के बारे में

By सत्येन्द्र गिरि

सत्येन्द्र गिरि प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. यहां वे मुख्य रूप से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयों से जुड़ी खबरों का लेखन करते हैं. सरल, तथ्यात्मक और पाठक-केंद्रित लेखन उनकी प्रमुख पहचान है. उन्होंने एशिया के प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से मास्टर ऑफ आर्ट्स इन मास कम्युनिकेशन (बैच 2023–25) की डिग्री प्राप्त की है.

पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान उन्होंने समाचार लेखन, डिजिटल मीडिया, रिपोर्टिंग और समसामयिक विषयों की गहन समझ विकसित की. पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके पास एक वर्ष का पेशेवर अनुभव है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला के गोरखपुर एडिशन से की, जहां समाचार लेखन और रिपोर्टिंग की बारीकियों को नजदीक से सीखने और समझने का अवसर मिला. इसके बाद उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता में कदम रखते हुए प्रभात खबर डिजिटल से जुड़कर देश-विदेश की महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य शुरू किया.

सत्येन्द्र की विशेष रुचि इतिहास, अंतरराष्ट्रीय संबंध, राजनीति, कूटनीति और समसामयिक घटनाक्रम से जुड़े विषयों में है. वे जटिल और गंभीर मुद्दों को भी सरल, संतुलित और विश्वसनीय तरीके से प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं. राष्ट्रीय और वैश्विक घटनाओं पर उनकी गहरी नजर रहती है तथा वे तथ्यपरक और निष्पक्ष पत्रकारिता को अपनी कार्यशैली का आधार मानते हैं. वे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले के निवासी हैं.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola