Explainer : कैसे चीन 2017 से हिन्द महासागर में घुसपैठ कर रहा है, कितने बंदरगाह बनाए
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 26 Aug 2022 7:49 PM
Explainer: हिंद महासागर में चीन का पहला विदेशी नेवल बेस पूरी तरह संचालित हो गया है और यह नौसैनिक अड्डा अफ्रीका के जिबूती में है, जहां से पूरे हिंद महासागर क्षेत्र में तैनात चीनी युद्धपोतों को सपोर्ट मिल रहा है.
Explainer: चीन लगातार समुद्री क्षेत्रों पर अपना कब्जा जमाने की कोशिश में जुटा है. इसको लेकर सैटेलाइट से मिली कई तस्वीरों में खुलासा हुआ है. बताया जा रहा है कि हिंद महासागर में चीन का पहला विदेशी नेवल बेस पूरी तरह संचालित हो गया है और यह नौसैनिक अड्डा अफ्रीका के जिबूती में है, जहां से पूरे हिंद महासागर क्षेत्र में तैनात चीनी युद्धपोतों को सपोर्ट मिल रहा है. इससे भारत के लिए हिंद महासागर में खतरा और ज्यादा बढ़ गया है.
जिबूती में चीन का सैन्य नौसैनिक अड्डा उसका पहला विदेशी सैन्य अड्डा है, जिसे 590 मिलियन डॉलर की लागत से बनाया गया है और 2016 से निर्माणाधीन था. यह रणनीतिक बाब-अल-मंडेब स्ट्रेट में स्थित है, जो अदन की खाड़ी और लाल सागर और गार्ड को अलग करता है तथा स्वेज कनाल को जोड़ता है. इसे अंतर्राष्ट्रीय वाणिज्य के लिए सबसे अहम चैनलों में से एक है. जिबूती में पूरी तरह से परिचालन बेस की तस्वीरें ऐसे समय में आती हैं, जब चीन ने श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह में 25,000 टन के उपग्रह और बैलिस्टिक मिसाइल ट्रैकिंग जहाज युआन वांग 5 को डॉक किया है.
श्रीलंका और जिबूती दोनों में चीन की उपस्थिति उसके दीर्घकालिक बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के तहत दोनों देशों में उसके आर्थिक निवेश से निकटता है. ऐसे में चीन यहां अपना एक वृहद समुद्री नेटवर्क बनाने की कोशिश कर रहा है. अफ्रीकी राष्ट्रों पर चीन का बड़ा कर्ज हैं और श्रीलंका के साथ 99 साल के पट्टे के लिए एक संयुक्त इकाई के निर्माण के माध्यम से हंबनटोटा बंदरगाह पर प्रभावी रूप से कब्जा कर लिया है. ऐसे में भारत को चीन दक्षिण भारत के समुद्री इलाकों में घेरने की प्लानिंग कर रहा है.
वहीं, भारतीय नौसेना के पूर्व चीफ एडमिरल अरुण प्रकाश ने एनडीटीवी से बातचीत में बताया कि भारत को चीन के समुद्री इरादों या क्षमताओं के बारे में कोई भ्रम नहीं होना चाहिए. उन्हें अफ्रीकी देश में स्टैंडिंग पेट्रोल चालू किए 14 साल हो चुके हैं. शुरुआत में इस बात की आशंका थी कि इतनी दूर की बेस को चीन कैसे ऑपरेट कर सकता है, लेकिन उन्होंने ऐसा कर दिखाया. समुद्री प्रभाव को बढ़ाने की चीन की यह एक सुनियोजित और सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है. इसी के तहत चीन ने पहले ही हिंद महासागर में परमाणु-संचालित अटैक सबमरीन ऑपरेट कर चुका है. इस समुद्री इलाके में हम वॉरशिप के बड़े ग्रुप को भी देख सकते हैं. इसको लेकर अमेरिकी नेवी के शीर्ष कमांडरों ने भी चेतावनी दी है. यूएस पैसिफिक कमांड के तत्कालीन कमांडर एडमिरल हैरी हैरिस जूनियर ने 2017 में कहा था कि आज चीन को हिंद महासागर में शिप ले जाने से कोई भी नहीं रोक सकता.
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