Afghanistan/ Taliban Latest Updates : काबुल के गुरुद्वारे में फंसे हैं 260 से अधिक सिख, मांग रहे हैं मदद

Van: Turkish security forces apprehend a group of migrants in an operation aimed at stemming the recent influx of migration, mainly coming from Afghanistan and stopping human trafficking operations in the area at the border province of Van, Turkey, late Saturday, Aug. 21, 2021. The new border wall separating Turkey from Iran covers a third of the 540-kilometer (335-mile) border, leaving plenty of gaps for migrants to slip across in the dead of night. AP/PTI(AP08_22_2021_000012A)
Afghanistan/ Taliban Latest Updates - तालिबान के अफगानिस्तान पर काबिज होने के बाद से केवल भारत ने अफगानिस्तान के सिख समुदाय के लोगों को वहां से निकलने में मदद की है.
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काबुल में गुरुद्वारे में फंसे 260 से अधिक सिखों को वहां से निकलने के लिए मदद चाहिए
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एक अमेरिकी सिख संगठन ने इस बात की जानकारी दी
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महिलाओं और 50 से अधिक बच्चों सहित 260 से अधिक अफगान नागरिक
Afghanistan Taliban Latest Updates : अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में कारते परवन गुरुद्वारे में सिख समुदाय के 260 से अधिक लोगों ने शरण ली है और वे तनावग्रस्त देश से निकलने के लिए मदद चाहते हैं. एक अमेरिकी सिख संगठन ने यह बात कही है. अमेरिका के एक सिख संगठन ‘यूनाइटेड सिख’ ने एक बयान में कहा कि काबुल के कारते परवन गुरुद्वारे में महिलाओं और 50 से अधिक बच्चों सहित 260 से अधिक अफगान नागरिक हैं. इनमें तीन नवजात भी शामिल हैं, जिनमें से एक का जन्म कल ही हुआ है.
तालिबान के अफगानिस्तान पर काबिज होने के बाद से केवल भारत ने अफगानिस्तान के सिख समुदाय के लोगों को वहां से निकलने में मदद की है. ‘यूनाइटेड सिख’ ने कहा, हम अमेरिका, कनाडा, पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, ताजिकिस्तान, ईरान और ब्रिटेन सहित कई देशों की सरकारों से इस संबंध में बात कर रहे हैं. हम अंतरराष्ट्रीय सहायता एजेंसियों और गैर सरकारी संगठनों से भी बात कर रहे हैं, जो अफगानिस्तान में फंसे लोगों को वहां से निकालने में मदद देने का प्रयास कर रही हैं.
इसके अलावा, अफगानिस्तान पर जमीनी स्तर पर इस संबंध में काम कर रही कम्पनियों के साथ भी हम सम्पर्क में हैं.‘यूनाइटेड सिख’ के अनुसार, इस बचाव कार्य की सबसे बड़ी चुनौती कारते परवन गुरुद्वारे से काबुल के अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे तक जाने का 10 किलोमीटर लंबा रास्ता है, जिस मार्ग पर कई जांच चौकियां स्थापित की गई हैं. अफगानिस्तान के अल्पसंख्यक समुदाय के कुछ लोगों ने पिछले हफ्ते वहां से निकलने की कोशिश की थी जो असफल रही.
गुरुद्वारे में शरण लेने वाले जलालाबाद के सुरबीर सिंह ने कहा कि हम हवाईअड्डे जाने को तैयार हैं, लेकिन हमें काबुल से जाने वाली उड़ानों के रद्द होने का डर है. हमारे पास महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और शिशुओं को देश से बाहर निकालने का यही एकमात्र मौका है. एक बार जब मौजूदा अधिकारियों ने पूरे देश पर कब्जा कर लिया तो वह हमारे समुदाय का अंत होगा.
Posted By : Amitabh Kumar
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