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GROUND REPORT: कल चमन था, आज सहरा हुआ, सुंदरबन में देखते ही देखते क्या हुआ... यास चक्रवात के चार दिन

Updated at : 30 May 2021 2:36 PM (IST)
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GROUND REPORT: कल चमन था, आज सहरा हुआ, सुंदरबन में देखते ही देखते क्या हुआ... यास चक्रवात के चार दिन

Yaas Cyclone Update: पश्चिम बंगाल में 26 मई को आए सुपर साइक्लोन यास के कमोबेश चार दिन गुजर चुके हैं. चक्रवात के गुजरने के बाद जिंदगी भी पटरी पर तो लौट रही है. लेकिन, आज भी हर तरफ तबाही का मंजर दिख रहा है. पश्चिम बंगाल के सुंदरबन का इलाका भी चक्रवात की तबाही से अछूता नहीं है. चक्रवात यास के पहले अम्फान की डरावनी यादें लोगों के जेहन में ताजा थी. अचानक यास चक्रवात आया और लोगों को नई परेशानी में डालकर गुजर गया.

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Yaas Cyclone Update: पश्चिम बंगाल में 26 मई को आए सुपर साइक्लोन यास के कमोबेश चार दिन गुजर चुके हैं. चक्रवात के गुजरने के बाद जिंदगी भी पटरी पर तो लौट रही है. लेकिन, आज भी हर तरफ तबाही का मंजर दिख रहा है. पश्चिम बंगाल के सुंदरबन का इलाका भी चक्रवात की तबाही से अछूता नहीं है. चक्रवात यास के पहले अम्फान की डरावनी यादें लोगों के जेहन में ताजा थी. अचानक यास चक्रवात आया और लोगों को नई परेशानी में डालकर गुजर गया.

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दक्षिण 24 परगना के 19 ब्लॉक के सैकड़ों गांव तालाब में तब्दील हो गए. सागर, गोसबा, पाथेर प्रतिमा, नामखाना, घोरामारा और मौसुनी जैसे इलाकों का सबसे बुरा हाल है. यहां के लोगों को पीने के पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है. जरूरत के लिहाज से राहत सामग्री कम पड़ती दिख रही है. घर पानी में डूबे हैं. अनाज पानी में बह गए और काम-धंधा भी बंद. यास चक्रवात के कारण सुंदरबन के अधिकांश इलाकों में यही नजारा देखने को मिलता है. बारिश के बाद जमे पानी में मच्छर हैं, जो लोगों को चक्रवात की भयावह यादें दिलाते रहते हैं. सागरद्वीप के मरीजों को इलाज के लिए काकद्वीप अस्पताल जाना हो तो उन्हें घुटने भर पानी से गुजरना पड़ता है.

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ग्रामीणों का दावा है कि पानी में मगरमच्छ बहकर आ गए हैं. जंगली जानवरों और इंसानों की तकलीफें एक जैसी दिख रही हैं. इंसान अपनी तकलीफें बोल देते हैं. जंगली जानवर खामोशी से सबकुछ झेल रहे हैं. सुंदरबन के अधिकांश इलाके पानी में डूबे

पश्चिम बंगाल में आए यास चक्रवात ने दक्षिण 24 परगना के ऐतिहासिक फ्रेजर साहब के बंगले को भी तबाह कर दिया. पिछले साल अम्फान के कारण बंगले को काफी नुकसान पहुंचाया था. इस बार यास चक्रवात ने रही सही कसर पूरी कर दी. ब्रिटिश राज में बंगाल के लेफ्टिनेंट गवर्नर एंड्रयू फ्रेजर ने साल 1903 के आसपास बंगले का निर्माण कराया था. आज यास चक्रवात ने इसे तबाह कर डाला है. यह बंगला धराशायी हो चुका है. कुछ हिस्से बंगला होने की गवाही दे रहे हैं. सुंदरबन आने वाले सैलानियों के लिए फ्रेजर साहब का बंगला फेमस डेस्टिनेशन था. आज यहां सिर्फ मलबा पड़ा है. सुंदरबन के अधिकांश इलाके चक्रवात से आए बाढ़ के पानी में डूबे हैं. नामखाना फ्रेजरगंज पंचायत के लक्ष्मीपुर, अमरावती, हाटी कार्नर और दास कार्नर खारे पानी से भरे हैं.

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पिछले दिनों पश्चिम बंगाल और ओड़िशा के दौरे पर आए पीएम नरेंद्र मोदी ने यास चक्रवात के बाद पैदा हुए हालात का जायजा लिया. पीएम मोदी ने पश्चिम बंगाल, ओड़िशा और झारखंड के लिए एक हजार करोड़ के मुआवजे का ऐलान किया. पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी भी लगातार इलाकों का दौरा करके चक्रवात प्रभावितों को राहत पहुंचा रही हैं. कहते हैं वक्त गुजरने के साथ हर जख्म भर जाते हैं और हालात भी ठीक हो जाते हैं. लेकिन, अम्फान के बाद यास चक्रवात ने जो तबाही का मंजर छोड़ा है, शायद उसकी यादें लोगों को हमेशा तकलीफ देती रहेंगी. (कोलकाता से नम्रता पांडेय के साथ ब्यूरो रिपोर्ट)

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