उत्तरकाशी सुरंग हादसा: क्या है ‘रैट होल’ ड्रिलिंग? जानें यहां
Published by : Amitabh kumar Updated At : 28 Nov 2023 1:28 PM
उत्तरकाशी सुरंग हादसा: क्या है ‘रैट होल’ ड्रिलिंग? जानें यहां
उत्तरकाशी सुरंग हादसे के बाद फंसे श्रमिकों को बाहर निकालने के लिए अब हाथ से ड्रिलिंग की जा रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव पी के मिश्रा सोमवार को सिलक्यारा पहुंचे. जानें ताजा हालात और देखें वीडियो
उत्तरकाशी (उत्तराखंड) में हुए सुरंग हादसे के बाद से राहत बचाव कार्य जारी है. इस बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रत्येक दिन वहां के बारे में जानकारी लेते हैं…अभी 53 मीटर पाइप जा चुका है, अभी 2 और पाइप लगाने की आवश्यकता पड़ेगी. बताया जा रहा है कि बचाव कार्य अपने अंतिम चरण पर है. माइक्रो टनलिंग विशेषज्ञ क्रिस कूपर ने कहा कि हम शाम पांच बजे तक कुछ परिणाम देखने की उम्मीद कर रहे हैं. इस बीच रैट माइनर्स के बारे में सभी जानना चाहते हैं. तो आपको बता दें कि पतले से पैसेज में चूहों की तरह अंदर जाकर ड्रिल करने वाले मजदूरों को रैट माइनर्स कहते हैं. इस तरह से ड्रिल करने के किए स्पेशल ट्रेनिंग, स्किल और काफी अभ्यास की जरूरत होती है. इस तकनीक का इस्तेमाल सुरंग में किया जा रहा है. रैट माइनर्स दो-दो के समूह में 800 मीटर व्यास वाले पाइपों में काम में लगे हुए हैं. इसके लिए फ्रेम तैयार कर लिये गये हैं. माइनर्स आधा मीटर से लेकर एक मीटर की दूरी लेते हुए खुदाई करते हुए धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे हैं.
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By Amitabh Kumar
अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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