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आगरा: अल्ट्रासाउंड के लिए महिलाओं को मिल रही लंबी तारीख, लेडी लॉयल में मरीजों के लिए कम पड़ रहे संसाधन

Updated at : 22 Jun 2023 9:40 PM (IST)
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आगरा: अल्ट्रासाउंड के लिए महिलाओं को मिल रही लंबी तारीख, लेडी लॉयल में मरीजों के लिए कम पड़ रहे संसाधन

आगरा के जिला महिला अस्पताल में इलाज कराने आने वाली महिलाओं को यहां तमाम परेशानियों से दो चार होना पड़ता है. अल्ट्रासाउंड कराने के लिए महिलाओं को 15 से 20 दिन बाद की तारीख दी जा रही है.

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Agra : आगरा के जिला महिला अस्पताल में चारों तरफ अवस्थाओं का अंबार लगा है. अपना इलाज कराने आने वाली महिलाओं को यहां तमाम परेशानियों से दो चार होना पड़ता है. अल्ट्रासाउंड कराने के लिए महिलाओं को 15 से 20 दिन बाद की तारीख दी जा रही है. जबकि उनको अभी समस्या हो रही है. वहीं दूसरी तरफ गर्भवती महिलाएं जिस वार्ड में भर्ती है उसे वार्ड में गंदगी के लिए मात्र एक डस्टबिन मौजूद है. और जिला महिला अस्पताल में आने वाली महिला मरीज और तमाम गर्भवतियों के लिए बैठने के भी सही इंतजाम नहीं है.

एक रेडियोलॉजिस्ट के भरोसे चल रहा अल्ट्रासाउंड विभाग

आगरा के जिला महिला अस्पताल में रोजाना ओपीडी के लिए करीब 300 से 350 पर्चे बनते हैं जिनमें करीब 100 गर्भवती महिलाएं अल्ट्रासाउंड कराने के लिए आती हैं. लेडी लॉयल के अल्ट्रासाउंड विभाग में स्टाफ की कमी के चलते एक ही रेडियोलॉजिस्ट है जो दिन भर में करीब 60 से 70 महिलाओं के अल्ट्रासाउंड करता है. लेकिन अन्य जो महिलाएं रह जाती है उन्हें विभाग के डॉक्टर द्वारा 15 से 20 दिन तो किसी को एक महीने बाद की तारीख देकर अल्ट्रासाउंड के लिए आने को कहा जाता है. ऐसे में महिलाओं को काफी परेशानी होती है.

अल्ट्रासाउंड के लिए 15 दिन बाद मिल रही तारीख

अल्ट्रासाउंड के लिए आने वाली महिलाओं का कहना है कि दिक्कत होने की वजह से हम अस्पताल में अल्ट्रासाउंड करने आते हैं. लेकिन हमें 15 दिन और उससे ज्यादा दिन बाद की तारीख दी जाती है अब ऐसे में अगर कोई दिक्कत बढ़ जाती है तो फिर हम किसके पास जाएंगे. शाहगंज क्षेत्र से आई एक महिला मरीज का कहना है कि आज वह अल्ट्रासाउंड के लिए अस्पताल में आई थी लेकिन उसे 6 जुलाई की तारीख दी गई है. उसे काफी परेशानी हो रही है लेकिन आज उसका अल्ट्रासाउंड नहीं किया जा रहा.

महिलाओं के बैठने के लिए नहीं है इंतजाम

महिला अस्पताल में आने वाली महिलाओं के बैठने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं है. ऐसे में मरीज को जमीन पर बैठने को मजबूर होना पड़ता है. हालांकि, अस्पताल में एक मरीज के साथ दो से तीन तीमारदार भी आते हैं जिसकी वजह से पूरे अस्पताल में मरीज से ज्यादा तीमारदारों की भीड़ दिखाई पड़ती है. जिला अस्पताल के पीएनसी वार्ड में भर्ती एक महिला ने बताया कि इस वार्ड में करीब 30 से 40 बेड हैं और इस समय 20 से 25 महिला यहां भर्ती है. लेकिन पूरे वार्ड में सिर्फ एक डस्टबिन रखा गया है जबकि हर बेड के पास छोटा डस्टबिन होना चाहिए. एक डस्टबिन होने के चलते वह जल्दी भर जाता है और उसकी गंदगी की वजह से बच्चों को संक्रमण का खतरा भी रहता है.

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