UP Vidhan Bhavan: पांच साल में 21 लाख की लागत से तैयार हुआ था यूपी विधान भवन, विदेश से देखने आते हैं पर्यटक

यूपी में चल रही विभिन्न विकास परियोजनाओं की थाह लेने के लिए हाल ही में विश्व बैंक की टीम लखनऊ पहुंची. विश्व बैंक के 20 सदस्यीय दल ने प्रदेश में औद्योगिकरण और अवस्थापना विकास सहित अन्य विषयों से जुड़े प्रोजेक्ट के कार्यों पर संतुष्टि जताई. टीम ने यूपी विधान भवन पर डायनामिक फसाड लाइट का भी नजारा देखा.

यूपी विधान भवन की ये इमारत जहां कई बड़ी ऐतिहासिक घटनाओं की साक्षी रही है, वहीं इसका निर्माण कला का कोई जवाब नहीं. खास मौके पर जब इसे लाइट से सजाया जाता है, तो इसका सुंदरता कई गुना ज्यादा बढ़ जाती है.

यूपी विधानसभा देश की सबसे बड़ी विधानसभा में से एक है. समय के साथ इसे हाइटेक करते हुए डिजिटल सुविधाओं का बढ़ाया गया है. सदन की कार्यवाही देखने के लिए ऊपरी हिस्से में लोगों के बैठने की व्यवस्था है.

यूपी विधान भवन देश की सबसे खूबसूरत ऐतिहासिक इमारतों में से एक है. 1922 में प्रदेश की राजधानी को इलाहाबाद से लखनऊ स्थानांतरित करने के दौरान इस भवन बनाने का निर्णय किया. 15 दिसंबर 1922 को उत्तर प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल स्पेंसर हरकोर्ट बटलर ने विधान भवन की नींव रखी.

ब्रिटिश काल में यह इमारत 21 लाख की लागत से पांच साल से अधिक समय में बनकर तैयार हुई. और इसका उद्घाटन 21 फरवरी 1928 को किया गया. विश्व बैंक की टीम ने लखनऊ भ्रमण के दौरान दौरान यूपी विधान भवन पर डायनामिक फसाड लाइट का भी नजारा देखा.

यह इमारत मीरजापुर के नक्काशीदार हल्के भूरे बलुआ पत्थर से बनी है. अंदर के कई हॉल, गैलरी और बरामदे आगरा और जयपुर के संगमरमर से बने हैं. प्रवेश कक्ष के दोनों ओर गोलाकार संगमरमर की सीढ़ियां हैं और सीढ़ियों की दीवारें चित्रों से अलंकृत हैं.

विश्व बैंक की टीम के सदस्य विधान भवन की खूबसूरती देखकर सदस्य गदगद हो गए. इमारत का मुख्य कक्ष गुंबददार छत के साथ अष्टकोणीय आकार का है. उच्च सदन के लिए एक अलग कक्ष का निर्माण 1935 और 1937 के बीच किया गया था. दोनों सदनों की इमारतें दोनों तरफ कार्यालयों के साथ बरामदे से जुड़ी हुई हैं.

विश्व बैंक की टीम लखनऊ भ्रमण के दौरान यहां के ऐतिहासिक इमामबाड़ा को भी देखनी पहुंची. नवाबों के समय के इस निर्माण की खूबसूरती देखकर टीम के सदस्य हैरत में पड़ गए

लखनऊ का इमामबाड़ा नवाबों के शासन में बनाई गई उतकृष्ट इमारतों में से एक है. इसे देखने के लिए देश विदेश से पर्यटक यहां पहुंचते हैं.
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लेखक के बारे में
By Sanjay Singh
working in media since 2003. specialization in political stories, documentary script, feature writing.
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