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सरायकेला-खरसावां में जनता कर्फ्यू को मिला जबरदस्त समर्थन, मंदिर, पर्यटन स्थल व हाट-बाजार भी रहे बंद

Updated at : 22 Mar 2020 11:45 AM (IST)
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सरायकेला-खरसावां में जनता कर्फ्यू को मिला जबरदस्त समर्थन, मंदिर, पर्यटन स्थल व हाट-बाजार भी रहे बंद

seraikela-kharsawan district supports janata curfew. सरायकेला-खरसावां : कोरोना वायरस (Coronavirus) के संक्रमण को रोकने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) के आह्वान पर रविवार (22 मार्च, 2020) को ‘जनता कर्फ्यू’ (Janata Curfew) को सरायकेला-खरसावां (Seraikella-Kharsawan) में हर वर्ग का भरपूर समर्थन मिला. आम से लेकर खास वर्ग के लोग घर से बाहर नहीं निकले. हाट, बाजार, पर्यटन स्थल, मंदिर आदि पूरी तरह से बंद रहे.

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शचींद्र कुमार दाश

सरायकेला-खरसावां : कोरोना वायरस (Coronavirus) के संक्रमण को रोकने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) के आह्वान पर रविवार (22 मार्च, 2020) को ‘जनता कर्फ्यू’ (Janata Curfew) को सरायकेला-खरसावां (Seraikella-Kharsawan) में हर वर्ग का भरपूर समर्थन मिला. आम से लेकर खास वर्ग के लोग घर से बाहर नहीं निकले. हाट, बाजार, पर्यटन स्थल, मंदिर आदि पूरी तरह से बंद रहे.

जिला में जनता कर्फ्यू पूरी तरह सफल रहा. जिला मुख्‍यालय सरायकेला से खरसावां, कुचाई, चांडिल, नीमडीह, आदित्यपुर समेत ग्रामीण इलाकों तक सन्नाटा पसरा रहा. व्यवसायियों ने सहर्ष अपनी-अपनी दुकानें बंद रखीं. इक्का-दुक्का लोग ही सड़कों पर नजर आये.

जिला से होकर गुजरने वाली एएनएच-32 व एनएच-33 पर भी सन्नाटा पसरा रहा. गाड़ियां नहीं चलीं. लोगों ने अपने आपको घरों में कैद कर लिया. ट्रक, टेंपो के साथ-साथ यात्री बसों का परिचालन भी नहीं हुआ. कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने को लेकर आम लोगों ने प्रधानमंत्री की अपील को गंभीरता से लिया है.

सरायकेला, खरसावां, चांडिल, आदित्यपुर शहरी क्षेत्र में पूरी तरह से कर्फ्यू के हालात नजर आ रहे हैं. लोगों ने प्रधानमंत्री की अपील का समर्थन करते हुए कोरोना वायरस के चेन को तोड़ने के लिए सरकार का भरपूर सहयोग किया.

जनता कर्फ्यू तैयारी में लोग उसी दिन से जुट गये थे, जब प्रधानमंत्री ने लोगों से इसकी अपील की थी. लोगों ने एक-दूसरे तक जनता कर्फ्यू का मैसेज भेजना शुरू कर दिया था. दिहाड़ी मजदूरी करने वाले लोगों ने भी जनता कर्फ्यू के दिन काम नहीं करने का मन बना लिया था.

सब्जी मंडी में कोई क्रेता या विक्रेता नहीं दिखा. चाय की एक दुकान भी नहीं खुली. आम दिनों में होटल व चाय की दुकानें भी सुबह में ही खुलने लगती थी, लेकिन जनता कर्फ्यू के समर्थन में रविवार को कहीं कोई दुकान नहीं खुली.

सभी लोगों ने अपने आपको घरों में कैद कर लिया. इससे लोगों की गतिविधियां घरों तक सीमित हो गयी. लिहाजा, यहां की सड़कें व बाजार पूरी तरह सुनसान है. यहां तक कि ट्रेनों का आवागमन भी पूरी तरह से ठप रही. रेलवे स्टेशन पर भी कोई नहीं दिखा.

इस दौरान पुलिस प्रशासन की सक्रियता देखी गयी. सभी चौक-चौराहों पर पुलिस को तैनात कर दिया गया था. इक्का-दुक्का लोग यदि बाहर निकले भी, तो उन्हें पुलिस के इन जवानों ने जनता कर्फ्यू का महत्व समझाया और उनसे अपील की कि वे अपने घर चले जायें.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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