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हजारीबाग के केरेडारी का लाल संदीप सोनी विदेश में बना वैज्ञानिक, क्रोएशिया की सरकार ने दी साइनटिस्ट की मान्यता

Updated at : 22 Jun 2021 5:18 PM (IST)
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हजारीबाग के केरेडारी का लाल संदीप सोनी विदेश में बना वैज्ञानिक, क्रोएशिया की सरकार ने दी साइनटिस्ट की मान्यता

Jharkhand News (केरेडारी, हजारीबाग) : झारखंड के हजारीबाग जिला अंतर्गत केरेडारी प्रखंड के छोटे से गांव चट्टीबारियातू निवासी संदीप सोनी ने सभी का मान बढ़ाया है. इन्हें क्रोएशिया (यूरोप) की सरकार ने साइनटिस्ट की मान्यता प्रदान की है. अब वे वैज्ञानिक के रूप में अनुसंधान व शोध करके देश और मानव जाति के लिए मिसाल बनेंगे. साइंटिस्ट बनते ही विभिन्न देशों में जाकर रिसर्च करने का इनका सपना हकीकत में बदल गया.

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Jharkhand News (अरुण यादव, केरेडारी, हजारीबाग) : झारखंड के हजारीबाग जिला अंतर्गत केरेडारी प्रखंड के छोटे से गांव चट्टीबारियातू निवासी संदीप सोनी ने सभी का मान बढ़ाया है. इन्हें क्रोएशिया (यूरोप) की सरकार ने साइनटिस्ट की मान्यता प्रदान की है. अब वे वैज्ञानिक के रूप में अनुसंधान व शोध करके देश और मानव जाति के लिए मिसाल बनेंगे. साइंटिस्ट बनते ही विभिन्न देशों में जाकर रिसर्च करने का इनका सपना हकीकत में बदल गया.

अपने इस उपाधि को मिलने का पूरा श्रेय प्रारंभिक शिक्षक नेताजी सुभाष चंद्र बोसबोस इंस्टीट्यूट के संचालक विकास गुप्ता समेत सहयोगी शिक्षकों को दी है. इन्होंने कहा विकास सर के शिक्षा और आगे बढ़ने की प्रोत्साहन से आज हम इस मुकाम को हासिल किये हैं. इनका प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही डीएवी पब्लिक स्कूल से मिली. जिसके बाद आगे की पढ़ाई एनएससी बोस इंस्टीट्यूट में की. दो वर्ष तक इसी विद्यालय में शिक्षण का कार्य किये.

इधर, एनएससी बोस इंस्टीट्यूट के संचालक विकास गुप्ता ने बताया कि संदीप बचपन से ही बहुत मेधावी था. प्रारंभिक पढ़ाई गांव के ही डीएवी से पूरा करने के बाद हाई स्कूल की पढ़ाई एनएससी बोस से की. उच्च शिक्षा के लिए हजारीबाग से ISC और BSC की पढ़ाई पूरा किये. इसके बाद MSc की पढ़ाई इन्होंने बेंगलुरू से की. उसके बाद ये क्रोएशिया में पिछले दो वर्षों से पढ़ाई और अनुसंधान कर रहे हैं.

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माता-पिता के खोने पर हौसला बरकरार रखा और पाया मंजिल

संदीप कुमार अपने जीवन में कई कठिनाइयों को झेला. 18 वर्ष की उम्र में इन्होंने अपने पिता और 22 वर्ष की उम्र में अपनी मां को खो दिया. माता- पिता का साया उठने के बावजूद इनका संघर्ष जारी रहा. अपनी पढ़ाई से लेकर घर खर्च तक की जिम्मेवारी इनके ही कंधों पर रहा और ये बखूबी अपनी सारी जिम्मेवारियों का पालन कर रहे हैं. इसी वर्ष अप्रैल में ये अपने घर चट्टी बारियातू आये थे. यहां ये कोविड पाॅजिटिव भी हुए. इसका भी इन्होंने डटकर सामना किया और कोरोना योद्धा साबित हुए.

बधाइयों का लगा तांता

इनकी सफलता पर इंस्टीट्यूट के संचालक विकास गुप्ता और व्यवस्थापक चंदन गुप्ता समेत अन्य शिक्षक- शिक्षिकाओं ने संदीप को ढेर सारी बधाई दी है. चंदन गुप्ता ने बताया कि हमारे इंस्टीट्यूट में पढ़ाई करनेवाले सैकड़ों छात्र-छात्राओं के लिए वे एक प्रेरणादायी व्यक्तित्व साबित हुए हैं. आगे इन्होंने बताया कि कोरोनाकाल के बाद इंस्टीट्यूट खुलने पर इनकी सफलता पर एक सम्मान समारोह का आयोजन किया जायेगा.

वहीं, डीएवी के प्राचार्य अनुज दूबे ने कहा कि इन्होंने अपने दिवंगत माता-पिता और सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं का नाम रोशन किया है. संदीप सोनी के बड़े भाई रंजीत सोनी ने इस सफलता को उसकी अपनी मेहनत और संघर्ष का परिणाम बताया. वहीं, पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि सुंदर गुप्ता और पंसस प्रतिनिधि विनोद नायक सहित बुद्धिजीवी व्यक्तियों ने इसे पंचायत के साथ-साथ पूरे जिले के लिए गौरव का विषय कहा है और उनके सुखद भविष्य की कामना की है.

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Posted By : Samir Ranjan.

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