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PHOTOS: गंगासागर में भव्य सागर आरती, पहली बार त्रिशूल के साथ शामिल हुईं महिलाएं, श्रद्धालुओं ने देखा शिव तांडव

Updated at : 12 Jan 2024 10:10 PM (IST)
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PHOTOS: गंगासागर में भव्य सागर आरती, पहली बार त्रिशूल के साथ शामिल हुईं महिलाएं, श्रद्धालुओं ने देखा शिव तांडव

पूर्वी भारत के सबसे बड़े तीर्थ मेला गंगासागर में भव्य सागर आरती का आयोजन किया गया है. पहली बार इस आरती में शिव तांडव नृत्य हुआ. महिलाएं त्रिशूल के साथ इस आरती में शामिल हुईं.

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मकर संक्रांति के अवसर पर पश्चिम बंगाल में हर साल गंगासागर मेला लगता है. सागरद्वीप के तट पर लगने वाला यह मेला पूर्वी भारत का सबसे बड़ा तीर्थ मेला है. मकर संक्रांति के दिन लाखों श्रद्धालु यहां सागर में डुबकी लगाते हैं.

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हाल के वर्षों में सागरद्वीप में कई तरह के विकास कार्य हुए हैं. कभी बेहद दुर्गम मानी जाने वाली गंगासागर यात्रा हालांकि अभी भी बेहद कठिन है, लेकिन पहले की तुलना में वहां जाना अब काफी आसान हो गया है.

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पश्चिम बंगाल सरकार साल में एक बार लगने वाले इस मेला को यादगार बनाने के लिए पिछले कई सालों से कुछ विशेष आयोजन कर रही है. इन्हीं आयोजनों में एक है गंगासागर में आयोजित होने वाला ‘सागर आरती’.

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मकर संक्रांति से पहले ही यहां शंकराचार्य पहुंच चुके हैं. सागर तट पर सागर आरती शुरू हो गई है. अलग-अलग जगहों से आए कलाकारों ने शुक्रवार (12 जनवरी) को सागर तट पर सागर आरती की, जिसका दृश्य देखते ही बन रहा था.

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सागर आरती के दौरान कलाकारों ने नृत्य की भी प्रस्तुति दी. सागर तट का यह दृश्य विहंगम था. श्रद्धालु संगीत के साथ झूम रहे थे. सागर आरती के लिए बाकायदा स्टेज बनाया गया है. आकर्षक विद्युत सज्जा की गई है.

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दक्षिण 24 परगना के सागरद्वीप में गंगासागर के तट पर जब शंखध्वनि हुई, तो पूरा आसमान गूंजायमान हो गया. बता दें कि गंगासागर मेला अपनी तरह का इकलौता मेला है, जो हर साल लगता है. मकर संक्रांति के दिन लाखों श्रद्धालु सागर में डुबकी लगाते हैं.

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गंगासागर की सागर आरती में पहली बार शिव तांडव नृत्य को भी शामिल किया गया. शिव तांडव नृत्य के समय महिलाएं डमरू बजा रहीं थीं. शिव के रूप में आए कलाकार ने पूरे माहौल को जीवंत बना दिया.

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गंगासागर तीर्थ क्षेत्र बिजली से जगमगा रहे हैं. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि उनकी सरकार गंगासागर मेला पर 250 करोड़ रुपए खर्च कर रही है. केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार इस मेले के लिए एक पैसा नहीं देती.

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ममता बनर्जी ने यह भी कहा है कि उनकी सरकार गंगासागर मेला को लोकप्रिय बनाने के लिए हरसंभव कोशिश कर रहीं हैं. उनकी सरकार गंगा पर पुल बनाने की भी योजना बना रही है, ताकि लोगों का गंगासागर आना-जाना आसान हो जाए.

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पश्चिम बंगाल में लगने वाले इस प्रसिद्ध मेले में पहली बार महिलाएं त्रिशूल के साथ सागर आरती में शामिल हुईं. सभी ने भगवा रंग की साड़ी पहन रखी थी. उनके पीछे महिला कलाकार सिर पर आरती लिए नृत्य कर रहीं थीं.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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