Prabhat Khabar Special: अतिक्रमण और कूड़े-कचरे ने रोक दी कतरी नदी की धार, हो गया ऐसा हाल

Updated at : 05 Oct 2022 3:55 PM (IST)
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Prabhat Khabar Special: अतिक्रमण और कूड़े-कचरे ने रोक दी कतरी नदी की धार, हो गया ऐसा हाल

Prabhat Khabar Special: पारसनाथ से निकलकर तोपचांची, राजगंज, कतरास, महुदा होते हुए दामोदर नदी में समा जाती है. कोयलांचल को हरा-भरा कर सब कुछ न्योछावर करने वाली नदी का अस्तित्व खतरे में है. अत्यधिक अतिक्रमण हो गया है.

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Prabhat Khabar Special: पारसनाथ की तलहटी से निकलकर दामोदर नदी में समाहित होने वाली कतरी नदी की धार को अतिक्रमण व कूड़े-कचरे ने रोक दी है. कभी यह नदी कलकल करती हुई बहती थी. बताया जाता है कि कतरी के नाम से ही कतरास का नाम पड़ा. आज यह नदी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है.

कोयलांचल पर न्योछावर है कतरी नदी

पारसनाथ से निकलकर तोपचांची, राजगंज, कतरास, महुदा होते हुए दामोदर नदी में समा जाती है. कोयलांचल को हरा-भरा कर सब कुछ न्योछावर करने वाली नदी का अस्तित्व खतरे में है. अत्यधिक अतिक्रमण हो गया है. जगह-जगह डैम के साथ राजगंज से लेकर गजलीटांड़ तक नदी के बगल में फैक्टरी, कई कोलियरियों का कचरा इसमें मिलता है.

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कतरी में मिलता है कई जोरिया का पानी

नदी के पानी से कई ईंट-भट्ठों का संचालन किया जा रहा है. यही कारण है कि नदी अपने स्वरूप में बह नहीं पा रही है. कतरी नदी में गंगापुर से आने-वाली एक छोटी जोरिया धावाचिता (राजगंज) के पास मिलती है. इसके बाद यह नदी रामकनाली के गुंदलीबेड़ा, कुमारजोर, बागडेगी जोड़ के अलावा अन्य छोटी-छोटी जोरिया का पानी कतरी में मिलता है. धावाचिता से लेकर गजलीटांड़ तक दर्जनों गांव और शहर के लोग इस नदी के पानी पर ही निर्भर हैं.

कोयलांचल की जीवनदायिनी का लोगों ने देखा था रौद्र रूप

कतरास रेलवे कॉलोनी को कांको छपुलवा से ही पानी की सप्लाई होती है. इस नदी के किनारे कतरासगढ़ राजघराना के साथ यहां की मां लिलौरी का मंदिर भी बना है. कोयलांचल की जीवनदायिनी कही जाने वाली इस नदी का रौद्र रूप लोगों ने 26 सितंबर 1995 को देखा था, जब गजलीटांड़ कोलियरी डूबी थी और 64 कोलकर्मी डूब गये थे.

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अतिक्रमण नहीं हटा, तो नहीं बचेगा नदी का अस्तित्व

सामाजिक कार्यकर्ता राजेंद्र प्रसाद राजा कहते हैं कि नदी के अस्तित्व को बचाने के लिए सबसे पहले नदी के किनारे किये गये अतिक्रमण को हटाना होगा. नदी में गाद हो गया है. साफ-सफाई बहुत जरूरी है. इस पर संबंधित विभाग को गंभीरता से सोचना होगा, तभी नदी फिर से अपनी धारा में बह सकेगी.

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रिपोर्ट- कामदेव सिंह, कतरास

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Mithilesh Jha

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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