Prabhat Khabar Special: गढ़वा के बंशीधर नगर में बांकी नदी पर अतिक्रमण, दूषित हुआ पानी, लोगों ने की अपील

Updated at : 04 Oct 2022 5:45 PM (IST)
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Prabhat Khabar Special: गढ़वा के बंशीधर नगर में बांकी नदी पर अतिक्रमण, दूषित हुआ पानी, लोगों ने की अपील

वर्षों पहले इस नदी की खूबसूरती से प्रभावित होकर राज परिवार की रानी ने नदी किनारे भव्य सूर्य मंदिर की स्थापना की थी. आज नदी की हालत ऐसी हो गयी है कि यह नाला के समान दिख रहा है. जिस नदी में कलकल धारा बहती थी, उससे आज ऐसी दुर्गंध आती है कि इसके आसपास ज्यादा देर तक टिकना मुश्किल हो जाता है.

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Prabhat Khabar Special: नगर ऊंटारी की लाइफलाइन कही जाने वाली बांकी नदी पर अतिक्रमणकारियों ने कब्जा कर लिया है. इसकी वजह से बांकी नदी का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है. पुराने पुल से लेकर धमनी पुल तक नदी किनारे की जमीन पर लोगों ने कब्जा कर लिया है. फलस्वरूप नदी का प्रवाह थम गया है. लोगों का कहना है कि यही हाल रहा, तो आने वाले समय में बांकी नदी का अस्तित्व मिट जायेगा. सिर्फ किस्सों-कहानियों में इसका नाम दर्ज होकर रह जायेगा.

बांकी नदी के पानी से आती है दुर्गंध

वर्षों पहले इस नदी की खूबसूरती से प्रभावित होकर राज परिवार की रानी ने नदी किनारे भव्य सूर्य मंदिर की स्थापना की थी. आज नदी की हालत ऐसी हो गयी है कि यह नाला के समान दिख रहा है. जिस नदी में कलकल धारा बहती थी, उससे आज ऐसी दुर्गंध आती है कि इसके आसपास ज्यादा देर तक टिकना मुश्किल हो जाता है. इसकी सबसे बड़ी वजह है, अतिक्रमण. स्थानीय विधायक भानु प्रताप शाही ने बांकी नदी का चौड़ीकरण करवाया था. अतिक्रमणकारियों ने मिट्टी भरकर अवैध कब्जा कर लिया.

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नदी को अतिक्रमणमुक्त करवाये प्रशासन

स्थानीय निवासी मुन्ना खान ने कहा कि बांकी नदी को अतिक्रमणमुक्त करवाना बेहद जरूरी है. उन्होंने कहा कि नगर पंचायत का कूड़ा-कचरा भी बांकी नदी में ही डंप कर दिया जाता है. इसकी वजह से नदी का प्रवाह बाधित हो गया है. प्रशासन जल्द से जल्द नदी को अतिक्रमणमुक्त करवाये.

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नदी में डाला जाता है कचरा, रुक गया बांकी का प्रवाह

आनंद कुमार सोनी का कहना है कि बंशीधर नगर पंचायत तथा ग्रामीण क्षेत्र का सारा कचरा बांकी नदी में ही डाला जाता है. इसकी वजह से नदी का प्रवाह रुक गया है. नगर पंचायत के कार्यालय के ठीक सामने कूड़ा कचरा का अंबार लगा हुआ है और सारा कूड़ा-कचरा बाकी नदी में ही डाला जाता है, जिसे बाकी नदी का अस्तित्व खतरे में है.

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रैयतों ने नदी किनारे की जमीन पर कर लिया कब्जा

जितेंद्र चंद्रवंशी ने कहा कि बांकी नदी के पीछे सारे रैयतों ने नदी के किनारे कब्जा जमा लिया है. इससे नदी अब नाले के रूप में तब्दील हो गयी है. प्रशासन जल्द से जल्द बांकी नदी को अतिक्रमण मुक्त करवाये, ताकि नदी को फिर से जीवंत किया जा सके.

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अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ हो कार्रवाई

विकास कुमार ने कहा कि गढ़वा के उपायुक्त, क्षेत्रीय विधायक तथा एसडीओ को बांकी नदी के मिट रहे अस्तित्व पर स्वतः संज्ञान लेना होगा, ताकि एक बार फिर से हम सभी बांकी नदी को जीवंत रूप में बहता देख सकें. प्रशासन से अनुरोध है कि नदी किनारे की भूमि पर अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ विधि सम्मत कार्रवाई की जाये.

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रिपोर्ट- गौरव, श्री बंशीधर नगर, गढ़वा

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Mithilesh Jha

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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