PM मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में खरसावां के रायजेमा ग्रामीणों की तस्वीर हुई साझा,उत्साहित हुए ग्रामीण

Updated at : 24 Apr 2022 10:42 PM (IST)
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PM मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में खरसावां के रायजेमा ग्रामीणों की तस्वीर हुई साझा,उत्साहित हुए ग्रामीण

पीएम मोदी के 'मन की बात' कार्यक्रम को देखने खरसावां के रायजेमा के ग्रामीण एक पेड़ के नीचे इकट्ठा हुए. इस कार्यक्रम में रायजेमा के ग्रामीणों की तस्वीर टीवी स्क्रीन पर देख ग्रामीण काफी उत्साहित हुए. रायजेमा के ग्रामीण ऑर्गेनिक हल्दी की खेती के जाने जाते हैं.

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Jharkhand news: रविवार (24 अप्रैल, 2022) को पीएम नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में सरायकेला-खरसावां जिला के खरसावां प्रखंड के अंतिम छोर पर स्थित रायजेमा गांव के ग्रामीणों की तस्वीर साझा हुई. पीएम मोदी के मन की बात कार्यक्रम को देखने गांव में एक पेड़ के नीचे काफी ग्रामीण एकत्रित हुए. टीवी स्क्रीन पर रायजेमा के ग्रामीणों की तस्वीर आते ही ग्रामीण काफी उत्साहित दिखें.

ऑर्गेनिक हल्दी की गांठ और पाउडर लेकर पहुंचे थे ग्रामीण

रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ का सीधा प्रसारण किया गया. इस दौरान रायजेमा गांव में एक पेड़ के नीचे इकट्ठा होकर काफी संख्या में ग्रामीणों ने टेलीविजन स्क्रीन पर इस कार्यक्रम को देखा तथा पीएम को सुना. पीएम के ‘मन की बात’ कार्यक्रम को देखने पहुंचे लोग अपने गांव में उपजाए ऑर्गेनिक हल्दी की गांठ से लेकर हल्दी के पाउडर को लेकर पहुंचे थे.

खुद की तस्वीर देख चहक उठे ग्रामीण

‘मन की बात’ कार्यक्रम को देखने पहुंचे रायजेमा गांव के लोगों की तस्वीर को भी कार्यक्रम के दौरान ही टेलीविजन स्क्रीन पर दिखाया गया. खुद की तस्वीर टीवी पर देखते ही ग्रामीणों के चेहरे खिल उठे. इस दौरान पीएम के ट्विटर हैंडल से भी ‘मन की बात’ कार्यक्रम में रायजेमा की तस्वीर ट्वीट हुई है. मालूम हो कि खरसावां का रायजेमा गांव देश भर में ऑर्गेनिक हल्दी के लिए जाना जाता है. इस दौरान गांव के लोगों के साथ भाजपा नेता सह पूर्व गृह सचिव जेबी तुबिद, प्रदेश महासचिव प्रदीप वर्मा, प्रदेश सचिव सुबोध सिंह गुड्डू, जिलाध्यक्ष विजय महतो, पूर्व जिलाध्यक्ष उदय सिंहदेव आदि उपस्थित थे.

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हल्दी की खेती से जुड़ें हैं काफी ग्रामीण

बता दें कि खरसावां के रायजेमा से कुचाई के गोमियाडीह तक पहाड़ियों की तलहटी पर बसे गांवों में बड़े पैमाने पर परंपरागत तरीके से हल्दी की खेती होती है. यहां काफी संख्या में आदिवासी ग्रामीण हल्दी की खेती से जुड़े हैं. पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण यह हल्दी की खेती के लिए अनुकूल भी है.

रिपोर्ट : शचिंद्र कुमार दाश, सरायकेला-खरसावां.

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