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झारखंड पहुंचने लगे विदेशी मेहमान, छड़वा व गोंदा डैम में विदेशी पक्षियों का आगमन शुरू

Updated at : 19 Nov 2022 9:49 PM (IST)
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झारखंड पहुंचने लगे विदेशी मेहमान, छड़वा व गोंदा डैम में विदेशी पक्षियों का आगमन शुरू

Migrant Birds in Jharkhand: जलीय पौधे, जलीय कीट व मछलियां ही इनका आहार हैं. कटकमसांडी के छड़वा और गोंदा डैम में बार हेडेड गुज, नॉर्दर्न पिनटेल, कॉमन पोचार्ड, टफटेड डक, रूडी शेल्डेक, रेड क्रेस्टेड पोचार्ड और ग्रेट क्रेस्टेड ग्रीब का समूह पहुंचा है.

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Migrant Birds in Jharkhand: झारखंड के हजारीबाग जिला के छड़वा डैम और गोंदा डैम में विदेशी पक्षियों का आना शुरू हो गया है. हर वर्ष सर्दी के मौसम में ये पक्षी झारखंड आते हैं. साइबेरिया से करीब 11 हजार किलोमीटर की दूरी तय करके ये प्रवासी पक्षी झारखंड आते हैं. सूर्योदय के बाद से शाम लगभग पांच बजे तक जलाशय में रहते हैं.

इन प्रजातियों के पक्षी आये हैं हजारीबाग

इन पक्षियों का आगमन अक्टूबर और नवंबर के महीने में होता है. मार्च और अप्रैल के बीच में ये विदेशी मेहमान फिर अपने घर को लौट जाते हैं. जलीय पौधे, जलीय कीट व मछलियां ही इनका आहार हैं. कटकमसांडी के छड़वा और गोंदा डैम में बार हेडेड गुज, नॉर्दर्न पिनटेल, कॉमन पोचार्ड, टफटेड डक, रूडी शेल्डेक, रेड क्रेस्टेड पोचार्ड और ग्रेट क्रेस्टेड ग्रीब का समूह पहुंचा है.

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अक्टूबर के महीने से आने लगते हैं विदेशी मेहमान

जाड़े की शुरुआत में अक्टूबर से नवंबर महीने के बीच एशिया और मंगोलिया से पक्षी हजारीबाग (झारखंड) आते हैं. दिन भर पानी में और शाम होने के बाद पास के जंगल में रात्रि विश्राम करने चले जाते हैं. वनरक्षियों ने बताया कि ये पक्षी यूरोप के देशों से आते हैं. इनका मूल निवास यूरोप और उत्तरी अमेरिका है. इन प्रजातियों के पक्षी अपने मूल स्थान से साइबेरिया और टुंड्रा भी प्रवास पर जाते हैं.

70 प्रजाति के पक्षी आते हैं झारखंड

वनरक्षियों ने यह भी बताया कि इन पक्षियों को सुबह आठ बजे से शाम चार बजे तक पानी में विचरण करते देखा जा सकता है. जलाशयों में लगभग 70 प्रजाति के वाटर बर्ड और वाटर डिपेंडेंट बर्ड पहुंचते हैं. अभी कुछ पक्षियों का आना बाकी है. मंगोलिया से हजारीबाग पहुंचने वाले बर्ड की पुष्टि उसमें लगे टैग से पिछले वर्ष भी हुई थी.

बर्ड सेंसस करवाता है वन विभाग

उन्होंने बताया कि ज्यादा ठंड और बर्फ जम जाने की वजह से वहां उनके लिए भोजन की कमी हो जाती है. यही वजह है कि यूरोप और मध्य एशिया से पक्षी दक्षिण एशिया के देशों में प्रवास पर आ जाते हैं. जलीय प्रवासी पक्षियों को देखने छड़वा और गोंदा डैम हर साल बर्ड वाचर पहुंचते हैं. वन विभाग इन प्रजातियों के बारे में जानकारी जुटाने केलिए बर्ड सेंसस कराता है.

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विदेशी मेहमानों को नुकसान पहुंचाना दंडनीय अपराध

इन विदेशी मेहमानों को किसी भी तरह से नुकसान पहुंचाना या इनका शिकार करना दंडनीय अपराध है. इनका शिकार करने वालों की सूचना संबंधित वन प्रमंडल पदाधिकारी को दी जा सकती है. वनरक्षी ने बताया कि ये पक्षी जब उड़ान भरते हैं, तो इनके की आकृति अंग्रेजी के वी (V) लेटर की तरह होती है. उड़ते समय आवाज भी करते हैं. पानी में उतरते समय फाइटर प्लेन की तरह लैंड करते हैं.

दिसंबर में होती है विदेशी पक्षियों की गिनती

डीएफओ आरएन मिश्रा ने बताया कि कि विदेशी पक्षियों की सुरक्षा और उनके संरक्षण के लिए वन विभाग बराबर गश्ती करवाती है. दिसंबर महीने में इनकी गिनती करवायी जाती है. पक्षियों को मरने वालों पर वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के तहत मामला दर्ज किया जाता है.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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