Makar Sankranti 2024: मकर संक्रांति पर बन रहा वरियान योग का अद्भुत संयोग, जानें स्नान-दान का मुहूर्त और महत्व

Makar Sankranti 2024: मकर संक्रांति का पर्व भगवान सूर्य की पूजा के लिए समर्पित है. भक्त इस दिन भगवान सूर्य की पूजा कर आशीर्वाद मांगते हैं, इस दिन से वसंत ऋतु की शुरुआत और नई फसलों की कटाई शुरू होती है. आइए जानते है स्नान-दान का मुहूर्त और महत्व
Makar Sankranti 2023: सनातन धर्म में मकर संक्रांति पर्व का विशेष महत्व है, इस दिन गंगा स्नान, पूजा, जप, तप और दान-दक्षिणा देने का विशेष महत्व है. इस दिन भगवान सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं. मकर संक्रांति को खिचड़ी और उत्तरायण के नाम से भी जाना जाता है. मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान और भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाई जाएगी. क्योंकि इस दिन सूर्य धनु राशि में अपनी यात्रा पूरी कर रहे हैं. 14 और 15 जनवरी की रात 02 बजकर 54 मिनट पर सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे. 15 जनवरी 2024 को शुभ मुहूर्त सुबह 07 बजकर 15 मिनट से शाम 05 बजकर 46 मिनट तक रहेगा. वहीं महापुण्य काल सुबह 07 बजकर 15 मिनट से 09 बजे तक रहेगा, इस दौरान पूजा-पाठ और दान करने से लाभ मिलता है, इस दौरान पूजा-पाठ और दान करने से लाभ मिलता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मकर संक्रांति की तिथि पर रवि योग समेत कई अद्भुत संयोग बन रहे हैं, इन योगों में गंगा स्नान, पूजा, जप और तप का दोगुना फल मिलता है, इसके साथ ही पैतृक आशीर्वाद भी प्राप्त होता है.
मकर संक्रांति की तिथि पर वरियान योग बन रहा है, इस योग की रचना रात्रि 11 बजकर 11 मिनट तक रहेगी. ज्योतिष शास्त्र वरियान योग को शुभ योग मानता है, इस योग में शुभ कार्य किये जा सकते हैं. इस दिन खरमास समाप्त हो जाएगा.
रवि योग का संयोग
ज्योतिषियों के अनुसार मकर संक्रांति पर रवि योग भी बन रहा है, इस योग की रचना सुबह 7 बजकर 15 मिनट से 8 बजकर 07 मिनट तक रहेगी. इस योग में पूजा और दान करने से स्वस्थ जीवन का वरदान मिलता है।
करण
मकर संक्रांति की तिथि पर बव और बालव करण का निर्माण हो रहा है। बव करण का निर्माण दोपहर 3 बजकर 35 मिनट तक रहेगा। इसके बाद संतान प्राप्ति की संभावना बनेगी। ज्योतिष शास्त्र बव और बालव करण दोनों को शुभ मानता है। इस योग में शुभ कार्य किये जा सकते हैं.
मकर संक्रांति का पर्व भगवान सूर्य की पूजा के लिए समर्पित है. भक्त इस दिन भगवान सूर्य की पूजा कर आशीर्वाद मांगते हैं, इस दिन से वसंत ऋतु की शुरुआत और नई फसलों की कटाई शुरू होती है. मकर संक्रांति पर भक्त गंगा, यमुना, नर्मदा और शिप्रा नदी में पवित्र स्नान करते हैं और भगवान सूर्य को अर्घ्य देते हैं, इस दिन गंगा स्नान और जरूरतमंद लोगों को भोजन, दालें, अनाज, गेहूं का आटा और ऊनी कपड़े दान करना शुभ माना जाता है.
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मकर संक्रांति पर स्नान कर लोटे में लाल फूल और अक्षत डाल कर सूर्य को अर्घ्य दें, इसके बाद सूर्य के बीज मंत्र का जाप करें. श्रीमदभागवद के एक अध्याय का पाठ करें या गीता का पाठ करें. फिर नए अन्न, कम्बल, तिल और घी का दान करें. भोजन में नए अन्न की खिचड़ी बनाएं. भोजन भगवान को समर्पित करके प्रसाद रूप से ग्रहण करें. संध्या काल में अन्न का सेवन न करें. इस दिन किसी गरीब व्यक्ति को बर्तन समेत तिल का दान करने से शनि दोष से राहत मिलती है.
मकर संक्रांति पर हर साल गंगा घाट पर स्नान करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती हैं. मकर संक्रांति को तिल संक्रांति भी कहा जाता है, इस दिन काले तिल और तिल से बनी चीजों को दान करने से पुण्य लाभ मिलता है. काले तिल के दान से शनिदेव भी प्रसन्न होते हैं. इस दिन नए अन्न, कम्बल, घी, वस्त्र, चावल, दाल, सब्जी, नमक और खिचड़ी का दान करना सर्वोत्तम होता है. मकर संक्रांति के दिन तेल का दान करने से भी शनिदेव प्रसन्न होते हैं.
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By Radheshyam Kushwaha
पत्रकारिता की क्षेत्र में 13 साल का अनुभव है. इस सफर की शुरुआत राज एक्सप्रेस न्यूज पेपर भोपाल से की. यहां से आगे बढ़ते हुए समय जगत, राजस्थान पत्रिका, हिंदुस्तान न्यूज पेपर के बाद वर्तमान में प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में धर्म अध्यात्म एवं राशिफल डेस्क पर कार्यरत हैं. ज्योतिष शास्त्र, व्रत त्योहार, राशिफल के आलावा राजनीति, अपराध और पॉजिटिव खबरों को लिखने में रुचि हैं.
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