पाकुड़ के सुंदरपहाड़ी मौजा में गोचर और सरकारी जमीन की मापी शुरू, अवैध पत्थर माफिया के छूटने लगे पसीने
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 17 Dec 2021 9:11 PM
jharkhand news: पाकुड़ जिला अंतर्गतर सुंदरपहाड़ी मौज के गोचर जमीन और सरकारी जमीन की मापी शुरू हो गयी है. जमीन की मापी होने से अवैध पत्थर माफिया में हड़कंप मच गया है. जिला प्रशासन जल्द ही लीज एरिया की भी मापी करायेगी, ताकि अवैध पत्थर खनन और राजस्व हानि का पता लगा सके.
Jharkhand news: पाकुड़ जिला अंतर्गत सुंदरपहाड़ी मौजा में गोचर जमीन और सरकारी रास्ते में पत्थर खनन मामले की जांच के लिए शुक्रवार को अंचल कार्यालय के कर्मी जमीन की मापी के लिए पहुंचे. इस दौरान सीओ के निर्देश पर सीआई देवकांत सिंह के नेतृत्व में कर्मचारी अशोक रक्षित की उपस्थिती में अमीन मो जेबान हुसैन ने स्थल की मापी शुरु की. इस दौरान सुंदरापहाड़ी मौजा के जमाबंदी नंबर 30 के दाग नंबर 464 और 466 गोचर जमीन की मापी शुरु की गई. वहीं, दाग नंबर 465 जो कि सरकारी रास्ता है, उसकी भी मापी शुरू हुई. मापी पूरा करने में दो से तीन दिन का समय लग सकता है. लेकिन, शुरुआती मापी में ही बताया जा रहा है कि गोचर जमीन और सरकारी रास्ते में अवैध तरीके से पत्थर उत्खनन का कार्य हुआ है.
मालूूम हो कि 3 दिसंबर को जिला टास्क फोर्स ने अनुमंडल पदाधिकारी पंकज कुमार साव के नेतृत्व में सुंदरापहाड़ी मौजा में संचालित अवैध पत्थर खनन पर कार्रवाई की गई थी. इस कार्रवाई में टास्क फोर्स ने मौके से अब्दुल शेख और सद्दाम शेख को मौके से गिरफ्तार किया था. वहीं, पत्थर खदान कर्मी अब्दुल शेख और सद्दाम शेख के अलावे पत्थर व्यवसायी महबूल शेख, हसीबुल शेख और यार मोहम्मद के खिलाफ जिला खनन पदाधिकारी प्रदीप कुमार साहु ने मालपहाड़ी थाना में कांड संख्या 190/21 के तहत मामला दर्ज कराया गया था. पुलिस इस मामलें में जांच कर रही है लेकिन बाकी आरोपियों की अभी तक पुलिस के द्वारा गिरफ्तारी नहीं की गई है.
अचंल कार्यालय के कर्मी दांग नंबर 464 और 466 की मापी कर रहे हैं, जो कि गोचर जमीन है. वहीं, 465 सरकारी रास्ता है. दाग नंबर 464 का कुल रकवा एक बीघा 11 धुर है. वहीं, दाग नंबर 466 का कुल रकवा 3 बीघा 16 कट्ठा 17 धुर है. दाग नंबर 465 का कुल रकवा 15 कट्ठा 2 धुर है. गोचर जमीन गांव के पशुओं के चरने के लिए होता है. लेकिन, पत्थर माफियाओं की दंबगई के कारण उस जमीन का इस्तेमाल पशुओं के चरने के लिए नहीं, बल्कि विस्फोट कर पत्थर उत्खनन के लिए किया जा रहा है.
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सुंदरापहाड़ी मौजा के दाग नंबर 464, 465 और 466 में अंचल कार्यालय की ओर से मापी शुरू होने से पत्थर माफियाओं में हड़कंप मच गया है. सूत्रों द्वारा बताया जा रहा है कि गोचर जमीन में भी बड़े पैमाने पर अवैध तरीक से पत्थर का उत्खनन किया गया है. वहीं, सरकारी रास्ते को भी पत्थर माफिया द्वारा पत्थर खनन कर खत्म कर दिया है. इस स्थल पर कई पत्थर खदान संचालित है जो कि पाकुड़ को पश्चिम बंगाल से जोड़ने वाली मुख्य सड़क के बिल्कुल करीब है. वैसे में पत्थर माफियाओं की दबंगई के कारण मुख्य सड़क से सटा कर पत्थर खनन कर लिया गया है.
ऐसे में मुख्य सड़क को सुरक्षित करने के लिए अब तक ना तो जिला प्रशासन की ओर कोई प्रयास किया गया है और ना ही खदान संचालक ने ही इस दिशा में कोई कदम उठाया है. जो कि उस सड़क का इस्तेमाल करने वाले राहगीरों की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है. जानकारी के अनुसार, पत्थर खनन के लिए जरूरी है कि ग्रामीण सड़क से पत्थर खदान की दूरी कम से कम 50 मीटर होना चाहिए. वहीं, मुख्य सड़क के लिए यह एक किलोमीटर है. ऐसे में मुख्य सड़क से बिल्कुल सटे होने के बावजूद पत्थर खनन का संचालन संबंधित पदाधिकारियों की उदासीनता का भी परिणाम है.
जिला खनन टास्क फोर्स ने अवैध पत्थर खनन की सूचना पर 3 दिसंबर को सुदंरापहाड़ी मौजा में संचालित पत्थर खदान में कार्रवाई कर एक पोकलेन मशीन, 7 टैक्टर, 5 ड्रील मशीन, एक कंप्रेशर मशीन जब्त किया गया है. वहीं, मौके पर टास्क फोर्स ने 306 पीस जिलेटिन और 280 पीस डेटोनेटर बरामद किया गया है. साथ ही पत्थर खनन में इस्तेमाल होने वाले अन्य सामानों को भी जब्त किया गया है.
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अवैध पत्थर खदान संचालन के खिलाफ कार्रवाई जिला टास्क फोर्स के द्वारा किया गया. जिसका नेतृत्व में एसडीओ पंकज कुमार साव कर रहे थे. वहीं टीम में डीएमओ प्रदीप कुमार, डीएसपी वैद्यनाथ प्रसाद, माइनिंग इंस्पेक्टर पिंटु कुमार और मालपहाड़ी ओपी थाना की पुलिस और अन्य कर्मी शामिल थे. टास्क फोर्स की इस कार्रवाई से जिले में अवैध पत्थर खदान संचालकों में हड़कंप मच गया था.
एसडीओ पंकज कुमार साव ने बताया कि सुंदरापहाड़ी मौजा में अवैध पत्थर खनन के खिलाफ हुई कार्रवाई के बाद मौजा के जमाबंदी नंबर 30 के दाग नंबर 464, 465 और 466 जो कि सरकारी जमीन है, उसकी मापी कराई जा रही है. वहीं, पत्थर खनन के लिए दी गई लीज एरिया की भी मापी करायी जायेगी, ताकि अवैध खनन और राजस्व हानि के मामले की भी सत्यता का पता लगाया जा सके. मापी करने में अभी 2-3 दिन का समय लग सकता है. उसके बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पायेगी.
रिपोर्ट: रमेश भगत, पाकुड़.
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