WB Election 2021 : बंगाल में BJP-TMC की सियासी लड़ाई में बढ़ी पतंग की डिमांड, पढ़िए क्या है वजह
Author : Prabhat Khabar Digital Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 21 Mar 2021 12:21 PM
WB Election 2021 latest news : वैसे तो सालभर आसमां में पतंगबाजी दिखती है, पर आकाश रंग-बिरंगी पतंगों से पट जाये, ऐसा नजारा कम ही दिखता है. बंगाल में चुनावी मौसम का रंग पतंगों पर चढ़ गया है. बंगाल के विधानसभा चुनाव पर पूरे देश की निगाहें हैं. चुनावी बुखार बंगाल पर छाया हुआ है. चाहे बंगाल की मिठाइयां हों अथवा बंगाल के कपड़े-लत्ते, सब पर चुनावी असर दिख रहा है.
मनोरंजन सिंह : वैसे तो सालभर आसमां में पतंगबाजी दिखती है, पर आकाश रंग-बिरंगी पतंगों से पट जाये, ऐसा नजारा कम ही दिखता है. बंगाल में चुनावी मौसम का रंग पतंगों पर चढ़ गया है. बंगाल के विधानसभा चुनाव पर पूरे देश की निगाहें हैं. चुनावी बुखार बंगाल पर छाया हुआ है. चाहे बंगाल की मिठाइयां हों अथवा बंगाल के कपड़े-लत्ते, सब पर चुनावी असर दिख रहा है.
अब पतंगों पर भी राजनीतिक रंग चढ़ गया है. ज़मीं पर राजनीतिक दलों की चुनावी लड़ाई अब आसमान में भी छाने लगी है. रंग-बिरंगी पतंगों के जरिये पार्टियां अब आकाश में भी पेच लड़ा रही हैं. आकाश में राजनीतिक विरोधी की पतंग को काटने के लिए पार्टियों की मशक्कत देखते ही बन रही है. पतंग बाजार भी अलग-अलग पार्टियों की रंग-बिरंगी पतंगों से पट गया है.
मोदी-ममता के चेहरों के साथ पार्टियों के निशान व पसंदीदा रंगों वाली पतंगें बाजार में छा गयी हैं. पतंग कारोबारियों का मानना है कि इस बार बंगाल में पंतगों की मांग बढ़ गयी है. हाथीबागान स्थित संटू काइट-कोलकाता के व्यापारी शुभोजीत गोड़ाई कहते हैं कि पिछले चुनाव की तुलना में मांग बढ़ी है खासकर तृणमूल व भाजपा की पतंगों की मांग दोगुनी हुई है.
जहां पिछले चुनाव में प्रतिदिन औसतन 25 से 50 पतंगें बिकती थीं, वहीं इस बार यह आंकड़ा सौ हो गया है. एक पतंग का दाम 12 से 13 रुपये है. वैसे तो पतंग व्यापारी वर्षभर पतंग सप्लाई करते हैं, पर चुनावी बयार में पतंगें भी खूब उड़ रही हैं. राजनीतिक पार्टियों से इनके खूब ऑर्डर मिल रहे हैं. तृणमूल कांग्रेस, भाजपा, माकपा व कांग्रेस सबके निशानवाली पतंगें तैयार हो रही हैं. पतंग व्यापारियों का पार्टी विशेष से वास्ता नहीं है.
वहीं, मौलाली के एक पतंग व्यापारी बाप्पादित्य दत्त ने बताया कि उनके यहां लॉकडाउन के बाद से कारीगर नहीं आ रहे हैं. वे घर से ही पतंग बनवा रहे है. उधर, उत्तर 24 परगना के एक पतंग व्यापारी अशोक साव ने कहा कि इस बार तृणमूल व भाजपा छाप पतंगों की अधिक बिक्री हो रही है. बाकी दलों की पतंगों के इने-गिने ग्राहक आ रहे हैं. अभी कम ऑर्डर मिल रहे हैं, पर उम्मीद है कि चुनावी सरगर्मी के साथ चुुनावी पतंगों के और ऑर्डर मिलेंगे
Posted By : Avinish kumar mishra
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