रांची के योगदा सत्संग आश्रम में गुरु पूर्णिमा मनी, स्वामी पवित्रानंद बोले- ईश्वर प्राप्ति के पथ प्रदर्शक हैं गुरु

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गुरु पूर्णिमा पर योगदा सत्संग आश्रम में स्वामी योगानंद जी की पूजा करते स्वामी जी. फोटो : प्रभात खबर

Guru Purnima in Ranchi: रांची के योगदा सत्संग आश्रम में गुरुवार को गुरु पूर्णिमा का आयोजन किया गया. इसमें स्वामी पवित्रानंद ने गुरु-शिष्य संबंध और परंपरा के बारे में बताया. उन्होंने यह भी बताया कि स्वामी योगानंद ने योगदा सत्संग पाठमाला की रचना क्यों की. अनुयायियों ने भजन-कीर्तन में भी भाग लिया. गुरु पूर्णिमा में शामिल लोगों के बीच प्रसाद का वितरण किया गया.

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Guru Purnima in Ranchi: झारखंड की राजधानी रांची में स्थित योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इंडिया (वाईएसएस) आश्रम में बृहस्पतिवार को ध्यान और भजन-कीर्तन के साथ गुरु पूर्णिमा मनायी गयी. समारोह की शुरुआत सुबह विशेष ऑनलाइन सामूहिक ध्यान सत्र और स्वामी पवित्रानंद गिरि के प्रवचन के साथ हुई. देश के विभिन्न हिस्सों से आये अनुयायियों ने इसमें हिस्सा लिया.

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गुरु-शिष्य संबंधों पर स्वामी पवित्रानंद ने कही ये बात

गुरु-शिष्य संबंधों पर स्वामी पवित्रानंद ने परमहंस योगानंद के शब्दों को उद्धृत किया. उन्होंने कहा, ‘भारत ने जो शिक्षाएं दी हैं और जिनमें उसके गुरुओं ने विशेषज्ञता हासिल की है, उनका अनुसरण करें. दुनिया को उसका सर्वोच्च उपहार यह ज्ञान है कि चरण-दर-चरण विधियों के माध्यम से ईश्वर को कैसे पाया जाये. अगर आप भारत की आत्मबोध संबंधी शिक्षाओं का पालन करते हैं, तो आप इसी जीवन में ईश्वर को पा सकते हैं.’

गुरु पूर्णिमा पर आयोजित कार्यक्रम में आश्रम के अनुयायियों ने भजन-कीर्तन में भी भाग लिया. फोटो : प्रभात खबर

भजन-कीर्तन में शामिल हुए योगदा आश्रम के अनुयायी

बाद में अनुयायी गुरु पूजा के दौरान ब्रह्मचारी शंभवानंद और गौतमानंद के नेतृत्व में भजन-कीर्तन में शामिल हुए. उन्हें भंडारा प्रसाद भी प्रदान किया गया. समारोह का समापन शाम को ब्रह्मचारी सच्चिदानंद के नेतृत्व में 3 घंटे के विशेष ध्यान सत्र के साथ हुआ. ध्यान कार्यक्रम में उन्होंने योगदा सत्संग शिक्षाओं के कुछ अंश पढ़े, जिसमें उन्होंने बताया कि किस प्रकार से अमर गुरु महावतार बाबाजी ने श्री श्री परमहंस योगानंद को अमेरिका और संपूर्ण विश्व में क्रियायोग का प्रचार-प्रसार करने का कार्य सौंपा था.

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योगदा सत्संग पाठमाला की रचना क्यों हुई?

स्वामीजी ने कहा कि योगानंदजी जानते थे कि इस आधुनिक युग में, जब गुरु और शिष्य प्रायः एक-दूसरे से दूर रहते हैं, शिष्य के लिए अपने गुरु के चरणों में बैठकर ज्ञान प्राप्त करना कठिन होगा. इसलिए उन्होंने योगदा सत्संग पाठमाला की रचना की, जिसमें ध्यान प्रविधियों अर्थात् ध्यान के क्रियायोग विज्ञान की एक शक्तिशाली प्रणाली को सम्मिलित किया गया है.

गुरु पूर्णिमा पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल आश्रम के स्वामी और श्रद्धालु. फोटो : प्रभात खबर

स्टीव जॉब्स और रजनीकांत हैं योगानंद के अनुयायी

उन्होंने कहा कि आत्मा का यह प्राचीन विज्ञान, जिसका परिचय लाखों लोगों को ‘योगी कथामृत’ के माध्यम से प्राप्त हुआ है, उच्चतर आध्यात्मिक चेतना और ईश्वर-साक्षात्कार के आंतरिक आनंद के जागरण के शक्तिशाली उपाय प्रदान करता है. ‘ऑटोबायोग्राफी ऑफ ए योगी’ के लिए प्रसिद्ध योगानंद के अनुयायियों में उद्यमी स्टीव जॉब्स, क्रिकेटर रवि शास्त्री और अभिनेता रजनीकांत शामिल हैं. योगदा सत्संग आश्रम की स्थापना वर्ष 1917 में हुई थी.

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