डॉ ज्ञान चतुर्वेदी के उपन्यास 'पागलखाना' को मिला वर्ष 2022 का व्यास सम्मान

Published by : ArbindKumar Mishra Updated At : 09 Mar 2023 10:29 PM

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के के बिरला फाउंडेशन साहित्य के क्षेत्र में विशेष रूप से सक्रिय है. फाउंडेशन की ओर से हर वर्ष तीन बड़े साहित्यिक सम्मान/पुरस्कार दिए जाते हैं. व्यास सम्मान के लिए कृति के चयन का पूरा दायित्व एक चयन समिति का है. जिसके अध्यक्ष हिन्दी साहित्य के प्रख्यात विद्वान प्रो रामजी तिवारी हैं.

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प्रख्यात लेखक डॉ ज्ञान चतुर्वेदी के उपन्यास पागलखाना को वर्ष 2022 के व्यास सम्मान के लिए चुना गया है. जिसका चयन हिंदी साहित्य के जाने माने विद्वान प्रो रामजी तिवारी की अध्यक्षता में संचालित एक समिति ने किया.

केके बिरला फाउंडेशन देती है सम्मान

के के बिरला फाउंडेशन साहित्य के क्षेत्र में विशेष रूप से सक्रिय है. फाउंडेशन की ओर से हर वर्ष तीन बड़े साहित्यिक सम्मान/पुरस्कार दिए जाते हैं. संविधान की आठवीं अनुसूची में उल्लिखित किसी भी भारतीय भाषा में पिछले दस वर्षों में प्रकाशित भारतीय नागरिक की एक उत्कृष्ट साहित्यिक कृति के लिए सरस्वती सम्मान. (राशिः पंद्रह लाख रुपये) और राजस्थान के हिन्दी/राजस्थानी लेखकों के लिए बिहारी पुरस्कार, (राशिः ढाई लाख रुपये) दिया जाता है. एक अन्य पुरस्कार है व्यास सम्मान, (राशि: चार लाख रुपये) जो सरस्वती सम्मान के बाद सबसे अधिक प्रतिष्ठित माना जाता है. यह भी पिछले 10 वर्षों में प्रकाशित किसी भारतीय नागरिक की उत्कृष्ट हिन्दी कृति पर दिया जाता है.

व्यास सम्मान के चयन के लिए बनायी गयी समिति

व्यास सम्मान के लिए कृति के चयन का पूरा दायित्व एक चयन समिति का है. जिसके अध्यक्ष हिन्दी साहित्य के प्रख्यात विद्वान प्रो रामजी तिवारी हैं. उनके अतिरिक्त इस समिति में अन्य सदस्य हैं : डॉ श्रीराम परिहार (संयोजक, हिन्दी भाषा समिति) (खंडवा), श्रीमती अरूणा गुप्ता (नई दिल्ली), प्रो अनिल राय (दिल्ली), डॉ विजया सती (नैनीताल) व फाउंडेशन के निदेशक डॉ सुरेश ऋतुपर्ण (सदस्य-सचिव), चयन प्रक्रिया द्विस्तरीय है.

अबतक इन्हें मिल चुका है सम्मान

1991- भारत के प्राचीन भाषा परिवार और हिन्दी (तीन भागों में) (आलोचना) डॉ रामविलास शर्मा

1992- नीला चांद (उपन्यास) डॉ शिवप्रसाद सिंह

1993- मैं वक्त के हूं सामने (कविता) श्री गिरिजा कुमार माथुर

1994- सपना अभी भी (कविता) डॉ धर्मवीर भारती

1995- कोई दूसरा नहीं (कविता) श्री कुंवर नारायण

1996- हिन्दी साहित्य और संवेदना का विकास (साहित्य का इतिहास) प्रो रामस्वरूप चतुर्वेदी

1997- उत्तर कबीर तथा अन्य कविताएं (कविता) डॉ केदार नाथ सिंह

1998- पांच आंगनों वाला घर (उपन्यास) श्री गोविन्द मिश्र

1999- विस्रामपुर का संत (उपन्यास) श्री श्रीलाल शुक्ल

2000- पहला गिरमिटिया (उपन्यास) श्री गिरिराज किशोर

2001- आलोचना का पक्ष (आलोचना) प्रो रमेश चन्द्र शाह

2002- पृथ्वी का कृष्णपक्ष (कविता) डॉ कैलाश वाजपेयी

2003- आवां (उपन्यास) श्रीमती चित्रा मुद्गल

2004- कठगुलाब (उपन्यास) श्रीमती मृदुला गर्ग

2005- कथा सतीसर (उपन्यास) श्रीमती चन्द्रकांता

2006- कविता का अर्थात् (आलोचना) प्रो परमानंद श्रीवास्तव

2007- इस वर्ष यह पुरस्कार किसी को नहीं दिया गया.

2008- एक कहानी यह भी (आत्मकथा) श्रीमती मन्नू भंडारी

2009- इन्हीं हथियारों से (उपन्यास) श्री अमरकांत

2010- फिर भी कुछ रह जायेगा (कविता) डॉ विश्वनाथ प्रसाद तिवारी

2011- आम के पत्ते (कविता) प्रो रामदरश मिश्र

2012- न भूतो न भविष्यति (उपन्यास) डॉ नरेन्द्र कोहली

2013- व्योमकेश दरवेश (संस्मरणात्मक जीवनी) डॉ विश्वनाथ त्रिपाठी

2014- प्रेमचंद की कहानियों का कालक्रमानुसार अध्ययन

(शोधकार्य) डॉ कमल किशोर गोयनका

2015- क्षमा (काव्य संग्रह) डॉ सुनीता जैन

2016- काटना शमी का वृक्ष पद्मपंखुरी की धार से (उपन्यास) श्री सुरेन्द्र वर्मा

2017- दुक्खम-सुक्खम (उपन्यास) श्रीमती ममता कलिया

2018- जितने लोग उतने प्रेम (काव्य संग्रह) श्री लीलाधर जगूड़ी

2019 कागज की नाव (उपन्यास) श्रीमती नासिरा शर्मा

2020- पाटलिपुत्र की साम्राज्ञी (ऐतिहासिक उपन्यास) प्रो शरद पगारे

2021- महाबली (उपन्यास) श्री असगर वजाहत

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ArbindKumar Mishra

लेखक के बारे में

By ArbindKumar Mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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