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अलीगढ़: श्रीमद्भागवत कथा में चल रहा था गोवर्धन लीला का वर्णन, फिर हकीकत में आयी आंधी-बारिश और गिर गया पंडाल

Updated at : 11 Jun 2023 7:02 AM (IST)
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अलीगढ़: श्रीमद्भागवत कथा में चल रहा था गोवर्धन लीला का वर्णन, फिर हकीकत में आयी आंधी-बारिश और गिर गया पंडाल

श्रीमद्भागवत कथा में गोवर्धन लीला का वर्णन हो रहा था. जिस तरह से इन्द्र देवता कुपित हो कर आंधी बारिश का मंचन हो रहा था, उसी समय आंधी बारिश हकीकत में आ गई और पंडाल गिर गया.

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अलीगढ़ . यूपी के अलीगढ़ में खेरेश्वर धाम हरिदासपुर में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा के दौरान आंधी और बारिश शुरू हो गयी. आंधी के चलते आरती के समय 108 कुंडिया यज्ञ के ऊपर लगा पंडाल भरभरा कर गिर गया. हालांकि पूजा पंडाल में किसी के दबने की सूचना नहीं है. बताया जा रहा है कि कथा में गोवर्धन लीला हो रहा था. जिस तरह से इन्द्र देवता कुपित हो कर आंधी बारिश का मंचन हो रहा था, उसी समय आंधी बारिश हकीकत में आ गई और पंडाल गिर गया.

पांडाल पूरी तरह से बनाया गया था वाटरप्रूफ

हरिदासपुर में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा का नजारा वृंदावन धाम जैसा बनाया गया था. यहां साक्षात देवी देवताओं का सुंदर चित्रण किया गया था. इतना ही नहीं पूरी तरीके से धार्मिक आश्रम बनाया गया था. हरदासपुर का महत्व भी स्वामी हरिदास की जन्मस्थली से माना जाता है. यहां भागवत कथा और 108 कुंडीय महायज्ञ का आयोजन 6 जून से शुरू हुआ था और 13 जून तक होना था. यहां सुबह 7 बजे से ही कथा व महायज्ञ का आयोजन हो रहा था. कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय अपने मुखारविंद से श्रीमद् भागवत कथा का लोक श्रवण करा रहे थे. भक्तों की संख्या भी यहां आई हुई थी. पांडाल में एंट्री के चार गेट बनाए गए थे. हालांकि कहा गया था कि भागवत कथा का पांडाल पूरी तरह से वाटरप्रूफ बनाया गया.

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भागवत कथा के दौरान गिरा पंडाल

लेकिन 10 मिनट की आंधी भी नहीं झेल पाया और भरभरा कर पंडाल ताश के पत्तों की तरह गिर गया. इस कार्यक्रम में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के आने की भी बात कही गई थी. कार्यक्रम में आई भक्त डॉ राधा भारद्वाज ने बताया कि हरदासपुर में तेज हवा चल रही थी. इस दौरान भागवद कथा चल रहा था. इसमे गोवर्धन लीला का वर्णन किया जा रहा था . जो वास्तव में सार्थक हुआ. इन्द्र देवता के कुपित होने की बात चली, तभी आंधी – तूफान आ गया और यज्ञ शाला की पंडाल गिर गया. डॉ राधा भारद्वाज ने बताया कि इंद्र देवता का कोप है. लेकिन भगवान की कृपा से किसी को कोई चोट नहीं आई. केवल पूजा का पंडाल ही गिरा है.

रिपोर्ट- आलोक सिंह, अलीगढ़

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Radheshyam Kushwaha

लेखक के बारे में

By Radheshyam Kushwaha

पत्रकारिता की क्षेत्र में 13 साल का अनुभव है. इस सफर की शुरुआत राज एक्सप्रेस न्यूज पेपर भोपाल से की. यहां से आगे बढ़ते हुए समय जगत, राजस्थान पत्रिका, हिंदुस्तान न्यूज पेपर के बाद वर्तमान में प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में धर्म अध्यात्म एवं राशिफल डेस्क पर कार्यरत हैं. ज्योतिष शास्त्र, व्रत त्योहार, राशिफल के आलावा राजनीति, अपराध और पॉजिटिव खबरों को लिखने में रुचि हैं.

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