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दुमका : पहाड़िया व संताल बच्चों के लिए संचालित आवासीय विद्यालयों का हाल, 50% से अधिक शिक्षकों के पद खाली

Updated at : 21 Aug 2023 5:54 AM (IST)
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दुमका : पहाड़िया व संताल बच्चों के लिए संचालित आवासीय विद्यालयों का हाल, 50% से अधिक शिक्षकों के पद खाली

दुमका के पहाड़िया व संताल बच्चों के लिए संचालित आवायी विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी है. काठीकुंड व गोपीकांदर में 17-17 की जगह छह-छह शिक्षकों से काम चलाया जा रहा है. वहीं, अधिकांश स्कूलों में 50 फीसद से अधिक शिक्षकों के पद खाली हैं.

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Jharkhand News: कल्याण विभाग द्वारा आदिम जनजाति पहाड़िया समुदाय के साथ संताल अनुसूचित जनजाति समाज के बच्चों के शिक्षा के लिए कुल 21 विद्यालय संचालित हैं, पर इनमें शिक्षकों की भारी कमी है. नियमित शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए विभागीय स्तर पर कुछ साल पहले घंटी आधारित शिक्षक बहाल किये गये थे, पर अब घंटी आधारित व नियमित शिक्षकों की सेवा लिए जाने के बाद भी शिक्षकों के आधे से ज्यादा पद खाली पड़े हुए हैं.

शिक्षकों की भारी कमी

बालकों के लिए गोपीकांदर में अनुसूचित जनजाति आवासीय उच्च विद्यालय है तो काठीकुंड के नकटी व दुमका के कड़हलबिल में बालिकाओं के लिए अनुसूचित जनजाति आवासीय बालिका उच्च विद्यालय है, जहां शिक्षकों के लिए 17-17 पद स्वीकृत है. गोपीकांदर व नकटी में 17 की जगह छह-छह शिक्षकों से काम चलाया जा रहा है. यानी यहां 11-11 शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं, जबकि कड़हलबिल में सात पद खाली पड़े हुए हैं. वहीं, बालकों के लिए शिकारीपाड़ा के इंदरबनी में संचालित आवासीय उच्च विद्यालयों में 12 के विरुद्ध छह, प्लस टू पिछड़ी जाति आवासीय बालिका विद्यालय कुरूवा में 12 के विरुद्ध नौ ही शिक्षक हैं.

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मध्य विद्यालयों का हाल बेहाल

मध्य विद्यालयों का हाल तो और भी बुरा है. अनुसूचित जनजाति आवासीय मध्य विद्यालय मंझियारा में भले ही दो ही शिक्षक के पद खाली हैं, लेकिन अनुसूचित जनजाति आवासीय मध्य विद्यालय मसलिया में सात में से पांच, कैराबनी, गुम्मापहाड़ी, आसनपहाड़ी व महरा जरमुंडी में सात में से चार-चार पद खाली पड़े हुए हैं. इस तरह संचालित कुल छह दिवाकालीन प्राथमिक विद्यालयों में भी शिक्षकों की कमी है. विभाग दो-दो की वजाय एक-एक शिक्षकों से ही सिदपहाड़ी, निझोर, महुआगढ़ी, धोवाचापड़, कुंडापहाड़ी व मधुबन को संचालित कर रहा है. यानी ये इकलौते शिक्षक बीमार पड़े या छुट्टी में गये, तो स्कूल में ताला ही लटक जाया करता है.

स्कूल का नाम : स्वीकृत : कार्यरत : रिक्त पद

अजजा आवासीय उच्च विद्यालय, गोपीकांंदर : 17 : 06 : 11

अजजा आवासीय बालिका उच्च विद्यालय, नकटी : 17 : 06 : 11

अजजा आवासीय बालिका उवि, कड़हलबिल : 17 : 10 : 07

अजजा आवासीय उच्च विद्यालय, इंदरबनी : 12 : 06 : 06

प्लस टू पिछड़ी जाति आवासीय बालिका उवि, कुरूवा : 12 : 09 : 03

अजजा आवासीय मध्य विद्यालय, मंझियारा : 07 : 05 : 02

अजजा आवासीय मध्य विद्यालय, मसलिया : 07 : 02 : 05

अजजा आवासीय मध्य विद्यालय, मुर्गाथली : 07 : 06 : 01

अजजा आवासीय बालिका मध्य विद्यालय, कैराबनी : 07 : 03 : 04

अजजा आवासीय मध्य विद्यालय, गुम्मापहाड़ी : 07 : 03 : 04

अजजा आवासीय मध्य विद्यालय, आसनपहाड़ी : 07 : 03 : 04

अजजा आवासीय मध्य विद्यालय, शिकारीपाड़ा : 07 : 04 : 03

अजजा आवासीय मध्य विद्यालय, आसनसोल : 07 : 05 : 02

अजजा आवासीय मध्य विद्यालय, रामगढ़ : 07 : 04 : 03

अजजा आवासीय मध्य विद्यालय, महरा : 07 : 03 : 04

दिवाकालीन प्राथमिक विद्यालय, सिदपहाड़ी : 02 : 01 : 01

दिवाकालीन प्राथमिक विद्यालय, निझोर : 02 : 01 : 01

दिवाकालीन प्राथमिक विद्यालय, महुआगढ़ी : 02 : 01 : 01

दिवाकालीन प्राथमिक विद्यालय, धोवाचापड़ : 02 : 01 : 01

दिवाकालीन प्राथमिक विद्यालय, कुंडापहाड़ी : 02 : 01 : 01

दिवाकालीन प्राथमिक विद्यालय, मधुबन : 02 : 01 : 01

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शिक्षा विभाग से शिक्षकों की मांग

इस संबंध में जिला कल्याण पदाधिकारी संजय कच्छप ने कहा कि अभी शिक्षकों का तबादला भी किया गया है. बालिकाओं के आवासीय विद्यालयों में शिक्षिकाओं का प्रतिनियोजन किया गया है. कोशिश की जायेगी कि विषयवार शिक्षक हों. अगर ऐसा नहीं हो पाता है, तो शिक्षा विभाग से शिक्षकों की मांग की जायेगी, ताकि पहाड़िया-आदिवासी बच्चों के पठन-पाठन में परेशानी न आए.

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