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कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने खूंटी में सूखे की स्थिति का लिया जायजा, औसत से कम बारिश को बताया चिंताजनक

Updated at : 27 Jul 2022 8:37 PM (IST)
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कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने खूंटी में सूखे की स्थिति का लिया जायजा, औसत से कम बारिश को बताया चिंताजनक

कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने खूंटी में सूखे की स्थिति का जायजा लिया. खूंटी-मुरहू पथ के पास स्थिति खेतों का निरीक्षण कर खेती की स्थिति की जानकारी ली. उन्होंने उपायुक्त को फोन कर कहा कि जिले में वर्षापात व कृषि की रिपोर्ट सही नहीं मिल रही है. इस पर संवेदनशील होकर नजर रखने के लिए कहा.

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Khunti News: कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने खूंटी में सूखे की स्थिति का जायजा लिया. खूंटी-मुरहू पथ के पास स्थिति खेतों का निरीक्षण कर खेती की स्थिति की जानकारी ली. उन्होंने देखा कि अब तक कहीं भी रोपाई शुरू नहीं हुआ है. उन्होंने उपायुक्त से फोन कर कहा कि जिले में वर्षापात और कृषि की रिपोर्ट सही नहीं मिल रही है. उन्होंने रिपोर्ट पर उपायुक्त को संवेदनशील होकर नजर रखने के लिए कहा. जिससे किसानों को लाभ पहुंचाया जा सके. पत्रकारों से बात करते हुये कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने कहा कि राज्य के साथ-साथ खूंटी की स्थिति सूखाड़ की ओर जा रहा है. औसत वर्षा से 46 प्रतिशत कम बारिश हुई है. यह चिंता का विषय है. 15 अगस्त तक धान रोपाई का समय है. अभी तक एक भी खेत में धान की रोपाई नहीं दिख रही है.

वैकल्पिक उपाय को लेकर हुई बैठक की दी जानकारी

उन्होंने मौके पर बताया कि वैकल्पिक उपाय को लेकर उच्चस्तरीय बैठक किया गया है. जिसमें विषम परिस्थिति में किसानों की मदद को लेकर सुझाव आये हैं. झारखंड राज्य फसल राहत योजना के तहत फसल रोपाई में अगर किसानों को मुआवजा दिया जायेगा. योजना के तहत किसानों को राज्य सरकार सीधे राशि देगी. उन्होंने फसल राहत योजना के लिए किसानों को निबंधन करने की अपील की. सूखाड़ की स्थिति की मानक को लेकर आपदा प्रबंधन से बातचीत किया जा रहा है. पूरे राज्य की स्थिति चिंताजनक है. अभी बारिश के लिए दिन का समय है. सभी बिंदुओं पर आकलन किया जा रहा है. राज्य की स्थिति का अवलोकन कर केंद्र सरकार से समन्वय कर किसानों के हित में निर्णय लिया जायेगा.

अब तक मात्र 23 लोगों का निबंधन

कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने झारखंड राज्य फसल राहत योजना को लेकर खूंटी की स्थिति पर चिंता व्यक्त की है. उन्होंने बताया कि योजना के तहत अब तक महज 23 किसानों का ही निबंधन हुआ है. जबकि अन्य जिलों में यह आंकड़ा एक हजार से अधिक हो गया है. उन्होंने वर्षापात और फसल आच्छादन के रिपोर्ट पर भी सवाल खड़ा किया. उन्होंने बताया कि रिपोर्ट में अंतर पाया जा रहा है. इसे लेकर उन्होंने उपायुक्त को नजर रखने का निर्देश दिया है.

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