VIDEO : लोहरदगा में ओलावृष्टि के बाद खेतों में दिखे बड़े-बड़े चट्टान, जानें मौसम की मार से कब मिलेगी राहत

Updated at : 15 Mar 2020 9:46 PM (IST)
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VIDEO : लोहरदगा में ओलावृष्टि के बाद खेतों में दिखे बड़े-बड़े चट्टान, जानें मौसम की मार से कब मिलेगी राहत

झारखंड में पिछले तीन दिन से बारिश और ओलावृष्टि का दौर जारी है. तेज हवाओं के साथ बारिश शुरू होती है और ओले भी गिरने लगते हैं.

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रांची : झारखंड में पिछले तीन दिन से बारिश और ओलावृष्टि का दौर जारी है. तेज हवाओं के साथ बारिश शुरू होती है और ओले भी गिरने लगते हैं. रविवार यानी 15 मार्च, 2020 को लोहरदगा जिला के भंडरा में खेतों में बड़े-बड़े पत्थर दिखे. दरअसल, ये पत्थर ओले के रूप में गिरे और खेतों में थोड़ी ही देर में जम गये. कुछ ही देर में इन ओलों ने चट्टान का रूप धारण कर लिया.

मार्च के महीने में जरूरत से ज्यादा बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी है. सैकड़ों लोगों को बेघर कर दिया, क्योंकि ओले गिरने की वजह से उनके घरों के छत टूट गये. कच्चे मकान गिर गये. खेतों में खड़ी फसल बर्बाद हो गयी, तो लोगों को सिर छिपाने की जगह नहीं मिली. गढ़वा जिला के रंका प्रखंड के एक गांव में करीब 300 लोगों को स्कूल में शरण लेनी पड़ी.

चतरा जिला के टंडवा प्रखंड में गेरुआ नदी पर बना पुल टूट गया, जिससे 91 गांवों और करीब 1.5 लाख लोगों का जिला मुख्यालय से संपर्क टूट गया. हजारीबाग जिला के दारू प्रखंड के जिनगा गांव में इतने ओले गिरे कि सड़कों पर बर्फ की चादर बिछ गयी. हजारीबाग के बड़कागांव और चतरा के इटखोरी में नदियां उफना गयीं.

खलारी के डकरा और पिपरवार में कोयला उत्पादन ठप हो गया. कोयले की ढुलाई भी नहीं हो पायी.

साहिबगंज जिला को छोड़कर राज्य के सभी जिलों में जमकर बारिश हुई है. आपको जानकर आश्चर्य होगा कि मार्च के महीने में सामान्य बारिश 3.9 मिलीमीटर की तुलना में इस वर्ष 33.7 मिलीमीटर तक बारिश हुई है. राज्य के 24 में से 23 जिलों में बारिश हुई है. इनमें से महज एक जिला में सामान्य बारिश हुई है. बाकी जिलों में सामान्य से अधिक बारिश हुई है.

13 मार्च से 14 मार्च के बीच हजारीबाग जिला में सबसे ज्यादा 120 मिलीमीटर वर्षापात हुआ, जबकि 14 और 15 मार्च को लोहरदगा जिला में सबसे ज्यादा 44.4 मिलीमीटर बारिश हुई. इस दौरान लगभग पूरे झारखंड में वर्षा हुई. मौसम विभाग के आंकड़े बताते हैं कि कुड़ू, सतगावां, कोडरमा और हंटरगंज में 40 मिलीमीटर वर्षा हुई, तो मनातू, बिश्रामपुर, तोरपा, जरमुंडी और देवघर में 30-30 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गयी.

रामगढ़, रांची, डाल्टनगंज, बालूमाथ, गढ़वा और गोमिया में 20-20 मिलीमीटर वर्षा हुई, तो राजमहल, ओरमांझी, पांकी, पाकुड़, लातेहार, बरही, पालकोट, गोड्डा, तोपचांची, सारठ और बोकारो के चास में 10-10 मिलीमीटर वर्षा हुई.

मार्च के महीने में यानी 1 मार्च से 15 मार्च के बीच सबसे ज्यादा वर्षा पलामू जिला में हुई. यहां 120.6 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि जमशेदपुर में 108.1 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गयी. रांची में 88.5 मिलीमीटर, चाईबासा में 81.2 मिलीमीटर और बोकारो में 74.8 मिलीमीटर वर्षा हुई है.

झारखंड के रांची स्थित मौसम विज्ञान केंद्र ने जो आगामी दिनों के लिए जो पूर्वानुमान जारी किया है, उसमें कहा गया है कि 16 और 17 मार्च को बारिश से लोगों को राहत मिलेगी. यानी इन दो दिनों में बारिश नहीं होगी.

हालांकि, 18 मार्च से फिर झारखंड के दक्षिणी-पश्चिमी भागों में एक-दो जगहों पर हल्के दर्जे की वर्षा हो सकती है. इसी तरह 19 मार्च को भी राज्य के कई जिलों में मेघ गर्जन के साथ हल्के से मध्यम दर्जे की वर्षा होगी. 20 और 21 मार्च को भी राज्य में ऐसे ही हालात बने रहेंगे. यानी वर्षा होगी. अब तक राहत की बात यह है कि किसी भी जिले में भारी वर्षा का अनुमान नहीं जताया गया है. न ही ओलावृष्टि और वज्रपात की आशंका जतायी गयी है.

बात तापमान की करें, तो 18 मार्च को राजधानी रांची के न्यूनतम और अधिकतम तापमान में एक से दो डिग्री सेल्सियस तक की वृद्धि दर्ज की जायेगी. यानी बादल छाये रहें और हल्की बारिश भी हो, तो भी गर्मी का एहसास हो सकता है.

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Mithilesh Jha

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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