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वैज्ञानिकों ने बनाया धरती का सबसे गहरा काला रंग, गुम हो जाएगी हीरे की भी चमक

Updated at : 18 Sep 2019 7:11 AM (IST)
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वैज्ञानिकों ने बनाया धरती का सबसे गहरा काला रंग, गुम हो जाएगी हीरे की भी चमक

नईदिल्लीः वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में पृथ्वी के अब तक का सबसे गहरा काला रंग तैयार कर लिया है. यह काला रंग इतना गहरा है कि इसकी वजह से एक अति चमकदार हीरे की चमक भी लगभग गुम हो जाती है. इस काले रंग के पदार्थ की खोज एमआइटी के वैज्ञानिकों ने की है. इसे सीएनटी […]

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नईदिल्लीः वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में पृथ्वी के अब तक का सबसे गहरा काला रंग तैयार कर लिया है. यह काला रंग इतना गहरा है कि इसकी वजह से एक अति चमकदार हीरे की चमक भी लगभग गुम हो जाती है. इस काले रंग के पदार्थ की खोज एमआइटी के वैज्ञानिकों ने की है. इसे सीएनटी नाम दिया गया है.
सीएनटी यानी कार्बन नैनो ट्यूब… इसका सार्वजनिक प्रदर्शन 25 नवंबर को एक विज्ञान प्रदर्शनी में किया जाएगा. वैज्ञानिकों का दावा है कि यह काला रंग अपनी तरफ आने वाले रोशनी का 99 फीसद हिस्सा सोख सकता है. इस खोज के बाद यह भी माना जा रहा है कि यह अंतरिक्ष के सबसे रहस्यमय ब्लैक होल का एक छोटा नमूना वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में तैयार कर लिया है.
  • 99 फीसद से अधिक रोशनी को अपने अंदर ही सोख है
  • अनेक कलाकारों को निजी इस्तेमाल के लिए मिलेगा
  • अंतरिक्ष अभियान और ऑपटिक्स में होगा फायदा
शोधकर्ताओं ने इसे पेंट की तरह बनाया है ताकि इसे हर उस चीज पर पोती जा सके, जिसे रोशनी की चमक से बचाना हो. प्रयोग के दौरान वैज्ञानिकों ने यह साबित किया है कि इस घने काले रंग के संपर्क में आने वाले पदार्थ अपनी चमक अथवा रोशनी को परावर्तित करन की क्षमता खो देते हैं. इस वजह से हमारी आंखों के लिए वे लगभग ओझल से हो जाते हैं.
वैज्ञानिकों ने इसे बनाने के लिए कई शोध किये
एमआइटी के कला केंद्र के डेइमूट स्ट्रेबे और एयरोनॉटिक्स के प्रोफसर ब्रायन वार्ड्ल ने इस योजना को अंजाम दिया है. यह नया काला रंग कार्बन के अत्यंत सुक्ष्म कणों का समूह है. इन्हें अल्युमिनियम की पन्नी पर तैयार किया गया है. प्रयोग के दौरान यह पाया गया है कि वह वर्तमान में अपनी तरफ आने वाली 99.96 प्रतिशत रोशनी को अपने अंदर ही सोख लेने में सक्षम है. इस लिहाज से यह पृथ्वी पर मौजूद अब तक का सबस ज्यादा काला पदार्थ माना जा सकता है.
खगोल विज्ञान में उपयोग
इसके तैयार होने के बाद खास तौर पर खगोल विज्ञान में इसका ज्यादा उपयोग होने की उम्मीद की जा रही है. दरअसल इस विधि से अंतरिक्ष अभियान के दौरान जहां यंत्रों और यानों को विकिरण से बचाने की जरूरत होगी, वहां यह काला रंग काफी कारगर साबित हो सकता है. इसके अलावा ऑप्टिकल कार्यों में भी इसका बेहतर इस्तेमाल हो सकता है.
पेंट की शक्ल में बनाया गया है
प्रयोग सफल होने के बाद वैज्ञानिकों इसे पैंट की शक्ल में तैयार कर लिया है. इस पैंट के बन जाने से अब किसी भी वस्तु पर यह रंग पोता जा सकता है. इससे वह दिखना लगभग बंद कर देगा, क्योंकि उसपर पड़ने वाली अधिकांश रोशनी वहीं सोख ली जाएगी. प्रयोग के सफल होने के बाद इस रंग को कलाकारों को निजी इस्तेमाल के लिए देने की भी योजना बनायी गयी है.
वैज्ञानिकों ने साफ कर दिया है कि इस नये काले रंग को कोई आकर्षक नाम देने की उनकी कोई योजना नहीं है. विज्ञान के क्षेत्र में इसके कई नये इस्तेमाल पर भी चर्चा की जा रही है.
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