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शिक्षक नियुक्ति घोटाला : पार्थ समेत अन्य आरोपियों को फिर जमानत नहीं

Updated at : 21 Jul 2024 1:08 AM (IST)
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शिक्षक नियुक्ति घोटाला : पार्थ समेत अन्य आरोपियों को फिर जमानत नहीं

शिक्षक नियुक्ति घोटाले में गिरफ्तार पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी की न्यायिक हिरासत की अवधि समाप्त होने के बाद उन्हें शनिवार को यहां स्पेशल पीएमएलए कोर्ट में वर्चुअली पेश किया गया.

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न्यायिक हिरासत की अवधि फिर बढ़ी

संवाददाता, कोलकाता

राज्य के सरकारी व सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में हुईं नियुक्तियों में अनियमितता व शिक्षक नियुक्ति घोटाले में गिरफ्तार पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी की न्यायिक हिरासत की अवधि समाप्त होने के बाद उन्हें शनिवार को यहां स्पेशल पीएमएलए कोर्ट में वर्चुअली पेश किया गया.

वहीं, मामले के अन्य आरोपियों माणिक भट्टाचार्य, कुंतल घोष व सुजय कृष्ण भद्र उर्फ ‘कालीघाटेर काकू’ को सशरीर कोर्ट में पेश किया गया. सभी आरोपियों के अधिवक्ताओं ने मामले में इडी की जांच की गति को लेकर सवाल उठाया. हालांकि. केंद्रीय जांच एजेंसी ने भी जांच को लेकर अपना पक्ष रखा. सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद एक बार फिर आरोपियों को जमानत नहीं मिल पायी और उनकी न्यायिक हिरासत की अवधि बढ़ा दी गयी.

सूत्रों के अनुसार, मामले की सुनवाई के दौरान पार्थ चटर्जी के अधिवक्ता ने अपने मुवक्किल से संबंधित दस्तावेजों से जुड़े सवाल पर इडी की दलील को ””कमजोर”” बताया. सुनवाई के दौरान उन्होंने कोर्ट को बताया कि उनके मुवक्किल के संबंध में इडी से कुछ दस्तावेज मांगे गये थे, जो अभी तक उपलब्ध नहीं कराये गये हैं. इस संबंध में इडी के अधिवक्ता ने कहा कि वे चटर्जी से जुड़े मामले में एक और रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं.

आगे की जांच के लिए उन सभी दस्तावेजों की आवश्यकता है, इसलिए चटर्जी के अधिवक्ता को दस्तावेज़ नहीं दिये गये हैं. इसके बाद चटर्जी की ओर से उनके अधिवक्ता ने अर्जी दी कि दस्तावेज के बारे में इडी अपना लिखित बयान दे, जिसे न्यायाधीश ने मंजूर करते हुए केंद्रीय जांच एजेंसी को आवश्यक निर्देश जारी किये. इधर, पार्थ की तरह अर्पिता मुखर्जी भी वर्चुअल माध्यम से कोर्ट की सुनवाई में शामिल हुईं. अर्पिता के वकील ने कहा कि उनकी मुवक्किल बीमार हैं. उन्हें स्त्री रोग संबंधी समस्याएं हैं. दवा काम नहीं कर रही है. अधिवक्ता ने पहले ही अर्पिता की मेडिकल रिपोर्ट उपलब्घ कराये जाने के लिए आवेदन किया था. उनका आरोप है कि यह रिपोर्ट अभी तक उन्हें उपलब्ध नहीं करायी गयी है. रिपोर्ट उपलब्ध कराने के लिए फिर से आवेदन किया गया है.

इधर, माणिक भट्टाचार्य ने कोर्ट में सुनवाई के दौरान कहा कि किसी भी आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेजने से पहले जांच एजेंसी को यह जरूर बताना चाहिए कि उसके खिलाफ क्या तथ्य मिले हैं. उन्होंने इडी की जांच की गति को लेकर भी सवाल उठाया.

सुजय कृष्ण भद्र के अधिवक्ता ने कोर्ट में अपने मुवक्किल से संबंधित कुछ दस्तावेजों की हार्ड कॉपी के लिए आवेदन किया. दस्तावेजों की सूची इडी के अधिवक्ता को दे दी गयी है. मामले के अन्य आरोपी कुंतल घोष के अधिवक्ता ने भी इडी की जांच पर सवाल उठाते हुए कहा कि अभी तक इडी की जांच चल रही है. सप्लीमेंट्री चार्जशीट पर भी बात हो रही है. जांच पूरी नहीं हुई, तो सुनवाई कब होगी? सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने आरोपियों की न्यायिक हिरासत की अवधि बढ़ाते हुए अगली सुनवाई की तारीख 17 अगस्त मुकर्रर कर दी.

कोर्ट से बाहर निकलने के दौरान कुंतल घोष ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वह इस बात से दुखी है कि 21 जुलाई को तृणमूल कांग्रेस के ‘शहीद दिवस’ की रैली में वह शामिल नहीं हो पायेगा. उसने यह भी दावा किया कि उसे मामले में फंसाया गया और वह अभी भी न्याय से वंचित है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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