बंगाल चुनाव: TMC का डेढ़ दशक पुराना किला ढहा, पढ़ें भाजपा की जीत के कारण

Edited byAmitabh Kumar
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BJP Won in Bengal Election
जीत का जश्न मनाते भाजपा कार्यकर्ता (Photo: PTI)

West Bengal Election Result : पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में भाजपा की प्रचंड जीत की खुशी पूरे प्रदेश में मनाई जा रही है. नीचे पढ़ें भाजपा की जीत और टीएमसी की हार के कारण.

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West Bengal Election Result : पश्चिम बंगाल की राजनीति में सोमवार को बड़ा बदलाव दर्ज हुआ, जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता की ओर निर्णायक बढ़त बना ली. 294 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के आंकड़े 148 को पार करते हुए भाजपा 190 से अधिक सीटों पर बढ़त या जीत के साथ सरकार बनाने की स्थिति में पहुंच गयी है. यह परिणाम राज्य की राजनीति में एक नये दौर की शुरुआत का संकेत है.

करीब डेढ़ दशक से सत्ता में रही ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को इस चुनाव में बड़ा झटका लगा है. शुरुआती रुझानों से लेकर अंतिम नतीजों तक पार्टी के कई दिग्गज मंत्री पीछे रहे, जो जनाधार में गिरावट का संकेत देता है. भबानीपुर जैसे प्रतिष्ठित क्षेत्र में भी मुकाबला कड़ा रहा, जबकि राज्यभर में टीएमसी की पकड़ कमजोर होती दिखी.

भाजपा की यह सफलता अचानक नहीं आयी. 2011 में जहां पार्टी का खाता भी नहीं खुला था, वहीं 2016 में उसने तीन सीटें जीतकर शुरुआत की और 2021 में 77 सीटों के साथ मजबूत विपक्ष बनी. इस बार पार्टी ने अपने वोट प्रतिशत को 40 प्रतिशत से ऊपर ले जाते हुए व्यापक जनसमर्थन हासिल किया और ग्रामीण, आदिवासी तथा औद्योगिक क्षेत्रों में मजबूत पैठ बनायी.

भाजपा ने इन इलाकों में बड़ी बढ़त बनाई

चुनाव परिणामों में यह भी स्पष्ट हुआ कि भाजपा ने उत्तर बंगाल, जंगलमहल और सीमावर्ती इलाकों में बड़ी बढ़त बनाई, जबकि टीएमसी को शहरी क्षेत्रों और कुछ पारंपरिक गढ़ों तक सीमित होना पड़ा. कई सीटों पर भाजपा उम्मीदवारों ने भारी अंतर से जीत दर्ज की, जिससे राज्य में ‘भगवा लहर’ का संकेत मिला. राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह परिणाम केवल सत्ता परिवर्तन नहीं बल्कि राजनीतिक ध्रुवीकरण और मतदाताओं के बदलते रुझान का संकेत है. भाजपा ने विकास, राष्ट्रवाद और संगठनात्मक मजबूती के मुद्दों पर चुनाव लड़ा, जबकि टीएमसी की कल्याणकारी योजनाएं इस बार अपेक्षित असर नहीं छोड़ सकीं.

बंगाल की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू

इस जीत के साथ ही पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो गया है. आजादी के बाद राज्य में पहले वामपंथ, फिर कांग्रेस और बाद में तृणमूल कांग्रेस का दौर रहा, लेकिन अब भाजपा के नेतृत्व में नयी राजनीतिक व्यवस्था आकार लेती दिख रही है. आने वाले समय में यह बदलाव राष्ट्रीय राजनीति पर भी प्रभाव डाल सकता है.

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भाजपा की जीत के प्रमुख कारण

भाजपा की जीत के पीछे मजबूत संगठन, आक्रामक चुनाव प्रचार और बढ़ा हुआ वोट प्रतिशत अहम रहे. पार्टी ने सीमावर्ती, आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक समर्थन हासिल किया. विपक्ष की कमजोर रणनीति और तृणमूल के खिलाफ सत्ता विरोधी माहौल ने भी भाजपा को निर्णायक बढ़त दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी.

तृणमूल की हार के कारण

तृणमूल कांग्रेस को सत्ता विरोधी लहर, संगठनात्मक कमजोरी और कई नेताओं के खिलाफ असंतोष का सामना करना पड़ा. कई मंत्री अपने क्षेत्रों में पिछड़ गए, जिससे पार्टी की जमीनी पकड़ कमजोर दिखी. कल्याणकारी योजनाओं के बावजूद मतदाताओं का रुझान बदलना हार का प्रमुख कारण बना.

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लेखक के बारे में

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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