बैरकपुर : नौकरी से बैठाये जाने पर हाइकोर्ट पहुंचा पुलिसकर्मी

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आरजी कर के लिए न्याय की मांग कर एक गाना गाने के कारण बेलघरिया थाने में ट्रैफिक होमगार्ड के रूप में कार्यरत काशीनाथ पांडा (38) को कथित तौर पर नौकरी से बैठाये जाने पर उन्होंने हाइकोर्ट में मामला दायर किया है. विभाग के अधिकारियों को सूचित करने के बावजूद भी उन्हें न्याय नहीं मिला, तो अंत में वह हाइकोर्ट पहुंचे.

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बैरकपुर.

आरजी कर के लिए न्याय की मांग कर एक गाना गाने के कारण बेलघरिया थाने में ट्रैफिक होमगार्ड के रूप में कार्यरत काशीनाथ पांडा (38) को कथित तौर पर नौकरी से बैठाये जाने पर उन्होंने हाइकोर्ट में मामला दायर किया है. विभाग के अधिकारियों को सूचित करने के बावजूद भी उन्हें न्याय नहीं मिला, तो अंत में वह हाइकोर्ट पहुंचे.

सूत्रों के अनुसार, हावड़ा के डोमजूर निवासी काशीनाथ पांडा, पिछले पांच सालों से बेलघरिया थाने में ट्रैफिक होम गार्ड के रूप में कार्यरत थे. 21 अगस्त को जब पूरे देश में आरजी कर कांड को लेकर उबाल था, तो काशीनाथ ने घटना के विरोध में एक गीत गाया था और उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया था. आरोप है कि गाना पोस्ट करने के बाद से ही उन्हें लगातार धमकी मिल रही थी और मानसिक रूप से प्रताड़ित भी किया जा रहा था. काशीनाथ का आरोप है कि अक्तूबर की शुरुआत से बिना किसी शिकायत के उनसे बार-बार पूछताछ की गयी, फिर 10 अक्तूबर को उन्हें बिना कोई कारण बताये नौकरी से बैठा दिया गया.

पूजा अवकाश पीठ के न्यायाधीश पार्थ सारथी सेन ने मामला दायर करने की अनुमति दी है. मामले में काशीनाथ के वकील ने दावा किया कि अभिव्यक्ति किसी भी व्यक्ति का मौलिक अधिकार है. लेकिन उस अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप किया जा रहा है. उनका साफ सवाल है कि क्या पुलिस में नौकरी करते हुए किसी बात का विरोध नहीं किया जा सकता? 18 को मामले की सुनवाई है.

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