संयुक्त राष्ट्र से मिला राज्य की माटीर सृष्टि योजना को सम्मान : मुख्यमंत्री

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मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को घोषणा की कि संयुक्त राष्ट्र के खाद्य व कृषि संगठन ने प्राकृतिक विरासत और जैव विविधता के संरक्षण के लिए राज्य सरकार की सामुदायिक आधारित माटीर सृष्टि पहल को अंतरराष्ट्रीय प्रमाणपत्र प्रदान कर मान्यता दी है.

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कोलकाता.

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को घोषणा की कि संयुक्त राष्ट्र के खाद्य व कृषि संगठन ने प्राकृतिक विरासत और जैव विविधता के संरक्षण के लिए राज्य सरकार की सामुदायिक आधारित माटीर सृष्टि पहल को अंतरराष्ट्रीय प्रमाणपत्र प्रदान कर मान्यता दी है. मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर यह जानकारी साझा की. उन्होंने बताया कि माटीर सृष्टि पहल वर्ष 2020 में शुरू की गयी थी. इस कार्यक्रम के तहत भूमि, सिंचाई और पंचायतों से जुड़ी रणनीतियों को एकीकृत करते हुए एक समन्वित मॉडल विकसित किया गया है. इसका उद्देश्य बंजर, अनुपयोगी, शुष्क और एकल फसल वाली भूमि को उपजाऊ बनाकर बागवानी और सब्जी समेत बहुफसली खेती के लिए उपयुक्त तैयार करना है.

मुख्यमंत्री के अनुसार, तालाबों और अन्य सिंचाई स्रोतों का विकास कर अतिरिक्त सिंचाई क्षमता सृजित की गयी है, जिससे लाखों लोगों के लिए आजीविका के अवसर बढ़े हैं और परिवारों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा यह सम्मान राज्य के ग्रामीण समुदायों और किसानों के प्रयासों की वैश्विक स्वीकृति है.

इसके साथ ही एफएओ ने राज्य की तीन प्रसिद्ध सुगंधित चावल किस्मों गोविंदभोग, तुलैपांजी और कनकचूर को खाद्य व सांस्कृतिक विरासत के रूप में मान्यता दी है. मुख्यमंत्री ने एफएओ के महानिदेशक से प्राप्त प्रमाणपत्र साझा करते हुए कहा कि यह सम्मान प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, जैव विविधता की रक्षा और खाद्य-सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की दिशा में राज्य के प्रयासों का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार किया जाना है.

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