ममता फिर सत्ता में आयीं, तो बेच देंगी सभी चाय बागान: शुभेंदु

Updated at : 25 Feb 2025 2:36 AM (IST)
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ममता फिर सत्ता में आयीं, तो बेच देंगी सभी चाय बागान: शुभेंदु

विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को अलीपुरदुआर के सुभाषिनी चाय बागान के दौरे के दौरान चाय बागानों में आदिवासी श्रमिकों और गोरखा नेताओं से मुलाकात की.

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संवाददाता, कोलकाता

विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को अलीपुरदुआर के सुभाषिनी चाय बागान के दौरे के दौरान चाय बागानों में आदिवासी श्रमिकों और गोरखा नेताओं से मुलाकात की. राज्य सरकार द्वारा चाय बागान की 30 प्रतिशत भूमि को व्यावसायिक उपयोग के लिए अनुमति दिए जाने पर अधिकारी ने चेतावनी देते हुए कहा कि इस फैसले से यहां कोई चाय बागान नहीं बचेगा. बागानों में चाय की खेती के बजाय केवल होटल और रेस्तरां होंगे. इस मौके पर स्थानीय नेताओं ने अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर केंद्र सरकार से हस्तक्षेप करने और राज्य के कदम को रोकने का आग्रह किया. जवाब में अधिकारी ने कहा कि अगर पश्चिम बंगाल में भाजपा सत्ता में आती है, तो ऐसे सभी मुद्दे छह महीने के भीतर हल हो जायेंगे. उन्होंने सोमवार को अलीपुरदुआर के कालचीनी में संवाददाताओं से कहा कि अगर ममता बनर्जी 2026 में सत्ता में आती हैं, तो वह सभी चाय बागानों को बेच देंगी. अगर हम सत्ता में आते हैं, तो रोजगार और उद्योग दोनों प्रदान किये जायेंगे.

अधिकारी ने चाय बागानों और श्रमिकों की आजीविका के संभावित नुकसान पर बढ़ती चिंताओं को रेखांकित किया और चाय उगाने वाले समुदायों के हितों की रक्षा करने का संकल्प लिया.

दार्जिलिंग के सांसद ने केंद्रीय मंत्री को लिखा पत्र

दार्जिलिंग के सांसद राजू बिष्ट पहले ही केंद्रीय वाणिज्य मंत्री और भारतीय चाय बोर्ड से संपर्क कर चुके हैं और उनसे पश्चिम बंगाल सरकार के हाल ही में जारी गजट अधिसूचना पर ध्यान देने का आग्रह किया है, जिसमें चाय की भूमि का अन्य व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए स्वीकार्य उपयोग 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 30 प्रतिशत कर दिया गया है. दार्जिलिंग के सांसद ने अधिसूचना जारी करने में राज्य सरकार की जल्दबाजी की आलोचना करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार ने घोषणा के एक दिन के भीतर ही यह गजट अधिसूचना जारी करने में जल्दबाजी की. विधानसभा में किसी भी विचार-विमर्श को दरकिनार कर दिया. यह कदम न केवल विभिन्न भूमि कानूनों का उल्लंघन करता है, बल्कि 1953 के चाय अधिनियम का भी उल्लंघन करता है, जिसमें यह अनिवार्य है कि चाय बागानों की संरचनाओं में किसी भी बदलाव के लिए भारतीय चाय बोर्ड से मंजूरी लेनी होगी.

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