गुप्तिपाड़ा में 300 साल पुरानी रथ यात्रा देखने को उमड़ा जनसैलाब

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गुप्तिपाड़ा में 300 साल पुरानी रथ यात्रा देखने को उमड़ा जनसैलाब

जिले के बलागढ़ स्थित ऐतिहासिक गुप्तिपाड़ा में गुरुवार दोपहर ठीक 12 बजे रथ की रस्सी खींची गयी.

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प्रतिनिधि, हुगली.

जिले के बलागढ़ स्थित ऐतिहासिक गुप्तिपाड़ा में गुरुवार दोपहर ठीक 12 बजे रथ की रस्सी खींची गयी. करीब 300 साल पुराना यह पारंपरिक रथयात्रा उत्सव राज्य की सबसे चर्चित रथयात्राओं में से एक है. इस भव्य आयोजन को देखने के लिए बर्दवान, नदिया, उत्तर 24 परगना सहित दूर-दराज के इलाकों से हजारों श्रद्धालु उमड़ पड़े. पूरे वर्ष भगवान जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा वृंदावन जिउ मंदिर में विराजमान रहते हैं, लेकिन रथयात्रा के दिन वे मौसी के घर जाते हैं, जो कि गोसाईंगंज-बड़ाबाजार क्षेत्र में स्थित है. तकरीबन एक किलोमीटर लंबे इस रथ मार्ग पर भक्तों की भीड़ देखते ही बन रही थी. इतिहासकारों के अनुसार, गुप्तिपाड़ा की रथयात्रा की शुरुआत सन् 1740 में हुई थी. यहां का विशाल रथ ””””””””वृंदावन जिउ रथ”””””””” नाम से प्रसिद्ध है. गुप्तिपाड़ा रथयात्रा की एक विशिष्ट परंपरा भंडार लूट है, जो उल्टा रथ से एक दिन पहले आयोजित होती है.

रथयात्रा को लेकर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गये थे. हुगली ग्रामीण पुलिस के विभिन्न थानों से पुलिस अधिकारी मौके पर मौजूद थे. डीएसपी और एडिशनल एसपी स्तर के अधिकारी भी निगरानी में तैनात थे. पूरे रथ मार्ग और मेला परिसर में ड्रोन कैमरों से भी निगरानी की गई. इस दौरान एक भव्य मेले का भी आयोजन हुआ. सभी के लिए भोग-प्रसाद की व्यवस्था थी. सुबह पूजा-पाठ के बाद शाम को फिर से रथ खींचा गया.

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Subodh Kumar Singh

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