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बांग्ला नववर्ष के पहले राज्य में चुनाव चाहता है आयोग

एसआइआर के दूसरे चरण में पूरे राज्य में सुनवाई प्रक्रिया चल रही है. 14 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची जारी की जायेगी.

इस बार तीन चरणों में हो सकता है मतदान

संवाददाता, कोलकाताएसआइआर के दूसरे चरण में पूरे राज्य में सुनवाई प्रक्रिया चल रही है. 14 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची जारी की जायेगी. इसी बीच चुनाव आयोग ने बांग्ला नववर्ष से पहले राज्य में मतदान पूरा कराने की मंशा जाहिर की है. मिली जानकारी के मुताबिक इस संबंध में आयोग ने सीइओ कार्यालय को जरूरी निर्देश भी दिया है. गौरतलब है कि पिछले दिनों ही भाजपा के कुछ शीर्ष नेता दिल्ली से कोलकाता पहुंचे थे. जानकारी के अनुसार, चुनाव आयोग ने इस संबंध में सोमवार को दिल्ली में एक बैठक भी की है. आयोग ने बंगाल में भी वोटिंग कराने की तैयारी शुरू कर दी है. हालांकि, सब कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि केंद्रीय बलों की तैनाती कितनी संख्या में होगी और कब होगी. सूत्रों के मुताबिक, चुनाव शेड्यूल मार्च के पहले हफ्ते के आखिर या दूसरे हफ्ते की शुरुआत तक घोषणा हो सकता है. आयोग अप्रैल के दूसरे हफ्ते से वोटिंग प्रकिया शुरू करना चाहता है. इस बार वोटिंग का समय ज्यादा लंबा नहीं होने की संभावना है. बताया जा रहा है कि, अगर केंद्रीय बलों की तैनाती समय पर जरूरत के मुताबिक हो जाती है, तो तीन चरणों में चुनाव पूरा कर लिया जायेगा.

चुनाव आयोग के बुलावे पर सीइओ दिल्ली रवाना

चुनाव आयोग के निर्देश पर सीइओ मनोज अग्रवाल दिल्ली गये हैं. बताया जा रहा है कि चुनाव के दौरान राज्य में केंद्रीय बलों की तैनाती के लिए एक बैठक होगी. इस बैठक में यह फैसला लिया जायेगा कि बंगाल चुनाव के लिए गृह मंत्रालय कितना केंद्रीय बल यहां भेजेगा और कब से इन जवानों की तैनाती होगी.

72 घंटे बाद भी राज्य के चार अफसरों पर कार्रवाई नहीं

कोलकाता. मतदाता सूची में गड़बड़ी करने के आरोप में चुनाव आयोग द्वारा राज्य के चार डब्ल्यूबीसीएस अधिकारियों के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने का आदेश दिये जाने के करीब 72 घंटे बाद भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है. इस पर नाराजगी जताते हुए चुनाव आयोग ने संबंधित जिलों के जिलाधिकारी (डीएम) और जिला निर्वाचन अधिकारी (डीइओ) से स्टेटस रिपोर्ट तलब की है. उल्लेखनीय रहे कि दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर पूर्व और पूर्व मेदिनीपुर जिले के मयना विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता सूची से जुड़े कार्यों में गड़बड़ी के आरोप सामने आये थे. इन क्षेत्रों में कार्यरत दो निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (इआरओ) और दो सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (एइआरओ) की भूमिका पर सवाल उठे थे. चुनाव आयोग ने पहले तत्कालीन मुख्य सचिव मनोज पंत से चारों अधिकारियों को निलंबित करने की कार्रवाई करने को कहा था. हालांकि, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के हस्तक्षेप के बाद राज्य सरकार ने चारों अधिकारियों के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया. इसके बाद आयोग ने संबंधित डीएम और डीइओ को चारों अधिकारियों के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने का निर्देश दिया था, लेकिन सोमवार दोपहर तक इस दिशा में भी कोई कार्रवाई नहीं होने की सूचना है. इसके मद्देनजर चुनाव आयोग ने एक बार फिर दोनों जिलों के डीएम और डीइओ से रिपोर्ट मांगी है. आयोग ने मतदाता सूची से जुड़े डेटा एंट्री कार्य में संलिप्त सुरजीत हलदर के खिलाफ भी आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है. बताया गया है कि देबोत्तम दत्ता चौधरी और तथागत मंडल बारुईपुर पूर्व विधानसभा क्षेत्र में क्रमशः इआरओ और एइआरओ के रूप में कार्यरत थे, जबकि विप्लव सरकार और सुदीप्त दास मयना विधानसभा क्षेत्र के इआरओ और एइआरओ थे.

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