शैक्षणिक गतिविधियां बाधित करने का कोई भी प्रयास बर्दाश्त नहीं : आइआइटी खड़गपुर
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 06 Dec 2024 1:12 AM
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) खड़गपुर ने 85 शिक्षकों को अनुशासनात्मक आधार पर कारण बताओ नोटिस जारी करने के कुछ दिन बाद गुरुवार को कहा कि ‘कुछ लोगों’ के सामान्य शैक्षणिक गतिविधियों को बाधित करने के प्रयास बर्दाश्त नहीं किये जायेंगे.
संवाददाता, कोलकाता
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) खड़गपुर ने 85 शिक्षकों को अनुशासनात्मक आधार पर कारण बताओ नोटिस जारी करने के कुछ दिन बाद गुरुवार को कहा कि ‘कुछ लोगों’ के सामान्य शैक्षणिक गतिविधियों को बाधित करने के प्रयास बर्दाश्त नहीं किये जायेंगे.
संस्थान के प्राधिकारियों ने 12 नवंबर को आइआइटी शिक्षक संघ के चार पदाधिकारियों को कारण बताओ नोटिस भेजा था, जिन्होंने 20 सितंबर को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को पत्र लिखकर हाल के दिनों में भाई-भतीजावाद और संकाय सदस्यों की मनमानी भर्ती का आरोप लगाया था. जिन शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था उन्होंने 14 नवंबर को रजिस्ट्रार अमित जैन को पत्र लिखकर जवाब देने की अंतिम तिथि बढ़ाने की मांग की, जबकि 21 नवंबर को आइआइटी खड़गपुर के प्राधिकारियों ने कारण बताओ नोटिस का जवाब न देने पर चारों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू कर दी. इसके बाद 28 नवंबर को रजिस्ट्रार को दिये गये सामूहिक प्रतिवेदन में 85 शिक्षकों ने कहा कि संकाय सदस्य मांग करते हैं कि शिक्षक संघ के चार पदाधिकारियों के खिलाफ जारी कारण बताओ नोटिस तुरंत वापस लिए जायें और अनुशासनात्मक कार्यवाही रोकी जाये. इसके बाद प्राधिकारियों ने इस महीने की शुरुआत में 85 शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया और उनसे सामूहिक प्रतिवेदन पर ‘हस्ताक्षरकर्ता’ होने का कारण बताने को कहा. एक बयान में, संस्थान ने कहा कि वह ‘सभी आरोपों को खारिज करने के अपने रुख पर कायम है.
800 से अधिक संकाय सदस्यों में से, इन 85 लोगों के प्रतिवेदन पर हस्ताक्षर करने की मंशा पर सवालिया निशान खड़ा होता है. इसका उद्देश्य प्रशासन को धमकाना, सामूहिक घृणास्पद सोच को बढ़ावा देना और बिना किसी निश्चित एजेंडे के संस्थान के सामान्य शैक्षणिक कामकाज को बाधित करने के लिए समर्थन जुटाना है.
संस्थान ने कहा : कुछ को छोड़कर, अधिकांश हस्ताक्षरकर्ता एजेंडे के उद्देश्य से अनजान हैं. उनके पास कोई सबूत नहीं है. आइआइटी खड़गपुर के निदेशक ने उन्हें ‘इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस’ की प्रतिष्ठा धूमिल न करने की सलाह दी. 85 शिक्षकों से यह भी पूछा गया कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जाये. इस बीच, 85 शिक्षकों में से एक ने दो दिसंबर को रजिस्ट्रार को एक पत्र भेजा, जिसमें आइआइटीटीए की किसी भी भविष्य की गतिविधि से खुद को अलग कर लिया और दावा किया कि उनसे खाली पृष्ठ पर हस्ताक्षर कराये गये थे. वहीं, विश्वभारती विश्वविद्यालय संकाय संघ (वीबीयूएफए) ने आइआइटी खड़गपुर के उन प्रोफेसरों का समर्थन किया जिन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है.
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