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पिता की हत्या कर छोटे बेटे ने किया सरेंडर, पत्नी और बड़ा बेटा फरार

Updated at : 14 Oct 2019 6:44 AM (IST)
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पिता की हत्या कर छोटे बेटे ने किया सरेंडर, पत्नी और बड़ा बेटा फरार

कोलकाता : हर रोज अपने पिता को मां पर अत्याचार करते देख छोटे बेटे ने कुल्हाड़ी और पत्थर से मार कर अपने पिता की हत्या कर दी और खुद जाकर थाने में सरेंडर कर दिया. घटना विधाननगर के राजारहाट थाना क्षेत्र के नवाबपुर मुंशीपाड़ा इलाके की है. शनिवार रात 15 वर्षीय नाबालिग बेटे ने अपने […]

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कोलकाता : हर रोज अपने पिता को मां पर अत्याचार करते देख छोटे बेटे ने कुल्हाड़ी और पत्थर से मार कर अपने पिता की हत्या कर दी और खुद जाकर थाने में सरेंडर कर दिया. घटना विधाननगर के राजारहाट थाना क्षेत्र के नवाबपुर मुंशीपाड़ा इलाके की है. शनिवार रात 15 वर्षीय नाबालिग बेटे ने अपने पिता की हत्या कर दी. पुलिस के मुताबिक मृत पिता का नाम नुरूल अली तरफदार (42) था.

आरोपी नाबालिग बेटे ने पुलिस को बताया कि उसके पिता उसकी मां मिनारा बीबी (34) के साथ हर रोज झगड़ा करते थे. उन पर अत्याचार करते थे. शनिवार को भी रात करीब 12 बजे उसके पिता उसकी मां को मार-पीट रहे थे. घर के बरामदे में सोये छोटे बेटे की नींद टूट गयी. वह सीधे माता-पिता के घर में पहुंचा, जहां उसके पिता मां को पीट रहे थे. यह देख उसने तुरंत कुल्हाड़ी से अपने पिता के सिर पर हमला कर दिया. उसके पिता वहीं जख्मी हो गये.
इसके बाद बेटे ने पत्थर से उनकी जान ले ली. फिर तड़के करीब सवा तीन बजे आरोपी बेटे ने पुलिस थाने में जाकर सरेंडर कर दिया. विधाननगर के डीसी (हेडक्वार्टर) कुणाल अग्रवाल ने बताया कि नुरुल अली पत्थर और बालू की सप्लाई करता था. सात साल ही उसने दूसरी शादी की थी.
उसकी दूसरी बीबी बनगांव में रहती है. नुरूल हमेशा ही मिनारा को मारता-पीटता था. पुलिस बेटे को लेकर जब घटनास्थल पर पहुंची, तो वहां कुल्हाड़ी और पत्थर पर खून लगे मिले. आरोपी लड़के की मां और बड़े भाई फरार थे. उनकी तलाश की जा रही है. इधर, मृतक के बड़े भाई जलील हक ने थाने में मां और दो बेटों के खिलाफ शिकायत दर्ज करायी है.
पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. आरोपी छोटे बेटे का बयान दर्ज किया गया है. उसे फिलहाल जुवेनाइल होम में रखा गया है.
किशोर में एग्रेशन बढ़ने से हुई घटना : अभिषेक हंशा
नागेरबाजार स्थित आइएलएस हॉस्पिटल के विशेष मनोचिकित्सक अभिषेक हंशा ने बताया कि यह एक ऐसी स्थिति है, जब बच्चे अपने किसी सबसे अधिक चाहनेवाले को बचाने में असमर्थ होते हैं, तो उनके मस्तिष्क में एग्रेशन बढ़ते जाता है. हर रोज मां पर हो रहे अत्याचार को देख उस किशोर के अंदर भी एग्रेशन बढ़ते जा रहा था, जो सीमा से बाहर जाने के कारण अंत में इस घटना का रूप ले लिया.
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