कोलकाता : कॉलेजों व विश्वविद्यालयों के शिक्षकों की छुट्टियों पर रहेगी पैनी नजर

Updated at : 06 Feb 2019 4:30 AM (IST)
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कोलकाता : कॉलेजों व विश्वविद्यालयों के शिक्षकों की छुट्टियों पर रहेगी पैनी नजर

कोलकाता : पश्चिम बंगाल के कॉलेजों व विश्वविद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्तासुधारने के लिए अब शिक्षकों की छुट्टी पर नजर रखी जा रही है. अब कॉलेज के शिक्षक ज्यादा छुट्टी नहीं ले पायेंगे. कुछ समय पहले ही एक अधिसूचना जारी कर यूजीसी ने कॉलेजों में प्रत्येक सप्ताह में शिक्षकों के पढ़ाने के घंटे निर्धारित करने […]

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कोलकाता : पश्चिम बंगाल के कॉलेजों व विश्वविद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्तासुधारने के लिए अब शिक्षकों की छुट्टी पर नजर रखी जा रही है. अब कॉलेज के शिक्षक ज्यादा छुट्टी नहीं ले पायेंगे. कुछ समय पहले ही एक अधिसूचना जारी कर यूजीसी ने कॉलेजों में प्रत्येक सप्ताह में शिक्षकों के पढ़ाने के घंटे निर्धारित करने की बात कही थी. इसी का अनुसरण करते हुए अब उनके कामकाज व क्लास में अध्यापन का रिकार्ड देखा जा रहा है.

कॉलेज व विश्वविद्यालयों में शिक्षक सीधे पढ़ाने के अलावा अन्तरराष्ट्रीय स्तर के सेमिनार व अन्य प्रैक्टीकल कक्षाएं भी ले सकते हैं. प्रतिदिन क्लास लेने के अलावा शिक्षक अनुसंधान के कार्य में भी वे सहयोग करें, इसकी व्यवस्था करने के लिए कॉलेजों को कहा गया है.

हाल ही में राज्य उच्च शिक्षा काउंसिल की बैठक में इस बात पर जोर दिया गया है कि कॉलेजों में अब क्लास बंक करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जायेगी. नियमित कक्षाओं व उपस्थिति के लिए जहां लगभग सभी कॉलेजों में बायोमेट्रिक प्रणाली स्थापित की गयी है, वहीं उनके पढ़ाने के घंटों का हिसाब किया जा रहा है.

काउंसिल के एक सदस्य ने जानकारी दी कि उच्च शिक्षा के संस्थानों में शिक्षा का स्तर बढ़ाने के लिए सीआइ (कॉलेज इन्सपेक्टर) नियमित निरीक्षण करने के साथ रिकार्ड भी रखेंगे. इसी के आधार पर उनके प्रमोशन का मूल्यांकन किया जायेगा. सरकारी शैक्षणिक संस्थानों में अब फांकीबाजी नहीं चलेगी. वहीं कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन के एक सदस्य का कहना है कि कॉलेज के शिक्षकों की छुट्टी पर रोक लगायी जा रही है.
ऐसे में पढ़ाने के अलावा अनुसंधान पेपर तैयार करने के लिए समय कहां से बचेगा. दवाब डालने से शिक्षक बेहतरीन काम नहीं कर सकते हैं. राज्य उच्च शिक्षा काउंसिल की बैठक में विशेषज्ञों ने यह राय दी है कि कॉलेजों व विश्वविद्यालयों में च्वाइस्ड बेस्ड क्रेडिट सिस्टम को पूरी तरह लागू करने के लिए नयी व्यवस्था की जा रही है.
बेहतरीन शिक्षा व्यवस्था के लिए शिक्षकों के पास अनुसंधान-पेपर तैयार करने का भी अनुभव होना चाहिए. अनुभवी प्रोफेसर विद्यार्थियों के लिए अच्छे दिशा-निर्देशक बन सकते हैं, इस नजरिये से उच्च शिक्षा में उत्कृष्टता पर जोर डाला जा रहा है. विभागीय सूत्रों का कहना है कि जब एक स्कूल का शिक्षक, बिना किसी अतिरिक्त छुट्टी के बड़े काम का दायित्व ले सकता है तो कॉलेज के शिक्षक को भी लेना होगा.
इसका असर सेमेस्टर परीक्षाओं पर भी पड़ेगा. कार्यस्थल पर शिक्षकों को पूरी दायित्व के साथ पढ़ाना होगा. शिक्षकों की सुविधा के लिए कॉलेजों के इन्फ्रास्ट्रक्चर को ठीक करने के साथ ऑनलाइन सुविधाओं सहित अति आधुनिक लाइब्रेरी बनाने पर भी काम किया जा रहा है.
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