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कोलकाता : ग्रुप डी व सी कर्मचारी नियुक्ति पर अंतरिम स्थगनादेश

Updated at : 22 Jan 2019 2:17 AM (IST)
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कोलकाता :  ग्रुप डी व सी कर्मचारी नियुक्ति पर अंतरिम स्थगनादेश

कोलकाता : अलीपुरदुआर के शहीद खुदीराम कॉलेज, हुगली के तारकेश्वर कॉलेज व कूचबिहार के शीतलकुची कॉलेज के ग्रुप डी व ग्रुप सी कर्मचारी नियुक्ति पर कलकत्ता हाइकोर्ट ने अंतरिम स्थगनादेश लगा दिया है. सोमवार को न्यायाधीश अरिंदम सिन्हा ने यह निर्देश दिया. गौरतलब है कि 2017 के अगस्त महीने में राज्य सरकार ने विज्ञप्ति जारी […]

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कोलकाता : अलीपुरदुआर के शहीद खुदीराम कॉलेज, हुगली के तारकेश्वर कॉलेज व कूचबिहार के शीतलकुची कॉलेज के ग्रुप डी व ग्रुप सी कर्मचारी नियुक्ति पर कलकत्ता हाइकोर्ट ने अंतरिम स्थगनादेश लगा दिया है. सोमवार को न्यायाधीश अरिंदम सिन्हा ने यह निर्देश दिया.
गौरतलब है कि 2017 के अगस्त महीने में राज्य सरकार ने विज्ञप्ति जारी करके बताया कि कॉलेजों में ग्रुप डी व ग्रुप सी कर्मचारी की नियुक्ति के मामले में कॉलेज सर्विस कमीशन हस्तक्षेप नहीं करेगा. इस मामले में कॉलेज की अपनी परिचालन समिति को नियुक्ति का पूरा अधिकार रहेगा. विज्ञप्ति में यह भी कहा गया कि ग्रुप डी के नौकरी के उम्मीदवारों को कंप्यूटर का ज्ञान अनिवार्य नहीं रहेगा.
लेकिन यदि किसी को कंप्यूटर का ज्ञान रहता है, तो इस मामले में उसे अतिरिक्त पांच अंक दिये जायेंगे. ग्रुप सी के मामले में यदि उम्मीदवार को कॉलेज में अस्थायी कर्मचारी के तौर पर दो वर्ष का अनुभव रहता है, तो उसे अतिरिक्त पांच अंक मिलेंगे.
इस विज्ञप्ति को चुनौती देते हुए कलकत्ता हाइकोर्ट में तीन कॉलेज के नौकरी के कुछ अभ्यर्थियों ने याचिका दायर की. मामले की सुनवाई में याचिकाकर्ताओं के वकील सोमेन दत्त ने नियुक्ति में पारदर्शिता नहीं होने का आरोप लगाते हुए कहा कि नियुक्ति के मामले में भ्रष्टाचार हो रहा है.
अपने पसंदीदा अभ्यर्थियों की नियुक्ति की जा रही है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि बांकुड़ा के सालदिया कॉलेज व कूचबिहार कॉलेज के ग्रुप डी व ग्रुप सी कर्मचारी नियुक्ति के मामले में ऐसा ही आरोप लगा था.
इस वर्ष 10 जनवरी को न्यायाधीश हरीश टंडन व न्यायाधीश शुभाशीष दासगुप्ता की खंडपीठ ने अंतरिम स्थगनादेश लगाया था. सोमेन दत्त ने कहा कि यदि कंप्यूटर का ज्ञान रखनेवाले व्यक्ति की जरूरत नहीं है, तो अतिरिक्त पांच नंबर क्यों दिये जा रहे हैं. ग्रुप सी के मामले में यदि किसी को अनुभव रहता है, तो उसे नये लोगों के साथ क्यों जोड़ा जाये.
इस संबंध में सरकारी वकील का कहना था कि केवल इसी कॉलेज में नहीं बल्कि कॉलेजों में भी पूरी प्रक्रिया समाप्त हो गयी है. इसलिए नियुक्ति की प्रक्रिया को रोका न जाये. दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायाधीश अरिंदम सिन्हा ने मामले को मूल मामले के साथ खंडपीठ में भेज दिया व मामले का निपटारा न होने तक स्थगनादेश लगा दिया.
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