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बीएलएलआरओ भेजे गये न्यायिक हिरासत में, बाद में मिली रियायत

Updated at : 23 Nov 2018 2:38 AM (IST)
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बीएलएलआरओ भेजे गये न्यायिक हिरासत में, बाद में मिली रियायत

कोलकाता : जमीन संबंधी एक मामले में अदालत की अवमानना करने के आरोप में गुरुवार को पश्चिम मेदिनीपुर जिला के बीएलएलआरओ को कलकत्ता हाइकोर्ट के निर्देश पर न्यायिक हिरासत में रखा गया था.बाद में मामले को लेकर राज्य सरकार की ओर से पैरवी करने के बाद अदालत के प्रधान न्यायाधीश देवाशीष करगुप्ता और न्यायाधीश शंपा […]

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कोलकाता : जमीन संबंधी एक मामले में अदालत की अवमानना करने के आरोप में गुरुवार को पश्चिम मेदिनीपुर जिला के बीएलएलआरओ को कलकत्ता हाइकोर्ट के निर्देश पर न्यायिक हिरासत में रखा गया था.बाद में मामले को लेकर राज्य सरकार की ओर से पैरवी करने के बाद अदालत के प्रधान न्यायाधीश देवाशीष करगुप्ता और न्यायाधीश शंपा सरकार के डिवीजन बेंच ने पहले दिये निर्देश पर सशर्त और एक निश्चित तिथि तक के लिये स्थगनादेश जारी किया और मामले की अगली सुनवाई की तारीख 30 नवंबर मुकरर्र की.
इस बीच बीएलएलआरओ को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने संबंधी निर्देश को लेकर सुप्रीम कोर्ट से स्टे आर्डर लेना होगा, नहीं तो अभियोजन पक्ष को जमीन वापस करनी होगी और इसकी जानकारी कलकत्ता हाइकोर्ट को देनी होगी.
गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता रविलाल मैत्र और प्रदीप नियोगी ने कहा कि वर्ष 1970 में पश्चिम मेदिनीपुर जिला के नारायणगढ़ ब्लॉक अंतर्गत साढ़े ग्यारह एकड़ जमीन के मालिक का नाम का रिकार्ड करने का निर्देश निचली अदालत द्वारा दिया गया था.
उपरोक्त निर्देश का पालन नहीं किये जाने पर जमीन के पुनर्वास और वापस लौटाने का दावा करते हुए वर्ष 2013 में विष्णुप्रिया दे ने कलकत्ता हाइकोर्ट में याचिका दायर की. कलकत्ता हाइकोर्ट के तत्कालीन न्यायाधीश प्रणव चट्टोपाध्याय के डिवीजन बेंच ने विष्णुप्रिया दे को जमीन वापस लौटाने का निर्देश दिया. इसके बाद भी जमीन का मालिकाना उन्हें प्राप्त नहीं हुआ.
इसके बाद उन्होंने अदालत की अवमानना किये जाने को लेकर कलकत्ता हाइकोर्ट मेें याचिका दायर की. उनकी ओर से पैरवी करनेवाले अधिवक्ता ने दावा किया कि सभी दस्तावेज मौजूद होने के बावजूद उन्हें जमीन वापस नहीं लौटायी जा रही है.
अदालत का निर्देश भी अधिकारी नहीं मान रहे हैं. कथित तौर पर अदालत में हाजिर होने के निर्देश के बावजूद पिछली सुनवाई के दौरान स्थानीय बीएलएलआरओ सनद कुमार विश्वास उपस्थित नहीं हुए थे.
गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश देवाशीष करगुप्ता की डिवीजन बेंच ने सनद कुमार विश्वास को पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने का निर्देश दिया. उपरोक्त निर्देश पर सनद कुमार विश्वास को हाइकोर्ट की हिरासत में रखा गया. सुनवाई के दूसरे सत्र में राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल किशोर दत्ता और अतिरिक्त एडवोकेट जनरल ए मजूमदार ने बीएलएलआरओ के पक्ष से उपरोक्त निर्देश में रियायत बरते जाने की पैरवी की.
उनकी ओर से कहा गया कि अदालत की निर्देश की अवमानना नहीं की गयी है. जमीन के कुछ हिस्से का रिकार्ड किया जाना अभी बाकी है. अदालत दिये गये निर्देश पर पुन:विचार करे. उनके अनुरोध पर बीएलएलआरओ को 30 नवंबर तक का समय दिया गया.
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