बारूद के ढेर पर मंगलाहाट

Updated at : 20 Sep 2018 5:49 AM (IST)
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बारूद के ढेर पर मंगलाहाट

हावड़ा : एशिया के सबसे प्राचीन मंगलाहाट बारूद के ढेर पर है. एक चिंगारी से मंगलाहाट खाक हो सकता है. बागड़ी मार्केट में शनिवार देर रात को लगी आग अभी भी पूरी तरह से बुझी नहीं है. महानगर के दमकल विभाग को एड़ी चोटी का मेहनत करना पड़ा है. ऐसे में मंगलाहाट में अगर आग […]

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हावड़ा : एशिया के सबसे प्राचीन मंगलाहाट बारूद के ढेर पर है. एक चिंगारी से मंगलाहाट खाक हो सकता है. बागड़ी मार्केट में शनिवार देर रात को लगी आग अभी भी पूरी तरह से बुझी नहीं है. महानगर के दमकल विभाग को एड़ी चोटी का मेहनत करना पड़ा है. ऐसे में मंगलाहाट में अगर आग लगती है, तो स्थिति बड़ी भयावह होगी.
पिछले महीने प्रशासनिक बैठक में खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलाहाट को लेकर बैठक करने का निर्देश मेयर को दिया था लेकिन अभी स्थिति जस की तस बन हुई है. प्राचीन यह मंगलाहाट हार्ट ऑफ द सिटी के पास है. चारों तरफ प्रशासनिक भवन हैं. हाट से सटा हावड़ा थाना भी है. सबसे बड़ी परेशानी यहां की सड़कों को लेकर है. दमकल को जल्दी पहुंचना यहां बहुत आसान नहीं होगा.
सोमवार आैर मंगलवार को होता है करोड़ों का व्यवसाय
मंगलाहाट के लिये यहां कुल 9 भवन है. 50 हजार से अधिक हॉकर हैं, जबकि कुल व्यवसायियों की संख्या एक लाख के आस-पास है. सभी भवनों की हालत बेहद खराब है. बिजली की तारें पूरी तरह से खुली है. मीटर बॉक्श में बंद नहीं है. अाग बुझाने के लिए इक्का-दुक्का ही सिलिंडर रखा हुआ है, उसमें भी जंग लग चुका है. पानी रखने के लिए कोई रिसर्वर नहीं है.
अधिकतर दुकानें लकड़ी आैर टिन की बनी है. बारिश के दिनों में पानी नंगी तारों पर गिरते ही चिंगारी निकलती है. व्यवसायियों का कहना है कि जिस दिन यहां अाग लगेगी, कुछ भी नहीं बचेगा. दमकल के लिए आग काबू कर पाना भी संभव नहीं होगा.
1987 में यहां लगी थी आग
1987 के नवंबर महीने में मंगलाहाट में भयावह आग लगी थी. इस अग्निकांड के बाद यह मार्केट पोड़ा मंगलाहाट के नाम से प्रचलित हो गया. यहां लगभग 5000 व्यवसायी सोमवार आैर मंगलवार को व्यवसाय करते हैं लेकिन अग्निशमन की कोई व्यवस्था नहीं है. रिजवान खान नामक व्यवसायी ने कहा कि आग लगने के बाद भी यहां कोई सावधानी नहीं बरती गयी है.
हम व्यवसायी सिर्फ जान जोखिम में डालकर यहां व्यवसाय नहीं करते हैं, बल्कि लाखों रुपये का सामान यहां रखते हैं. आग लगती है तो हम कहीं के भी नहीं रहेंगे. इस मंगलाहाट का सुध लेने वाला कोई नहीं है. पुलिस विभाग, नगर निगम आैर दमकल विभाग एक बार देखने तक नहीं आती है कि हम व्यवसायी आखिर किस हालात में व्यवसाय करते हैं.
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