उम्रकैद की सजा काट रहा व्यक्ति तीन साल बाद बेकसूर करार

Updated at : 19 Jul 2018 8:46 AM (IST)
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उम्रकैद की सजा काट रहा व्यक्ति तीन साल बाद बेकसूर करार

कोलकाता :उम्रकैद की सजा काट रहे नदिया के एक व्यक्ति को कलकत्ता हाइकोर्ट ने बेकसूर करार दिया. नदिया के कोतवाली थाना इलाके के रहनेवाले साधन मंडल को गृहिणी के साथ दुष्कर्म व उसे आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में निचली अदालत ने तीन वर्ष पूर्व आजीवन कारावास की सजा सुनायी थी. निचली अदालत के […]

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कोलकाता :उम्रकैद की सजा काट रहे नदिया के एक व्यक्ति को कलकत्ता हाइकोर्ट ने बेकसूर करार दिया. नदिया के कोतवाली थाना इलाके के रहनेवाले साधन मंडल को गृहिणी के साथ दुष्कर्म व उसे आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में निचली अदालत ने तीन वर्ष पूर्व आजीवन कारावास की सजा सुनायी थी. निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए साधन ने हाइकोर्ट में याचिका दायर की थी. बुधवार को न्यायाधीश जयमाल्य बागची की खंडपीठ ने उसे बेकसूर करार दिया.

साधन के वकील कल्लोल मंडल ने कहा कि उक्त महिला के पिता व पति ने महिला की ट्रेन से कटकर मौत के बाद रेल पुलिस या स्थानीय थाने, कहीं भी शिकायत नहीं की थी. रेल पुलिस ने भी उक्त महिला को मानसिक तौर पर अवसादग्रस्त बताया था. मजिस्ट्रेट के पास शिकायत करने का काफी समय उन्हें मिला था, लेकिन कोई शिकायत नहीं की गयी. निचली अदालत में घटना को प्रमाणित करने का कोई तथ्य पेश नहीं किया गया था.

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इसके अलावा अपने फैसले में न्यायाधीश ने कहा था कि 15 लोगों के बयान पर वह विश्वास नहीं कर पा रहे हैं. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी दुष्कर्म का प्रमाण नहीं मिला था. सरकारी वकील पार्थ प्रतीम दास ने कहा कि महिला का पति ही घटना का मूल गवाह है. पुलिस को उसने जो बताया उसके आधार पर ही जांच की गयी.

उल्लेखनीय है कि 2012 के अप्रैल में कृष्णनगर व बहादुरपुर रेल स्टेशन के बीच एक महिला की मौत हो गयी थी. आरोप था कि उसने ट्रेन के साथ कूद कर आत्महत्या की है. महिला के पति व पिता की मौजूदगी में पोस्टमार्टम किया गया था. रेल पुलिस को दोनों ने बताया था कि वह मानसिक अवसाद से भुगत रही थी.

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हालांकि घटना के नौ दिन बाद मजिस्ट्रेट के पास जाकर महिला के पिता ने साधन मंडल के खिलाफ दुष्कर्म की शिकायत की. मजिस्ट्रेट के निर्देश पर पुलिस ने साधन के खिलाफ दुष्कर्म और आत्महत्या के लिए प्रेरित करने का आरोप लगाते हुए जांच शुरू की. 2015 में निचली अदालत ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनायी थी.

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