कोल एंप्लाॅइज फोरम ने कर्मचारी हित में कोल इंडिया के समक्ष रखीं कई मांगें

कोल इंडिया लिमिटेड के कार्यरत और सेवानिवृत्त, दोनों तरह के कर्मचारियों की कुछ कठिनाइयों के मद्देनजर इनके संगठन कोल एंप्लाइज फोरम ने कोल इंडिया के सामने अपनी कुछ जरूरी मांगें रखी हैं.
कोल इंडिया प्रबंधन से मिला समाधान का आश्वासन
संवाददाता, कोलकाता.
कोल इंडिया लिमिटेड के कार्यरत और सेवानिवृत्त, दोनों तरह के कर्मचारियों की कुछ कठिनाइयों के मद्देनजर इनके संगठन कोल एंप्लाइज फोरम ने कोल इंडिया के सामने अपनी कुछ जरूरी मांगें रखी हैं. फोरम की तरफ से कहा गया है कि विगत चार अगस्त को संगठन के एक प्रतिनिधिमंडल ने कोल भवन में चेयरमैन से मिल कर उन्हें अपनी मांगों से अवगत करा चुका है. बताया गया है कि अत्यंत सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुई इस बैठक में कोल इंडिया चेयरमैन की तरफ से समस्याओं के समाधान का आश्वासन भी मिला है. फोरम ने कहा है कि उनकी मांगों में अत्यंत कम राशि वाली सीएमपीएस पेंशन में वृद्धि की मांग की गयी है. बताया गया है कि इस मांग से संबंधित कागजात पिछले वर्ष सितंबर में भी दिये गये थे. इस साल भी विगत जुलाई महीने में ये कागजात पुन: सौंपे गये हैं.
फोरम के अध्यक्ष विमान मित्रा के अनुसार, उन लोगों ने फिक्स्ड कॉर्पस में भी वृद्धि की मांग के साथ-साथ सीपीआरएमएस और सीपीआरएमएस-एनई के तहत घरेलू उपचार के बदले मिलने वाली रकम में भी बढ़ोतरी करने का अनुरोध कोल इंडिया प्रबंधन से किया गया है. फोरम ने कहा है कि ऑपरेशन, डायलिसिस, फिजियोथेरेपी और कुछ अन्य मामलों में उपचार तथा महंगी दवाओं की खरीद के बदले मिलने वाली राशि बढ़ायी जानी चाहिए. कोल एंप्लाइज फोरम ने कोल इंडिया प्रबंधन से कहा है कि जहां संस्थान द्वारा चिन्हित अस्पताल नहीं हैं, वहां अन्य अस्पतालों में इलाज कराने पर चिकित्सा खर्च का भुगतान होना चाहिए.
इसके साथ ही हीयरिंग एड, चश्मा खरीद और दांतों की चिकित्सा पर हुए खर्च के मद में भी भुगतान करने पर विचार करने का अनुरोध किया गया है. इसके अतिरिक्त एनएबीएच हॉस्पिटल्स को चिन्हित करते हुए उन्हें घोषित करने की भी मांग कोल इंडिया के सामने रखी गयी है. श्री मित्रा के हवाले से बताया गया है कि फोरम ने कंपनी के अस्पतालों में भर्ती होकर चिकित्सा कराने की स्थिति कैशलेस इलाज की सुविधा प्रदान करने की भी मांग उठायी है. फोरम की मांगों से संबंधित स्मार पत्र में कोल इंडिया प्रबंधन का ध्यान उन कर्मचारियों की तरफ भी खींचा गया है, जो महज हजार रुपये से भी कम की पेंशन के चलते चिकित्सा सुविधा से वंचित हो रहे हैं.Photo : CIL
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