अंधेरे से उजाले तक: UP ने बिजली कनेक्शन देने में पेश की मिसाल, देश के बाकी सभी राज्यों का तोड़ा रिकॉर्ड
हर घर रोशन, यूपी बना बिजली पहुंचाने में मिसाल
UP News: प्रधानमंत्री सौभाग्य योजना के तहत उत्तर प्रदेश ने देश भर में सबसे ज्यादा घरों को बिजली कनेक्शन देकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है. योजना के तहत 91.8 लाख से अधिक घरों को बिजली से जोड़ा गया, जो अन्य राज्यों की तुलना में कहीं अधिक है.
UP News: उत्तर प्रदेश ने प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना यानी सौभाग्य योजना के तहत देश के दूसरे राज्यों के मुकाबले सबसे ज्यादा घरों को बिजली कनेक्शन दिया. योजना के तहत यूपी में 91.8 लाख से ज्यादा यानी 91,80,571 घरों को बिजली से जोड़ा गया. यह संख्या बिहार के 32.6 लाख, ओडिशा के 24.5 लाख और असम के 23.3 लाख कनेक्शनों से काफी ज्यादा है.
देशभर में 2.86 करोड़ घर हुए रोशन
सौभाग्य योजना के जरिए देशभर में कुल 2.86 करोड़ घरों का विद्युतीकरण किया गया. यह योजना उन परिवारों तक बिजली पहुंचाने के लिए लाई गई थी, जिनके घरों में बिजली का कनेक्शन नहीं था. खासकर ग्रामीण इलाकों में बिजली से वंचित परिवारों को इससे काफी फायदा मिला. योजना को 31 मार्च 2022 को बंद किया गया.
2017 में शुरू हुई थी सौभाग्य योजना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 सितंबर 2017 को सौभाग्य योजना की घोषणा की थी. इसका शुरुआती लक्ष्य दिसंबर 2018 तक सभी इच्छुक बिजली-विहीन परिवारों को कनेक्शन देना था, जिसे बाद में मार्च 2019 तक बढ़ाया गया. योजना के लिए 16,320 करोड़ रुपये का केंद्रीय बजट रखा गया था.
गरीब परिवारों को मुफ्त कनेक्शन
योजना के तहत 2011 की सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना यानी SECC में गरीब के तौर पर चिन्हित परिवारों को मुफ्त बिजली कनेक्शन देने का प्रावधान था. वहीं, दूसरे परिवारों को 500 रुपये में कनेक्शन दिया जाना था. इस रकम को भी किस्तों में चुकाने की सुविधा दी गई थी.
कनेक्शन के साथ मिलीं ये सुविधाएं
सौभाग्य योजना में सिर्फ बिजली का कनेक्शन देना ही मकसद नहीं था. कनेक्शन के साथ नजदीकी बिजली पोल से सर्विस केबल, एनर्जी मीटर, LED बल्ब के साथ एक लाइट प्वाइंट की वायरिंग और मोबाइल चार्जिंग प्वाइंट भी शामिल था.
मार्च 2019 तक पूरा हुआ शुरुआती लक्ष्य
सरकार के मुताबिक मार्च 2019 तक उस समय तक चिन्हित सभी इच्छुक बिजली-विहीन परिवारों को बिजली कनेक्शन दिया जा चुका था. इसके बाद कुछ परिवार, जिन्होंने शुरुआत में कनेक्शन लेने से इनकार किया था, बाद में बिजली कनेक्शन लेने के लिए तैयार हुए.
सात राज्यों ने बाद में जोड़े लाखों परिवार
असम, छत्तीसगढ़, झारखंड, कर्नाटक, मणिपुर, राजस्थान और उत्तर प्रदेश ने बाद में करीब 19.09 लाख ऐसे परिवारों की जानकारी दी, जो पहले कनेक्शन लेने के इच्छुक नहीं थे, लेकिन बाद में उन्होंने बिजली कनेक्शन की इच्छा जताई. इन परिवारों के विद्युतीकरण को भी मंजूरी दी गई. इन सातों राज्यों ने 31 मार्च 2021 तक 100 फीसदी घरेलू विद्युतीकरण की सूचना दी थी.
31 मार्च 2022 को योजना हुई बंद
सौभाग्य योजना के तहत 31 मार्च 2022 तक देश में कुल 2.86 करोड़ घरों को बिजली से जोड़ा जा चुका था. योजना के लिए कुल 14,082 करोड़ रुपये की परियोजनाएं मंजूर हुई थीं, जबकि 6,305 करोड़ रुपये का केंद्रीय अनुदान जारी किया गया था. इसी के साथ योजना औपचारिक रूप से बंद हो गई.
यूपी के आंकड़े बताते हैं चुनौती कितनी बड़ी थी
यूपी में सबसे ज्यादा कनेक्शन दिए जाने की वजह यह भी थी कि योजना शुरू होने के समय राज्य में देश के मुकाबले सबसे ज्यादा बिजली-विहीन परिवार थे. ऐसे में 91.8 लाख से ज्यादा कनेक्शन का आंकड़ा बताता है कि राज्य के सामने चुनौती कितनी बड़ी थी और उस दिशा में बड़े स्तर पर काम किया गया.
अब छूटे घरों के लिए RDSS का सहारा
सौभाग्य योजना के बाद भी अगर कोई ऐसा परिवार रह गया था, जो योजना की अवधि में मौजूद था लेकिन किसी वजह से बिजली कनेक्शन से छूट गया, तो उसके लिए सरकार ने रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (RDSS) के तहत बिजली पहुंचाने का प्रावधान किया है. सरकार के आंकड़ों के मुताबिक यूपी में भी ऐसे छूटे हुए घरों के विद्युतीकरण के लिए RDSS के तहत मंजूरी दी गई है.
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